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सोमवार, 26 दिसंबर 2011

ज्येष्ठ रंगकर्मी पं. सत्यदेव दुबे कालवश



मुंबई - नाटकांना वेगळ्या वाटेवर नेणारे, रंगभूमीवर नवा इतिहास रचणारे प्रायोगिक रंगभूमीवरील ज्येष्ठ रंगकर्मी पं. सत्यदेव दुबे यांचे आज निधन झाले. ते ७५ वर्षांचे होते. आज सकाळी साडेअकराच्या सुमारास दुबेजींनी शांतपणे या जगाला निरोप दिला. त्यांच्या जाण्याने रंगमंचावरील एक धीरगंभीर आवाज आज शांत झाला आहे. ते अविवाहित होते. त्यांचे असंख्य शिष्यगण हेच त्यांचे गणगोत होते.

वांद्रे येथील साहित्य सहवासातील निवासस्थानी त्यांचे पार्थिव संध्याकाळी पाच वाजेपर्यंत अंत्यदर्शनासाठी ठेवण्यात आले होते. मराठी व हिंदी नाट्यसृष्टीतील अनेक कलाकारांनी त्यांना आदरांजली वाहिली. साडेसहा वाजता शिवाजी पार्क स्मशानभूमीतील विद्युतदाहिनीत त्यांच्यावर अंत्यसंस्कार करण्यात आले. त्यांच्या निधनाने फक्त मराठीच नाही तर हिंदी, इंग्रजी व गुजराती नाट्यसृष्टीही शोकसागरात बुडाली आहे. त्यांच्या जाण्याने प्रायोगिक रंगभूमीवरील प्रयोगशील रंगकर्मी हरपल्याची भावना व्यक्त होत आहे.

नासिरूद्दीन शहा, आशुतोष गोवारीकर, रोहिणी हट्टंगडी मिता वशिष्ठ, विजय केंकरे, अरूण काकडे, अजित भुरे, नंदू माधव, राजपाल यादव आदी मान्यवरांनी त्यांच्या पार्थिवाचे अंत्यदर्शन घेतले. तर शिवाजीपार्क स्मशानभूमीत महेश भट्ट, नीना कुलकर्णी, सुलभा देशपांडे यांच्यासह नाट्यसृष्टीतील रंगकर्मींनी दुबे यांना श्रद्धांजली वाहिली.

दुबेजींना मिळालेले पुरस्कार

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार ( १९७१)

सर्वोत्कृष्ट पटकथेसाठी राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार ( चित्रपट भूमिका, १९७८)

सर्वोत्कृष्ट संवादासाठी फिल्मफेअर पुरस्कार ( चित्रपट जुनून, १९८0)

पद्मभूषण ( २0११)

सोमवार, 20 जून 2011

लोकपाल विधेयक पर दो नए मतभेद उभरे

लोकपाल विधेयक पर दो नए मतभेद उभरे



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को लोकपाल के दायरे में लाने के विवादास्पद मुद्दे पर सरकार और समाज के सदस्यों के कड़े रूख के बीच लोकपाल विधेयक पर गठित संयुक्त मसौदा समिति की बैठक सोमवार समाप्त हो गई। हालांकि कल 4.30 में फिर से बैठक होगी।

लोकपाल बिल बनाने के लिए गठित ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सरकार और सिविल सोसाइटी के नुमाइंदों के बीच सोमवार को हुई बैठक नाकाम रही। इस बैठक के बाद भी जहां एक ओर कुछ मुद्दों पर पहले से ही मौजूद असहमति बरकरार है वहीं दो नए मुद्दों पर असहमति उभर कर सामने आई है।

इस बैठक के बाद आज दोनों पक्षों का रुख नरम रहा और वे एक-दूसरे पर हमलावर तेवरों के साथ मीडिया से नहीं मिले। टीम अन्ना की ओर से प्रशांत भूषण ने बताया कि बैठक का माहौल अच्छा था। कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन दो नए मामलों पर मतभेद भी उभर गए।

ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि प्रशांत भूषण ने कहा कि लोकपाल को गठित करने वाली चयन समिति में कौन लोग शामिल होंगे, इस पर असहमति उभरकर सामने आई है। भूषण ने कहा कि सरकारी प्रतिनिधि चयन समिति में सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करना चाहते हैं। जबकि सिविल सोसाइटी के सदस्य स्वतंत्र लोगों को इस समिति में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा लोकपाल समिति को हटाने के लिए अपील के अधिकार को लेकर भी मतभेद सामने आया है। सरकारी प्रतिनिधि चाहते हैं कि लोकपाल समिति को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील का हक केंद्र सरकार के पास रहे। लेकिन सिविल सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि लोकपाल समिति को हटाने के लिए अपील का हक सबको होना चाहिए।

वहीं, ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसाइटी के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने लोकपाल बिल को लेकर सरकार को 40 बिंदू दिए थे। सरकार का कहना है कि इनमें से 11 पर सहमति बन गई है। लोकपाल को चुनने के लिए चयन समिति के गठन और उसे हटाने पर सरकार अपना नियंत्रण रखना चाहती है।'

वहीं, दूसरी ओर ड्राफ्टिंग समिति में शामिल सरकारी प्रतिनिधियों की तरफ से मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बातचीत को संतोषजनक बताया। कपिल सिब्बल ने बैठक के बाद कहा है कि कई मुद्दों पर समिति में शामिल सरकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी है, लेकिन कुछ मुद्दों पर अब भी असहमति बनी हुई है। उनका कहना है कि जिन मु्द्दों पर पहले से टकराव था, उन पर अब भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। सिब्बल ने यह भी कहा कि मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक में सरकार के प्रतिनिधि और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि एक-दूसरे को अपना-अपना ड्राफ्ट सौंपेंगे।

सिब्बल ने यह जानकारी भी दी कि जुलाई में राजनीतिक दलों को लोकपाल बिल का ड्राफ्ट सौंपा जाएगा और उनकी प्रतिक्रिया ली जाएगी। जिसके बाद इसे कैबिनेट में ले जाया जाएगा और फिर संसद में इसे पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के कार्यालय में 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में समाज पक्ष की ओर से न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े को छोड़ कर दस सदस्यीय समिति के सभी सदस्य भाग ले लिए थे।

यह बैठक कुछ विवादित मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों में वादविवाद की पृष्ठभूमि में शुरू हुई और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के खिलाफ है।

इससे पहले, वरिष्ठ मंत्रियों ने सरकार की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए कल शाम विचारविमर्श किया था।

सरकार ने न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को भी लोकपाल के दायरे में लाए जाने का विरोध किया है जबकि अन्ना हजारे नीत समाज की राय है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति हेगड़े ने कहा कि जहां तक हो सके, हम मुद्दों के हल की कोशिश करेंगे। कुल छह मुद्दे हैं जिन पर हमारी राय अलग अलग है।

पिछली बैठक 15 जून को हुई थी जिसमें सरकार के प्रतिनिधियों ने समाज के सदस्यों से अपना प्रारूप पेश करने को कहा था। इन प्रतिनिधियों ने कहा था कि वह भी अपना प्रारूप पेश करेंगे। यह भी तय किया गया कि मसौदा विधेयक को उन बिंदुओं के साथ मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा जिन पर मतभेद हैं।

कांग्रेस द्वारा कड़ा रूख अपनाने का संकेत देते हुए पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने हजारे को एक पत्र भेज कर कहा कि उनके [हजारे] द्वारा उठाए गए मुद्दों पर वह [सोनिया] अपने विचार स्पष्ट कर चुकी हैं।

हजारे के अनशन पर हेगड़े की टिप्पणियों और दिल्ली में हुई बैठक में उनके भाग न लेने के कारण अटकलें लगाई जा रही थीं कि समाज पक्ष के प्रतिनिधियों में मतभेद हैं। इस बारे में हेगड़े ने कहा कि वह यह बताने के लिए 21 जून को होने वाली बैठक में भाग लेंगे कि समाज पक्ष में कोई मतभेद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व की प्रतिबद्धताओं के चलते वह आज की बैठक में भाग नहीं ले पा रहे हैं।

सरकार ने प्रधानमंत्री के पद को लोकपाल के दायरे में लाने से साफ इंकार किया है वहीं कांग्रेस के कोर समूह ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का पक्ष लिया है।

सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया है कि सर्वदलीय बैठक 30 जून के बाद बुलाई जा सकती है क्योंकि तब तक संयुक्त समिति का विधेयक तैयार करने का काम पूरा हो जाएगा।

वरिष्ठ मंत्री पी चिदंबरम और पार्टी के कुछ अन्य शीर्ष नेता कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर मतभेद हैं।

खबरें हैं कि इस बारे में संप्रग के घकों में भी मतभेद हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस गठबंधन की अगुवाई कर रही है तो उसे सबको साथ लेकर चलना होगा। गौरतलब है कि सरकार ने इस मामले में राजनीतिक दलों से रायशुमारी के लिए अगले माह सर्वदलीय बैठक बुलाने का भी मन बना लिया है।

लोस अध्यक्ष मीरा कुमार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुला कर सरकार को लोकपाल पर विभिन्न दलों की राय जानने का मौका मुहैया करवाया दिया है। बदले राजनीतिक हालात में लोकपाल के अधिकार क्षेत्र को लेकर चुप्पी साधे बैठे विपक्ष के लिए जल्द ही अपना पक्ष साफ करना जरूरी होगा।

हालांकि, सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि सोमवार और जरूरत होने पर मंगलवार को बैठक कर समिति अपना काम पूरा कर लेगी। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली दावा कर चुके हैं कि समिति दो मसौदों की बजाय एक ही मसौदे में अलग-अलग राय समाहित कर कैबिनेट को सौंपेगी।

सूत्रों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक के लिए अगले माह के पहले हफ्ते की कोई तारीख तय की जाएगी। इस बैठक के जरिए लोकपाल से जुड़े मुद्दों पर सरकार विभिन्न दलों की राय लेना चाहती है। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ने भी बुधवार को सभी दलों के प्रमुख नेताओं को अपने घर पर बैठक के लिए बुलाया है।

 आम तौर पर लोकसभा अध्यक्ष सत्र शुरू होने के पहले ऐसी बैठक बुलाती हैं। मगर इस बार यह बैठक सत्र की तारीख तय होने से पहले ही बुलाई गई है। बैठक में लोकपाल समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। पिछले दिनों कांग्रेस कोर ग्रुप ने तय किया है कि इस मामले पर संसद में बिल लाने से पहले सरकार सभी दलों की राय लेगी। इससे पहले विभिन्न दलों की राय लेने की सरकार की कोशिश नाकाम हो चुकी है।

कनीमोरी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं

कनीमोरी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2जी स्पेक्ट्रम मामले में द्रमुक सांसद कनीमोरी और कलैंगनर टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति बी एस चौहान की विशेष पीठ ने दोनों आरोपियों से कहा कि वे विशेष सीबीआई अदालत में नियमित जमानत याचिका दाखिल करने से पहले उनके खिलाफ आरोप तय होने का इंतजार करें।

न्यायालय ने कहा कि इसके बाद ही सीबीआई अदालत, उनकी पिछली जमानत याचिकाओं पर हुई सुनवाई से अप्रभावित रहते हुए, इस बारे में फैसला कर सकती है। न्यायालय की ओर से जमानत याचिका खारिज करने के फैसले का मतलब है कि आरोप तय होने तक कनीमोरी और कुमार को जेल में ही रहना होगा।

अदालत ने लगभग डेढ़ घंटे तक सीबीआई और आरोपियों के वकीलों की ओर से पेश दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।

सीबीआई ने यह कहते हुए जमानत याचिका का विरोध किया कि कलैंगनर टीवी के साथ हुए 200 करोड़ रुपये के अवैध आर्थिक लेन-देन से जुड़े मूल दस्तावेज बरामद होने अभी बाकी हैं और आरोपी जमानत मिलने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

गौरतलब है कि सिंघवी प्रारंभ से ही 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर नजर बनाए हुए हैं। वे करोड़ों रुपये के इस घोटाले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका के बारे में सरकार से कई बार सवाल कर चुके हैं।

द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि की बेटी कनीमोरी के लिए जमानत की यह आखिरी उम्मीद है। वह करीब एक महीने से दिल्ली की तिहाड़ जेल में हैं। इससे पहले सीबीआइ की विशेष अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट भी उनकी जमानत की अर्जी खारिज कर चुके हैं।

 कनीमोरी और शरद कुमार पर सीबीआइ ने कलैगनर टीवी में 200 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन करने का आरोप लगाया है। स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद बलवा की डीबी रियलिटी से यह रकम प्राप्त करने वाले कलैगनार टीवी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कनीमोरी और कुमार की 20-20 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों को गत 20 मई को गिरफ्तार किया गया था।

शनिवार, 11 जून 2011

अब पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी

अब पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी


कोलकाता [निर्भय देवयांश]। लंबे संघर्ष के बाद पश्चिम बंगाल में 'परिवर्तन' का परचम लहराने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब राज्य का नाम बदलकर बांग्ला या बंगदेश करना चाह रही हैं। उनका तर्क है, चूंकि देश में सिर्फ पश्चिम बंगाल है और पूर्व बंगाल का कोई अस्तित्व नहीं है। कभी इस नाम से अलग राज्य हुआ करता था, लेकिन पाकिस्तान से विभाजन के बाद पूर्व बंगाल बांग्लादेश बन गया। ऐसे में अब पश्चिम बंगाल का नाम बदल देना चाहिए। ममता को बांग्ला व बंगदेश दोनों नाम पसंद हैं, इसलिए आने वाले समय में किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है।

 दूसरी तरफ वामपंथी बुद्धिजीवी इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल नाम कोई खराब नहीं है। इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, इसलिए नाम बदलने की जरूरत नहीं है। बांग्ला साहित्य के वरिष्ठ लेखक सुनील गंगोपाध्याय कहते हैं कि आखिर इसकी क्या जरूरत है? हर राज्य की अपनी पहचान है और उसे आगे भी कायम रखने की जरूरत है। हालांकि, परिवर्तनवादी बुद्धिजीवी नाम परिवर्तन के पक्ष में हैं। जाने-माने पेंटर जोगेन चौधरी कहते हैं कि राज्य के नाम परिवर्तन में हर्ज नहीं है। नई सरकार सोच-समझकर यह कदम उठा रही होगी। जब देश में सिर्फ एक ही बंगाल है, तो पश्चिम शब्द हटाने से अच्छा ही होगा। पेंटर समीर आइच ने उदाहरण देते हुए कहा कि कि पहले भी कई शहरों के नाम बदले गए हैं। कई राज्यों की राजधानी के नाम भी बदले गए हैं। कलकत्ता से कोलकाता, बंबई से मुंबई, मद्रास की जगह चेन्नई..। राज्यों में उड़ीसा का नाम बदलकर ओड़िसा किया गया, फिर पश्चिम बंगाल का नाम में कोई हर्ज नहीं।

शुक्रवार, 20 मई 2011

ममता बनर्जी ने संभाली प. बंगाल की कमान

ममता बनर्जी ने संभाली प. बंगाल की कमान



कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वाम के 34 वर्ष के शासनकाल का अंत करने वाली ममता बनर्जी ने 38 सदस्यीय तृणमूल कांग्रेस-कांग्रेस सरकार की मुखिया के तौर पर शुक्रवार को शपथ लेकर एक नया इतिहास रच दिया क्योंकि वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गई है।

राज्यपाल एम के नारायणन ने 56 वर्षीय ममता को राज्य की 11वीं मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। उनके साथ तृणमूल के 35 और कांग्रेस के दो सदस्यों ने मंत्री पत्र की शपथ ली। तृणमूल कांग्रेस के चार विधायकों को राज्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई।

शपथ लेने के समय ममता साधारण सफेद साड़ी और तिरंगा उत्तरीय पहने हुए थीं। उन्होंने बांग्ला में ईश्वर के नाम पर शपथ ली। ममता के कैबिनेट में शामिल होने वालाें में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के उप नेता पार्थ चटर्जी, फिक्की के पूर्व सचिव एवं तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीते अमित मित्र, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मानस भुइयां, कांग्रेस विधायक दल के नेता अबु हिना शामिल हैं। संकेत हैं कि अमित मित्र को राज्य का वित्त मंत्री बनाया जा सकता है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दोपहर एक बजकर एक मिनट पर शपथ ली। शपथ का यह समय ममता ने खुद तय किया था। शपथ ग्रहण समारोह में 3,000 से ज्यादा अतिथि मौजूद थे जिनमें पराजित मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और वाम मोर्चे के संयोजक विमान बोस शामिल थे।

डेढ़ घंटे से अधिक चले शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम, राज्य के पूर्व वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एच ए हलीम भी उपस्थित थे। पूर्व राज्यपाल वीरेन जे शाह ने भी समारोह में शिरकत की।

बुधवार, 18 मई 2011

भारद्वाज ने कहा, येद्दियुरप्पा के पास भारी बहुमत

भारद्वाज ने कहा, येद्दियुरप्पा के पास भारी बहुमत



बेंगलूर। कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री बी एस येद्दियुरप्पा के पास भारी बहुमत है और इस बारे में कोई संदेह नहीं है।

कर्नाटक में भाजपा सरकार के साथ एक तरह से चल रहे राजनीतिक युद्ध के बीच, यहां एक सरकारी समारोह में मुख्यमंत्री के साथ मौजूद भारद्वाज ने अपने और येद्दियुरप्पा के बीच मतभेदों से बचने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के करीब एक सप्ताह बाद पहली बार भारद्वाज और येद्दियुरप्पा एक मंच पर नजर आए।

बहरहाल, खुद को वापस बुलाए जाने की भाजपा की मांग पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यपाल के तौर पर उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति ने की थी तथा उनके [राष्ट्रपति के] अलावा और कोई उन्हें [भारद्वाज को] वापस नहीं बुला सकता।

कर्नाटक लोकसेवा आयोग के स्वर्ण जयंती समारोह में उन्होंने कहा, 'मैं यह तथ्य जानता हूं कि मुझे पूरी तरह संविधान के अनुरूप ही काम करना है।'

राज्यपाल ने कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की थी जिसके बाद भारद्वाज के खिलाफ भाजपा के उच्च्च स्तरीय अभियान में भाग ले कर आज सुबह नई दिल्ली से लौटे येद्दियुरप्पा तनावमुक्त नजर आए और मंच पर दोनों को कई बार बातचीत करते देखा गया। भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा 'यह समझना चाहिए कि मुख्यमंत्री राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। उनके पास भारी बहुमत है, इस बारे में कभी कोई विवाद नहीं रहा और हम मित्र हैं। यह राजनीतिक तनाव अप्रासंगिक है। हमें खुद को संविधान और कानून के प्रति समर्पित करना होगा।'

उन्होंने कहा कि जहां तक उनका सवाल है तो उनकी कुछ भी गलत करने की कोई योजना नहीं है लेकिन, 'मेरे हाथ संविधान से बंधे हुए हैं।'

भारद्वाज ने कहा कि वह चाहते हैं कि कर्नाटक में उनकी सरकार एक ख्यातिप्राप्त सरकार बने। उपनिषद को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि अतिथि भगवान की तरह होता है और राज्यपाल के तौर पर वह राज्य के अतिथि हैं।

नई दिल्ली में पिछले दो दिन में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात कर, राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की भारद्वाज की सिफारिश को खारिज करने और उन्हें वापस बुलाने की मांग की।

मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिल कर, अपनी सरकार का बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा का सत्र शीघ्र बुलाने का अनुरोध करेंगे।

भारद्वाज ने येद्दियुरप्पा को राज्य के विकास के लिए कड़ी मेहनत करने वाला मुख्यमंत्री करार दिया। उन्होंने कहा 'अभी भी मुख्यमंत्री राज्य के विकास के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। मैं जानता हूं कि वह दिन में 18 से 20 घंटे तक काम करते हैं।'

राज्यपाल ने यह आरोप खारिज कर दिया कि वह पक्षपात करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी पक्षपात नहीं किया। उन्होंने कहा कि येद्दियुरप्पा के खिलाफ उनके मन में कुछ भी नहीं है।

उन्होंने कहा, 'मेरे चपरासी से लेकर सचिव तक, मैं सभी के साथ प्यार और अपनेपन से व्यवहार करता हूं और बदले में यही चाहता हूं।' मुख्य सचिव, सचिवों और राज्य के नौकरशाहों को अपने संबोधन में भारद्वाज ने कहा 'सिद्धांतों के आधार पर और एक दूसरे को सम्मान देते हुए काम करिए।'

 उन्होंने राज्य के नौकरशाहों की सराहना करते हुए कहा कि वह अन्य राज्यों में अपने समकक्षों की तुलना में बेहतर काम कर रहे हैं। गुजरे जमाने की याद करते हुए येद्दियुरप्पा ने कहा कि राजनीति में आने से पहले, कभी वह एक क्लर्क के तौर पर सरकारी नौकरी करते थे। उन्होंने कहा 'मुख्यमंत्री बनने के बाद, मैंने कई सबक सीखे। आने वाले दो वर्षों में मैं पारदर्शी प्रशासन पर पूरा ध्यान दूंगा। इसके लिए मैं सभी वरिष्ठों का सहयोग चाहता हूं।'

बुधवार, 11 मई 2011

प्रशासन बेखबर, राहुल पहुंचे भट्टा परसौला गांव

प्रशासन बेखबर, राहुल पहुंचे भट्टा परसौला गांव




ग्रेटर नोएडा। प्रशासन को बिना जानकारी दिए हुए काग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को भट्टा परसौल गाव के लोगों से मुलाकात की। यहा के लोगों की भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई थी। राहुल प्रशासन को सूचित किए बगैर गाव में सुबह के छह बजे पहुंचे और ग्रामीणों के घर गए। उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझने के लिए उनसे बात की।

गौरतलब है कि शनिवार को पुलिस और किसानों के बीच हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यह जगह पार्टियों के लिए राजनीतिक अखाड़ा बन गया। राजनीतिक दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति की तीखी आलोचना की है।

अमेठी से सासद राहुल ने बीते साल अलीगढ़ जिले के टप्पल गाव का दौरा किया था और 'यमुना एक्सप्रेस-वे परियोजना' के लिए मायावती सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि के लिए अधिक मुआवजे की माग की थी।

ग्रेटर नोएडा और इससे सटे इलाकों के किसान अपनी जमीन के लिए मायावती सरकार से अधिक मुआवजे की माग कर रहे हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल दिल्ली में राष्ट्रीय लोक दल के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि सरकार संसद के आगामी सत्र में भूमि अधिग्रहण अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करेगी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने गौतम बुद्ध नगर में किसानों पर पुलिस कार्रवाई की कल निंदा करते हुए माग की थी कि भूमि अधिग्रहण के चलते विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए एक नया कानून बनाया जाए।

जोशी ने कहा कि किसानों की जमीन सस्ती दर पर लेना और उद्योगपतियों को इसका दुरूपयोग करने की इजाजत देना गलत है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जारी आदोलन के मद्देनजर किसानों ने राज्य के गाजियाबाद जिले के महरौली गाव में कल जितेन्दर नागर के नेतृत्व में एक पंचायत की और अपनी जमीन छोड़ने से इंकार कर दिया।

 अपने आदोलन के लिए समर्थन जुटाने के लिए किसान घर-घर गए और ग्रामीणों से कहा कि वह उनकी जमीन वापस दिलाने के लिए सरकार पर दबाव डाले।

बुधवार, 4 मई 2011

खांडू के हेलीकॉप्टर का मलबा व शव मिला

खांडू के हेलीकॉप्टर का मलबा व शव मिला



ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू सहित लापता हुए हेलीकॉप्टर का मलबा और पांच क्षतविक्षत शव बुधवार सुबह राज्य के तवांग जिले के जंग झरना के करीब से बरामद किए गए।

उधर, केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि अरुणाचल के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू को लेकर लापता हुए हेलीकॉप्टर का मलबा मिल गया है और शव भी बरामद किए गए हैं, लेकिन शवों की अभी पहचान नहीं हो पाई है।

उन्होंने मीडिया से अपील की कि आधिकारिक पुष्टि होने तक वह किसी तरह का अनुमान न लगाए। चिदंबरम ने कहा कि दुर्घटनास्थल की पहचान कर ली गई है, कुछ शव देखे गए हैं। अधिक जानकारी का इंतजार करें।

कुल 96 घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद बुधवार सुबह करीब 10 बजे खोजी दल ने सुदूर लोबोतंग क्षेत्र में मलबा पाया। यह क्षेत्र समुद्र से 10 हजार फुट की ऊंचाई पर खड़ी पर्वत श्रृंखलाओं और घने जंगलों वाला है। शवों को वहां बाहर निकालने के बाद ईटानगर लाए जाने की सम्भावना है। अधिकारियों के मुताबिक पर्वत श्रृंखला से शवों को निकालने में बचाव दल को तीन से चार घंटे का समय लग सकता है। भारी बर्फबारी और बारिश के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि शनिवार को मुख्यमंत्री खांडू को तवांग से ईटानगर ले जा रहा पवन हंस कंपनी का हेलीकॉप्टर एएस 350 बी-3 सुबह 9.50 बजे लापता हो गया था। हेलीकॉप्टर के पायलट से आखिरी संपर्क उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद हुआ था इस समय हेलीकॉप्टर सेला दर्रे के करीब 13,700 फुट की ऊंचाई पर था।

 हेलीकॉप्टर की तलाश के लिए बुधवार को पांचवे दिन भारतीय वायु सेना के छह हेलीकॉप्टरों ने सेला दर्रे में तलाशी अभियान शुरू किया था। कांग्रेस विधायक सेवांग धोनदुप की छोटी बहन येशमी लामू भी हेलीकॉप्टर में सवार थीं। इसके अलावा इसमें मुख्यमंत्री के मुख्य सुरक्षा अधिकारी और दो पायलट मौजूद थे।

सोमवार, 2 मई 2011

अमेरिका के लिए दुश्मन नंबर एक था ओसामा

अमेरिका के लिए दुश्मन नंबर एक था ओसामा


नई दिल्ली। अमेरिका के लिए ओसामा बिन लादेन दुश्मन नंबर एक था। 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के बाद वह अमेरीकी ख़ुफि़या एजेंसी सीआईए के लिए सर्वाधिक वाछित व्यक्ति था।

आतंकी नेटवर्क अलकायदा की स्थापना करने वाला ओसामा बिन लादेन [54वर्ष] न्यूयार्क और वाशिगटन में 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों सहित कई आतंकी घटनाओं का मास्टरमाइंड था।

वह 1998 में अफ्रीका में अमेरिका के दो दूतावासों पर हुए बम हमलों और अक्तूबर 2000 में अदन के यमनी बंदरगाह पर यूएसएस कोल पर हुए हमले की घटनाओं में संदिग्ध था।

सऊदी अरब से निष्कािसत ओसामा बिन लादेन अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर अमेरिका नीत हमले के बाद से ही भागता फिर रहा था। तालिबान ने ही लादेन को अफगानिस्तान में पनाह दी थी। अमेरिका नीत हमले में तालिबान के शासन का खात्मा हो गया था।

वर्ष 1957 में जन्मा लादेन सऊदी अरब के सबसे धनी भवन निर्माता का बेटा था। कई अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घटनाओं के लिए अमेरिका को ओसामा और उसके साथियों की तलाश थी। दस साल से अमेरिका ओसामा को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर अरबों डॉलर खर्च कर चुका है।

ओसामा बिन लादेन के पास अथाह संपत्ति है। उसने अफगानिस्तान में तालेबानी अभियान को संरक्षण दे रखा था। उसने अमेरिका के खिलाफ पवित्र युद्ध और अमेरिकीयों और यहूदियों को मारने का आह्वान किया था।

इस्लामिक ट्रेनिंग सेंटरों की स्थापना में सहयोग देने का भी ओसामा पर शक है। इनकी मदद से चेचेन्या और पूर्व सोवियत संघ के कई हिस्सों में लड़ाई के लिए योद्धा तैयार किए जाते हैं। कहा जाता है कि ओसामा के आसपास कोई तीन हज़ार लड़ाकों की फ़ौज होती थी।

ओसामा की ताक़त की बुनियाद बनी उसके परिवार द्वारा सऊदी अरब में निर्माण कार्यो के धंधे से अर्जित की गई संपत्ति थी। सऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया।

कई जानकार मानते हैं कि ओसामा को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी।

अफ़ग़ानिस्तान में ओसामा ने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की, जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया।

धर्म का तिरस्कार करने वाली एक विचारधारा के खिलाफ लड़ाई में अफ़गानी मुस्लिम भाइयों का साथ देने के लिए मिस्त्र, लेबनान और तुर्की से हज़ारों लोग बिन लादेन के साथ आ गए।

ओसामा बिन लादेन के ग्रुप को अरब अफ़गान के नाम से जाना जाने लगा था।

सोवियत सेना के लौट जाने के बाद अरब अफ़गान अमेरिका और मध्य पूर्व में उसके सहयोगियों के खिलाफ जुट गए।

ओसामा बिन लादेन अपना पारिवारिक व्यवसाय संभालने के लिए सऊदी अरब लौट गया, पर 1991 में सरकार विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया गया।

इसके बाद पाच साल तक वह सूडान में रहा और जब अमरीका के दबाव में सूडानी सरकार ने भी उसे निकाल दिया तो वह अफ़ग़ानिस्तान लौट गया। अमेरिका का कहना है कि ओसामा तीन बड़े हमलों में शामिल था। एक 1993 में व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर में हुई बमबारी, दूसरा 1996 में सऊदी अरब में 19 अमरीकी सैनिकों की हत्या और तीसरा 1998 में कीनिया और तंज़ानिया में हुई बमबारी।

11 सितंबर, 2001 को व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले ने तो उसे अमेरिका के लिए अतिवाछित बना ही दिया था।

जानकार मानते हैं कि ओसामा का ग्रुप अपहरण और बमों से हमले करने वाले अन्य ग्रुपों से अलग है क्योंकि वह एक सुगठित ढाँचे वाला ग्रुप न होकर कई महाद्वीपों में काम कर रहे कई ग्रुपों का गठबंधन है। अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि ओसामा बिन लादेन के सहयोगी, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, मध्य पूर्व और एशिया के 40 से भी अधिक देशों में सक्त्रिय हैं।

ओसामा से मिलने वाले लोगों के मुताबिक वह बहुत कम बोलने वाला, शर्मीला किस्म का इंसान था। उसकी तीन पत्नियाँ हैं। 11 सितंबर 2001 के बाद से ही ये अटकलें लगाई जाती रही थी कि वह कहा है। पाकिस्तान को उसका संभावित ठिकाना बताया गया। कई बार यह दावा भी किया गया कि वह मारा जा चुका है। पर उसकी ओर से समय-समय पर अपने संदेश वाले टेप भिजवाकर इन दावों को झूठा साबित किया गया।

 अमेरिका अधिकारियों को हमेशा यही लगता रहा कि ओसामा अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कहीं छिपा है। हालाकि पाकिस्तान इसका खंडन करता रहा, लेकिन अब उसकी मौत पाकिस्तान में ही हुई है। ऐसे में पाकिस्तान की भी पोल खुल गई है। अमेरिका ने ओसामा के ठिकाने के बारे में जानकारी देने वाले को ढ़ाई करोड़ डॉलर का इनाम देने की घोषणा कर रखी थी।

अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन मारा गया

अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन मारा गया



इस्लामाबाद/वाशिंगटन। अमेरिका के विशेष बलों ने सोमवार सुबह पाकिस्तान की राजधानी के नजदीक अबोटाबाद में एक हेलीकॉप्टर हमले में दुनिया के सर्वाधिक वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया।

अमेरिका लगभग दस साल से अलकायदा सरगना को जिंदा या मुर्दा पकड़ने की कोशिशों में लगा था और आखिरकार उसे आज इसमें सफलता मिल गई। अधिकारियों ने बताया कि तड़के चलाए गए अभियान में विशेष बल के कर्मी उस परिसर में उतरे जहां लादेन अपने वफादार अरब अंगरक्षकों की पहरेदारी में मौजूद था। इस अभियान में उन्होंने इस सर्वाधिक खूंखार आतंकी को ढेर कर दिया। इस खूंखार आतंकी सरगना के मारे जाने की खबर दुनिया को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस से अपने सीधे संबोधन में दी।

ओबामा ने टीवी चैनलों पर लादेन के मारे जाने की प्रारंभिक खबरें प्रसारित होने के बाद अपने संबोधन में कहा कि बिन लादेन [54 वर्ष] मारा गया है और उसका शव अमेरिका के कब्जे में है।

लादेन के सिर पर ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम था। एबीसी न्यूज ने अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अभियान में इस शीर्ष आतंकी सरगना के अतिरिक्त संदेशवाहकों के रूप में मानव ढाल बनकर रहने वाला उसका एक बेटा और एक महिला भी मारी गई।

प्रारंभिक खबरों में कहा गया था कि इन संदेशवाहकों के जरिए लादेन का पता लगा लिया गया था। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार परिसर में मौजूद अन्य महिलाओं और बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

अमेरिका के विशेष दल ने इस्लामाबाद से 120 किलोमीटर दूर अबोटाबाद के नजदीक बिलाल नगर क्षेत्र में इस अभियान को अंजाम दिया। पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अब तक कोई टिप्पणी नहीं आई है।

अमेरिकी अधिकारियों ने एबीसी न्यूज को बताया कि दो हेलीकाप्टरों ने रात डेढ़ बजे और दो बजे तथा 20 से 25 नेवी सील्स ने विशेष संयुक्त बल कमान के नेतृत्व में सीआईए के सहयोग से परिसर पर हमला बोला और लादेन तथा उसके लोगों को घेर लिया। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि लादेन ने इस लड़ाई के दौरान अपने हथियार से गोली चलाई।

अमेरिकियों ने लड़ाई खत्म होने के बाद लादेन का शव अपने कब्जे में ले लिया और उसकी पहचान की पुष्टि की।

अभियान के दौरान अमेरिका का एक हेलीकाप्टर क्षतिग्रस्त हो गया जिसे अमेरिकी सैनिकों ने खुद विस्फोटकों से नष्ट करने का फैसला किया।

पाकिस्तान के कई समाचार चैनलों ने परिसर के खाली अहाते में जलते हेलीकाप्टर की फुटेज प्रसारित की।

उन्होंने सोमवार सुबह पाकिस्तानी सैनिकों से घिरे एक परिसर की फुटेज भी प्रसारित की।

खबरों में कहा गया कि पाकिस्तानी सैनिकों ने क्षेत्र में घर-घर जाकर तलाशी ली। पाकिस्तान के समाचार चैनलों ने कहा कि जिस मकान में लादेन रह रहा था, वह खेतों के बीच में स्थित था और उसकी सात फुट ऊंची चहार दीवारों पर बिजली के तार लगे हुए थे।

खबर है कि अमेरिका पिछले साल अगस्त में यह सूचना मिलने के बाद महीनों से इस परिसर की निगरानी कर रहा था कि वहां हो सकता है कि लादेन रह रहा हो।

मकान में कोई फोन या टेलीविजन नहीं था और इसमें रहने वाले लोग कूड़ा करकट जला दिया करते थे।

मकान में ऊंची खिड़कियां थीं और पहुंचने के कुछ ही बिन्दु थे। अमेरिकी अधिकारियों ने इससे अंदाज लगाया कि यह किसी को छिपाने के लिए बनाया गया है।

मीडिया की खबरों में कहा गया कि मकान में खैबर पख्तूनख्वा के कुछ लोग रहते थे।

पाकिस्तान सैन्य अकादमी अबोटाबाद के नजदीक ही स्थित है। यह एक ऐतिहासिक शहर है जिसका नाम मेजर जेम्स एबट के नाम रखा गया है। इस ब्रिटिश अधिकारी ने ही 1853 में इस शहर की स्थापना की थी।

अमेरिकी अधिकारी पूर्व में कहते थे कि उनका मानना है कि लादेन अफगानिस्तान की सीमा से लगते पाकिस्तान के कबाइली क्षेत्र में रह रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक टेलीविजन संबोधन में लादेन के मारे जाने की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकियों की एक छोटी टीम ने अभियान को अंजाम दिया। लड़ाई के बाद उन्होंने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया और उसका शव अपने कब्जे में ले लिया।

 ओबामा के संबोधन के तुरंत बाद पाकिस्तानी तालिबान ने दावा किया कि तड़के हुए अमेरिकी हमले में लादेन नहीं मारा गया। तालिबान ने जीओ समाचार चैनल को एक बयान भेजकर कहा कि लादेन के मारे जाने की खबर बेबुनियाद है।

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

अक्षय से हार गई प्रियंका

अक्षय से हार गई प्रियंका


प्रियंका चोपड़ा ने आखिर मान ही लिया कि अक्षय कुमार उनसे बेहतर हैं। उन्होंने कुबूल किया है कि खतरों से खेलने का हुनर जितना अच्छा अक्षय को है, उतना अच्छा मुझे नहीं है। दरअसल, पिछले वर्ष शो खतरों के खिलाड़ी का संचालन करने वाली प्रियंका के हाथ से इस बार शो के नए सीजन का संचालन करने का मौका अक्षय ने छीन लिया है। अक्षय से बाजी हारने के बाद प्रियंका इन दिनों अपने इस को-आर्टिस्ट की तारीफ में कसीदे पढ़ने लगी हैं। उन्होंने यह भी कहा, स्टंट से जुड़ी कोई भी चीज हो, उससे अक्षय का जुड़ना बिल्कुल सही है। मैंने खतरों के खिलाड़ी के पहले दो सीजन देखे थे, जिसे अक्षय ने होस्ट किया था। वे जानते हैं कि किस तरह डर पर काबू पाने के लिए प्रतिभागी का हौसला बढ़ाना है। जब मैंने उनके साथ अंदाज और ऐतराज फिल्म की थी, तब उन्होंने मुझे भी हिम्मत और हौसला बनाए रखने के लिए प्रेरित किया था। शो खतरों के खिलाड़ी के नए सीजन के लिए उन्हें मैं ऑल द बेस्ट कहती हूं। हालांकि प्रियंका यह बताना नहीं भूलती कि वे इस समय कोई टीवी शो नहीं कर सकतीं, क्योंकि फिल्मों की शूटिंग में वे काफी बिजी हैं। वे बताती हैं, अभी मेरे हाथ में पांच फिल्में हैं। बर्फी और अग्निपथ की शूटिंग चल रही है। डॉन 2 की शूटिंग अभी खत्म हुई है। जल्द ही कृष 2 और जनम-जनम का साथ है हमारा तुम्हारा की शूटिंग शुरू करूंगी। मैं इस समय टीवी शो क्या, एक दिन की छुट्टी के बारे में भी नहीं सोच सकती।

डर व पक्षपात के बिना काम करे सीबीआई

डर व पक्षपात के बिना काम करे सीबीआई



नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो [सीबीआई] को बेकसूरों को निशाना नहीं बनाने की नसीहत देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि जांच एजेंसी को किसी डर और पक्षपात के बिना काम करना चाहिए। दोषियों के खिलाफ उनके पदों की परवाह किए बिना मामला दर्ज करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े लोगों से जुड़े मामलों की जांच में सीबीआई अधिकारियों को कड़ी कसौटी पर उतरना पड़ता है। एजेंसी के नए मुख्यालय का यहां उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सीबीआई की जांच बिना किसी वैरभाव, निर्दोषों को प्रताड़ित किए बिना और बेकसूरों को निशाना बनाए बिना होनी चाहिए।

मनमोहन ने कहा कि सीबीआई को बिना किसी भय और बिना किसी पक्षपात के काम करना चाहिए तथा पदों की परवाह किए बिना उन सबके खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए जो दोषी हैं। जो भी देश के कानून का उल्लंघन करे चाहे वह शक्तिशाली हो उसके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीबीआई ने अन्य जांच एजेंसियों के लिए अनुकरण का एक मानदंड स्थापित किया है लेकिन सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इस प्रमुख जांच एजेंसी के लिए जरूरी श्रमशक्ति, वित्तीय मदद और प्रौद्योगिकी मुहैया कराने के लिए कटिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सीबीआई के लिए 71 अतिरिक्त विशेष अदालतों के गठन का फैसला किया है जिनमें से 64 को मूंजरी मिल गई है लेकिन अभी केवल 16 काम कर रही हैं।

 मनमोहन ने कहा कि पिछले सालों में सीबीआई देश की प्रमुख जांच एजेंसी बनकर उभरी है और सीबीआई को जांच सौंपने के लिए काफी जोर रहता है। उन्होंने 186 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सीबीआई के मुख्यालय की शानदार नई इमारत का जिक्र आधुनिक कला और हरित इमारत के रूप में किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस नई इमारत में आप सब अनुकूल और सहज माहौल में काम कर सकेंगे।

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

पूछताछ के बाद कलमाड़ी गिरफ्तार

पूछताछ के बाद कलमाड़ी गिरफ्तार




नई दिल्ली। वर्ष 2009 में लंदन में हुई क्वीन्स बैटन रिले [क्यूबीआर] के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई ने सोमवार को सुरेश कलमाड़ी से पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

सीबीआई ने राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष पद से हटाए गए कलमाड़ी से कुछ नए मुद्दों पर स्पष्टीकरण के लिए पेश होने को कहा था जो कि क्यूबीआर घोटाले के सिलसिले में एजेंसी के अधिकारियों की लंदन यात्रा के दौरान सामने आए।

कलमाड़ी ने इससे पहले अपनी विदेश यात्रा का हवाला देते हुए सीबीआई के समक्ष पेश होने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह 19 अप्रैल के बाद ही घर वापसी करेंगे। लेकिन विदेश यात्रा से लौटने के बाद भी वह सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए और उन्होंने कहा कि वह अब भी दिल्ली में नहीं हैं।

सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि वर्ष 2009 में क्यूबीआर के दौरान एएम फिल्म्स और एएम कार एंड वैन हायर लिमिटेड से सौदे में कथित अनियमितता से जुड़े मामले में दो सदस्यीय दल की लंदन यात्रा के दौरान कुछ नए तथ्य जुटाए गए थे। इस दल ने लंदन में रहने वाले दोनों कंपनियों के मालिक आशीष पटेल से बातचीत की, जिसने कथित सौदे के संबंध में जानकारी और दस्तावेज मुहैया कराए।

लंदन की एएम कार एंड वैन हायर कंपनी से 2009 में क्यूबीआर के दौरान अतिथियों व आयोजन समिति के सदस्यों के लिए टैक्सी जैसी सेवाएं ली गई थीं। एएम फिल्मस को आयोजन के दृश्य उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध किया गया।

सूत्रों ने कहा कि सीबीआई ने कथित तौर पर कलमाड़ी की मौन स्वीकृति पर दोनों कंपनियों को किए गए भुगतान की जाच के लिए अतिरिक्त निदेशक वी के गुप्ता व डीआईजी एस के पलसानिया को लंदन भेजा था।

सीबीआई अब कलमाड़ी से दोनों कंपनियों के साथ आर्थिक लेनदेन के बारे में ताजा जानकारी जुटानी चाहती है। राष्ट्रमंडल खेल आयोजन से जुड़े घोटालों में पूछताछ के लिए कलमाड़ी तीसरी बार सीबीआई के समक्ष पेश हुए।

 सीबीआई सूत्रों के अनुसार, कलमाड़ी के खिलाफ सीबीआई को कुछ पुख्ता सबूत मिले हैं। गिरफ्तारी की औपचारिक घोषणा शाम तक होगी। सीबीआई कल सुरेश कलमाड़ी को कोर्ट में पेश करेगी।

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

पीएसएलवी ने तीन उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया

पीएसएलवी ने तीन उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया



श्रीहरिकोटा [आध्र प्रदेश]। पिछले वर्ष दिसम्बर में जीएसएलवी की विफलता के बाद इसरो ने अपने पहले सफल मिशन के तहत भरोसेमंद पीएसएलवी रॉकेट के जरिए तीन उपग्रहों को बुधवार को कक्षा में स्थापित कर दिया।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान [पीएसएलवी] अपने 18वें मिशन पर यहा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10 बजकर 12 मिनट पर प्रक्षेपित हुआ।

जैसे-जैसे रॉकेट का हर एक चरण सफल होता गया, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने तालिया बजाकर जश्न मनाया। पीएसएलवी-सी16 ने अपने प्रक्षेपण के 18 मिनट बाद तीन उपग्रहों को 822 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में स्थापित कर दिया।

प्रक्षेपण के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र से बाहर आए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने मिशन की सफलता की घोषणा की और इसे 'मानक प्रक्रिया के तहत' हुआ प्रक्षेपण करार दिया। प्रक्षेपण के दौरान यह यान पूरे समय अपने पथ पर ही रहा।

पीएसएलसी-सी16 अपने साथ 1,206 किलोग्राम वजनी आधुनिक पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह रिसोर्ससैट-2, भारत और रूस द्वारा तारामंडलीय और पर्यावरणीय अध्ययन के लिए निर्मित 92 किलोग्राम वजनी यूथसैट और सिंगापुर स्थित नेनयाग टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी द्वारा मानचित्रीकरण उपयोग के लिए विकसित 106 किलोग्राम वजनी एक्स-सैट ले गया है।

मिशन सफल होने की इसरो प्रमुख की घोषणा के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र में मौजूद कई वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वैज्ञानिकों ने राहत की सास ली क्योंकि पिछले वर्ष जीएसएलवी मिशन लगातार दो बार विफल हो गया था।

करीब 1,200 किलोग्राम वजनी रिसोर्ससैट-2 पाच वर्ष अंतरिक्ष में रहेगा। वह वर्ष 2003 में प्रक्षेपित रिसोर्ससैट-1 का स्थान लेगा और प्राकृतिक संसाधनों के बारे में 'मल्टीस्पेक्टरल' और 'स्पाशियल कवरेज' मुहैया कराएगा। पिछले वर्ष दिसम्बर में जीएसएलवी मिशन तब विफल हो गया था जब संचार उपग्रह जीसैट-5पी को ले जा रहे स्वदेश निर्मित जीएसएलवी-एफ06 में प्रक्षेपण के एक मिनट के भीतर ही बीच हवा में धमाका हो गया और वह बंगाल की खाड़ी में जा गिरा। जीसैट-5पी में 24 सी-बैंड और 12 विस्तारित सी-बैंड ट्रासपोंडर्स थे। रॉकेट के प्रक्षेपण पथ से भटक जाने के बाद वह समुद्र में जा गिरा था। इससे पहले अप्रैल 2010 में भी जीसैट-4 को ले जा रहा जीएसएलवी-डी3 मिशन विफल हो गया था, जिससे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को गहरा झटका लगा था।

पीएसएलवी का आज हुआ कामयाब प्रक्षेपण इस मिशन का लगातार 17वा सफल मिशन है। पीएसएलवी मिशन सिर्फ एक बार विफल हुआ था, जब यान को सितंबर 1993 में पहली बार प्रक्षेपित किया जा रहा था।

राधाकृष्णन ने कहा कि दो विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण दर्शाता है कि पीएसएलवी की विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई है। मिशन निदेशक पी. कुन्हीकृष्णन ने कहा कि यह पूरे इसरो समुदाय के लिए खुशी का मौका है। इसरो ने अपने साहस को साबित किया और मिशन काफी अच्छी तरह से सफल हुआ। यह देश को दोबारा आश्वस्त कराने की तरह है कि इसरो में भरोसा जताना पूरी तरह जायज है। निदेशक की इस टिप्पणी ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को उत्साह से भर दिया, जिनका जीएसएलवी की दो लगातार विफलताओं के बाद मनोबल बढ़ाए जाने की जरूरत थी।

रॉकेट के प्रक्षेपण और उसके अंतरिक्ष में पहुंचने तक मिशन नियंत्रण केंद्र में मौजूद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में चिंता का भाव था। अंतरिक्ष यान से उपग्रहों के अलग होने के हर चरण के सफल होने पर वैज्ञानिकों ने तालिया बजाकर जश्न मनाया।

रिसोर्ससैट-2 में एक ही प्लेटफार्म पर तीन हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगे हैं। ए कैमरे ऐसी तस्वीरें लेंगे जो फसलों की स्थिति के आकलन में मददगार होंगे। ए कैमरे वन कटाई की स्थिति, झीलों और जलाशयों के जल स्तर तथा हिमालय में पिघलने वाली बर्फ पर नजर रखेंगे।

इसरो अधिकारियों ने कहा कि इससे संसाधनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देने के लिए जरूरी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय जानकारी एकत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, जैविक संसाधन और भौगोलिक संभावनाओं से जुड़े विशिष्ट क्षेत्रों में निगरानी भी हो सकेगी। इस उपग्रह से मिलने वाली जानकारी आपदा प्रबंधन तथा अन्य संबंधित गतिविधियों में मददगार साबित होगी।

च्च्च, मध्यम और तीक्ष्ण रिजॉल्यूशन वाले तीन कैमरे के साथ ही रिसोर्ससैट-2 में दो 'सॉलिट स्टेट रिकॉर्डर' हैं। ऐसे प्रत्एक रिकॉर्डर की तस्वीरें कैद करने की क्षमता 200 जीबी की है। इन तस्वीरों को पृथ्वी पर मौजूद केंद्र हासिल कर सकेंगे। इस उपग्रह में कनाडा के 'कॉमडेव' द्वारा निर्मित स्वचलित पहचान प्रणाली भी मौजूद है। यह वीएचएफ बैंड की जहाज निगरानी प्रणाली है ताकि पोतों के स्थान, गति तथा अन्य तरह की जानकारी हासिल की जा सके।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने इस सफल प्रक्षेपण को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि वैज्ञानिक इस तरह के अधिक प्रयास करें, इसके लिए प्रधानमंत्री तथा सरकार उनके साथ है।

पीएसएलवी की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत

-देश के धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान [पीएसएलवी] ने अपनी सफलता की कहानी दोहराई है, जिसके पीछे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत छिपी है। पीएसएलवी का यह लगातार 17वा सफल मिशन है जिसके तहत श्रीहरिकोटा से रिमोट सेंसिंग उपग्रह रिसोर्ससैट-2 को प्रक्षेपित किया गया है।

पीएसएलवी-सी16 के साथ दो नैनो उपग्रह भी प्रक्षेपित किए गए हैं। इस सफल प्रक्षेपण ने अंतरिक्ष क्षेत्र के अरबों डॉलर के वैश्विक बाजार में भारत की व्यावसायिक क्षमताओं को एक बार फिर साबित कर दिया है।

यह मिशन सिर्फ एक बार विफल हुआ था जब सबसे पहले पीएसएलवी-डी। को 20 सितंबर 1993 को प्रक्षेपित किया गया था। इसके बाद से यह मिशन हर बार सफल ही रहा है।

वर्ष 1994 से पीएसएलवी को इसरो का तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र विकसित कर रहा है। पीएसएलवी के जरिए 44 उपग्रह प्रक्षेपित हो चुके हैं, जिनमें से 25 विदेशी उपग्रह थे। पीएसएलवी ने जो अहम प्रक्षेपण किए हैं, उनमें भारत का चंद्र अभियान 'चंद्रयान-1' शामिल है जिसे अक्तूबर 2008 में भेजा गया था। इसके अलावा कार्टोसैट और रिसोर्ससैट-1 भी अहम प्रक्षेपणों में शामिल हैं।

मानक पीएसएलवी 44 मीटर लंबा होता है और इसका वजन 295 टन होता है। यह अपने साथ 1,600 किलोग्राम वजनी उपग्रह ले जा सकता है और उन्हें सौर समकालिक धु्रवीय कक्षा में 620 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर सकता है। पीएसएलवी भू-समकालिक स्थानातरण कक्षा में भी 1,050 किलोग्राम वजनी उपग्रह स्थापित कर सकता है।

इसरो ने कहा कि पीएसएलवी ऐसा परिवर्तनशील यान बन गया है जो धु्रवीय सौर समकालिक कक्षा, निम्न पृथ्वी कक्षा और समकालिक स्थानातरण कक्षा में कई उपग्रहों को स्थापित कर सकता है। इसमें चार चरण होते हैं और यह ठोस तथा तरल संचालन प्रणाली का बारी-बारी से इस्तेमाल करता है।

विविध प्रकृति की बनावट के साथ पीएसएलवी ने एक ही प्रक्षेपण में कई पेलोड और कई मिशन को साथ ले जाने की क्षमता साबित कर दी है।

पीएसएलवी मिशन से जुड़े घटनाक्रम इस प्रकार हैं -

अंतरिक्ष उपग्रह तिथि परिणाम

पीएसएलवी-डी1 आईआरएस-1ई

20 सितंबर 1993 विफल

पीएसएलवी-डी2 आईआरएस-पी2 1 5 अक्तूबर 1994 सफल

पीएसएलवी-डी3 आईआरएस-पी3 2 1 मार्च 1996 सफल

पीएसएलवी-सी1 आईआरएस-1डी 29 सितंबर 1997 सफल

पीएसएलवी-सी1 ओशियनसैट

और दो अन्य उपग्रह

26 मई 1999 सफल

पीएसएलवी-सी3 टीईएस

22 अक्तूबर 2001 सफल

पीएसएलवी-सी4 कल्पना-1 12 सितंबर 2002 सफल

पीएसएलवी-सी5 रिसोर्ससैट-1 17 अक्तूबर 2003 सफल

पीएसएलवी-सी6 कार्टोसैट-1 और हैमसैट पाच मई 2005 सफल

पीएसएलवी-सी7 कार्टोसैट-2

और तीन अन्य उपग्रह

10 जनवरी 2007 सफल

पीएसएलवी-सी8 एजाइल

23 अप्रैल 2007 सफल

पीएसएलवी-सी10 टीईसीएसएएआर 23 जनवरी 2008 सफल

पीएसएलवी-सी9 कार्टोसैट - 2ए

आईएमएस-1 और आठ नैनो उपग्रह

28 अप्रैल 2008 सफल

पीएसएलवी-सी11 चंद्रयान-1 22 अक्तूबर 2008 सफल

पीएसएलवी-सी12 आरआईसैट-2

और एएनयूसैट

20 अप्रैल 2009 सफल

पीएसएलवी-सी14 ओशियनसैट-2

और छह अन्य उपग्रह

23 सितंबर 2009 सफल

पीएसएलवी-सी15 कार्टोसैट-2बी

और चार अन्य उपग्रह

12 जुलाई 2010 सफल

पीएसएलवी-सी16 रिसोर्ससैट-2

और दो अन्य उपग्रह

 20 अप्रैल 2011 सफल

करीना की वफादारी

करीना की वफादारी


मुंबई। करीना कपूर कई उत्पादों की ब्रांड एंबेसडर हैं। इनका प्रचार करने के साथ-साथ वो निजी जिंदगी में इनके इस्तेमाल को भी अहमियत देती हैं। इन दिनों एक जीरो साइज नेटबुक (मिनी लैपटॉप) के विज्ञापन में छाई करीना खुद उसकी दीवानी हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें मिनी लैपटॉप बहुत पसंद है। खास बात यह है कि उनके पास हर रंग का एक मिनी लैपटॉप हैं, जैसा कि विज्ञापन में दिखाया जाता है। शूटिंग के दौरान वो उसे ले जाना नहीं भूलतीं। उन्हें उस पर काम करते भी देखा जा सकता है। निर्माता अतुल अग्निहोत्री की आगामी फिल्म बॉडीगार्ड में उन्होंने मैनेजमेंट छात्रा का किरदार निभाया है, जो अपनी पढ़ाई लैपटॉप पर करती है। इसके लिए हर दृश्य में उन्हें एक लैपटॉप की जरूरत हैं। जब उन्हें नोटबुक या किसी और कंपनी का लैपटॉप दिया गया तो उन्होंने शूटिंग करने से इंकार कर दिया। यही नहीं उन्होंने जीरो साइज के नेटबुक को लेने के लिए निर्माता पर दबाव डाला। वाकई वफादारी निभाना कोई करीना से सीखे।

रविवार, 17 अप्रैल 2011

3 थे भाई: लचर भाषा और कल्पना

3 थे भाई: लचर भाषा और कल्पना




मुख्य कलाकार : ओमपुरी, श्रेयस तलपडे, दीपक डोबरियाल, रागिनी खन्ना, योगराज सिंह

निर्देशक : मृगदीप सिंह लांबा

तकनीकी टीम : निर्माता- राकेश ओमप्रकाश मेहरा, गीत- गुलजार, संगीत- दलेर मेहदी, रंजीत बारोट, सुखविंदर सिंह, रजत ढोलकिया

किसी फिल्म में रोमांस का दबाव नहीं हो तो थोड़ी अलग उम्मीद बंधती है। मृगदीप सिंह लांबा की 3 थे भाई तीन झगड़ालु भाइयों की कहानी है, जिन्हें दादाजी अपनी वसीयत की पेंच में उलझाकर मिला देते हैं। किसी नीति कथा की तरह उद्घाटित होती कथानक रोचक है, लेकिन भाषा, कल्पना और बजट की कमी से फिल्म मनोरंजक नहीं हो पाई है।

चिस्की, हैप्पी और फैंसी तीन भाई है। तीनों के माता-पिता नहीं हैं। उन्हें दादाजी ने पाला है। दादाजी की परवरिश और प्रेम के बावजूद तीनों भाई अलग-अलग राह पर निकल पड़ते हैं। उनमें नहीं निभती है। दादा जी एक ऐसी वसीयत कर जाते हैं, जिसकी शर्तो को पूरी करते समय तीनों भाइयों को अपनी गलतियों का एहसास होता है। उनमें भाईचारा पनपता है और फिल्म खत्म होती है। नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों का पाठ पढ़ाती यह फिल्म कई स्तरों पर कमजोर है।

तीनों भाइयों में हैप्पी की भूमिका निभा रहे दीपक डोबरियाल अपनी भूमिका को लेकर केवल संजीदा हैं। उनकी ईमानदारी साफ नजर आती है। ओम पुरी लंबे अनुभव और निरंतर कामयाबी के बाद अब थक से गए हैं। उनकी लापरवाही झलकने लगती है। श्रेयस तलपडे को मिमिक्री का ऐसा छूत लगा है कि वे अपने किरदारों को इससे बचा ही नहीं पाते। यह उनकी सीमा बनती जा रही है। ऊपर से 3 थे भाई में भाषा और संवाद की बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया। श्रेयस की एंट्री पंजाबी लहजे के संवाद से होती है और फिर वे दृश्य बदलने के साथ लहजा बदलते जाते हैं। संवादों का सरल होना गुण है, लेकिन हर भाव का सरलीकरण हो जाए तो नाटकीयता और प्रभाव पर असर होता है। आखिर हम एक फिल्म देख रहे हैं। दृश्य और भाव के अनुरूप भाषा भी सजी और समृद्ध होनी चाहिए। फिल्म का थीम गीत 3 थे भाई बार-बार तीनों भाइयों के स्वभाव की याद दिलाता है, लेकिन कुछ समय के बाद वही गीत खटकने लगता है।

3 थे भाई में अपेक्षित गति और विस्तार नहीं है। एक कमरे में आ जाने के बाद तीनों भाई बंध जाते हैं। उनके हाथ-पांव बंधना, उनका गिरना-पड़ना और एक-दूसरे को पछाड़ना.. सारी कोशिशों के बवाजूद हंसी की लहर नहीं उठती। बर्फबारी के दृश्यों में लॉजिक नहीं है। घुटने भर जमी बर्फ अगले ही दिन कैसे पिघल जाती है? और हां, अंगवस्त्रों एवं गैस की बीमारी को लेकर गढ़े गए दृश्य फूहड़ और फिजूल हैं। फूहड़ फैशन चल गया है.. किसी के पा.. पर हंसने का।

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

कांग्रेस संदेश ने किया शहीदों की जाति का उल्लेख

कांग्रेस संदेश ने किया शहीदों की जाति का उल्लेख



नई दिल्ली। आजादी की लड़ाई लड़ते हुए शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि आजाद भारत में किसी दिन उन्हें जाति के खांचे में फिट कर उनकी पहचान बताई जाएगी। लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन की झंडाबरदार रही कांग्रेस पार्टी ने ऐसा किया है। पार्टी के मुखपत्र 'कांग्रेस संदेश' के मार्च माह के अंक में इन शहीदों की जाति का उल्लेख करते हुए इनकी पहचान बताई गई है। भाजपा ने इसे शहीदों का अपमान बताते हुए कहा है कि कांग्रेस देश से माफी मांगे।

हालांकि कांग्रेस को इसमें कुछ भी अनुचित नहीं दिख रहा है। मुखपत्र के संपादक अनिल शास्त्री ने कहा, 'इसको तूल नहीं दिया जाना चाहिए। क्योंकि इनकी जाति का उल्लेख करना जीवन वृतांत का हिस्सा है।'

कांग्रेस संदेश के मार्च के अंक में शहीद भगत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वह जाट सिख परिवार में जन्मे थे। जबकि राजगुरु के बारे में मुखपत्र कहता है कि वह महाराष्ट्र के भारतीय क्रांतिकारी थे और देशस्थ ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते थे। राजगुरू का जन्म पुणे के निकट खेड़ नामक स्थान पर हुआ था।

शहीदों की जाति के उल्लेख के मुद्दे को भाजपा ने फौरन लपक लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह राष्ट्र के नायकों का अपमान है और ऐसा पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और उसकी सरकार ने राष्ट्र के महानायकों का अपमान किया हो। नकवी के मुताबिक, ''विभिन्न पुस्तकों के प्रकाशनों के जरिए कांग्रेस पहले भी कई बार ऐसा करती आई है। लेकिन अब वह सारी सीमाएं लांघ गई है। कांग्रेस पार्टी को इसके लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।''

विवाद गहराने पर कांग्रेस संदेश पत्रिका के संपादक अनिल शास्त्री ने कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। स्कूल और कालेज में जब हमें इतिहास पढ़ाया जाता है और जब महात्मा गांधी का उल्लेख होता है तो यह बताया जाता है कि वह गुजराती बनिया परिवार में जन्मे थे। भाजपा बिना बात का मुद्दा बना रही है।

जापान का परमाणु संकट चेर्नोबिल जितना खतरनाक

जापान का परमाणु संकट चेर्नोबिल जितना खतरनाक


टोक्यो। जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में विकिरण का स्तर अब तक के सबसे खतरनाक परमाणु हादसे चेर्नोबिल के बराबर पहुंच चुका है। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में मंगलवार को इमरजेंसी का स्तर बढ़ाकर लेवल-7 कर दिया गया।

यही स्तर 1986 में यूक्रेन के चेर्नोबिल के परमाणु हादसे के समय नियत किया गया था। हालांकि परमाणु विशेषज्ञों ने कहा है कि हम विकिरण की मात्रा का सही आकलन करने के बाद ही खतरे के वास्तकविक स्तर के बारे में बता पाएंगे।

जापान की परमाणु सुरक्षा एजेंसी के प्रवक्ता हिदेहिको निशियामा ने कहा, 'चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना और फुकुशिमा के हालात में काफी अंतर है। चेर्नोबिल रिएक्टर फट गया था और उसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। उसमें विकिरण के रिसाव की वजह रिएक्टर में धमाका था। हालांकि फुकुशिमा में भी रिएक्टर की इमारत की छत धमाके में गिर गई थी, लेकिन रिसाव के बावजूद एक भी रिएक्टर ध्वस्त नहीं हुआ। फुकुशिमा में चेर्नोबिल के मुकाबले केवल दस प्रतिशत ही रिसाव हुआ है।'

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पैमाने के हिसाब से फुकुशिमा में अभी लेवल पांच की इमरजेंसी है, मगर सुरक्षा की दृष्टि से इसे लेवल-7 कर दिया गया है। अभी तक हम यह नहीं पता लगा पाए हैं कि रिसाव कितना हो रहा है।

सोमवार को जापान के परमाणु आयोग ने कहा था कि फुकुशिमा में अब प्रति घंटा दस हजार टेराबेक्वेल्स [विकरण की रफ्तार मापने इकाई] रेडियोधर्मी पदार्थ, आयोडीन-131 रिस रहा है।

मुख्य कैबिनेट सचिव युकियो इदानो के अनुसार, विकिरण के चलते अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन फुकुशिमा रिएक्टर में इस संकट से जूझने वाले 21 कर्मियों में विकिरण के कुछ लक्षण देखे गए हैं।

भूकंप और धमाका:-

जापान में मंगलवार को आए 6.3 के भूकंप के बाद फुकुशिमा के बंद पड़े रिएक्टर नंबर चार में धमाका हुआ। इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इंजीनियर इस पर काबू पाने में लगे हैं। भूकंप के बाद नारिता एयरपोर्ट के रनवे को भी बंद कर दिया गया।

चेर्नोबिल की विभीषिका

1986 में 26 अप्रैल को दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हादसा हुआ। आधी रात को यूक्रेन स्थित चेर्नोबिल पावर प्लांट में हुए दो धमाकों ने रिएक्टर की छत को उड़ा दिया और रेडियोधर्मी पदार्थ बहने गला। छत फटने के कारण बाहरी हवा अंदर आने लगी और रिएक्टर के अंदर स्थित कार्बन मोनाक्साइड प्रज्ज्वलित हो गया। इसके फलस्वरूप आग लग गई जो कि नौ दिन तक धधकती रही। इस घटना में निकलने वाली रेडियोधर्मी किरणें हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए एटम बम से सौ गुना अधिक थीं। इस हादसे में 32 लोगों की मौत हो गई और 38 अगले कुछ महीनों में खतरनाक विकरण के प्रभाव से मर गए।

क्या है परमाणु विकिरण के खतरे का स्केल?

नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा जापान पर गिराए गए परमाणु बम ने पहली बार दुनिया को परमाणु शक्ति से रू-ब-रू कराया। इसे विश्व में परमाणु युग की शुरुआत भी कह सकते हैं।

इसके बाद दुनिया भर में परमाणु शक्ति के प्रयोग का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन परमाणु की बेपनाह ताकत को काबू करने में हुई हल्की सी चूक के भयानक नतीजे सामने आने लगे।

1990 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी [आइएईए] ने परमाणु विकिरण के खतरे को नापने के लिए 'इंटरनेशनल न्यूक्लियर एंड रेडियोलॉजिकल इवेंट स्केल' तैयार किया। स्केल में परमाणु संयंत्रों से होने वाली दुर्घटनाओं को उनके संभावित खतरे के आधार पर शून्य से लेकर सात स्तर तक विभाजित किया गया। सभी स्तर पिछले स्तर से 10 गुना अधिक खतरनाक होते है।

क्या हैं स्तर:-

स्तर-0 [परमाणु विचलन]: इस स्तर पर परमाणु विकिरण से नुकसान का खतरा शून्य। अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यक्ता नहीं।

स्तर-1 [अनियमित]: इस स्तर पर वैधानिक वार्षिक सीमा से अधिक रिसाव होने पर आम आदमी में विकिरण का खतरा होता है। जबकि संयंत्र कर्मचारियों के लिए सामान्य माना जाता है।

स्तर-2 [घटना]: आम लोगों में 10 मिलिसीवियटर््स से अधिक विकिरण का खतरा। संयंत्र कर्मचारियों के लिए भी जोखिम। स्वास्थ्य के लिए अधिक चिंताजनक नहीं।

स्तर-3 [गंभीर घटना]: स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक, विकिरण के संपर्क में रहने से बाहरी शरीर के जलने का खतरा।

स्तर-4 [स्थानीय प्रभाव वाली दुर्घटना]: विकिरण के कारण जान जाने की आशंका। सुरक्षा उपायों की जरूरत।

स्तर-5 [व्यापक परिणाम वाली दुर्घटना]: अधिक विकिरण के कारण लोगों के मारे जाने का खतरा ज्यादा। अधिक सुरक्षा उपायों की जरूरत।

स्तर-6 [गंभीर दुर्घटना]: अत्यधिक विकिरण का खतरा। रोकने के निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता।

स्तर-7 [अति गंभीर दुर्घटना] : व्यापक स्वास्थ्य और पर्यावरण दुष्प्रभाव। निर्णायक और विस्तृत सुरक्षा उपायों की जरूरत।

रविवार, 10 अप्रैल 2011

अन्ना हजारे से कोई विवाद नहीं: रामदेव

अन्ना हजारे से कोई विवाद नहीं: रामदेव



हरिद्वार। लोकपाल विधेयक के लिए नव गठित संयुक्त समिति में भाई भतीजावाद का मुद्दा उठाने के बाद योग गुरू रामदेव ने रविवार को कहा कि समिति में पिता पुत्र शाति भूषण और प्रशात भूषण को शामिल किए जाने से उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

उन्होंने कहा कि शाति एवं प्रशात भूषण को समिति में शामिल किए जाने से मुझे कोई समस्या नहीं है। हमें इस विषय पर अन्ना हजारे के फैसले पर भरोसा है। मैंने सिर्फ यही कहा था कि कार्यकर्ता किरन बेदी को समिति में देखना चाहते थे।

रामदेव ने कहा कि भाई भतीजावाद का मुद्दा मीडिया ने उठाया, मैंने नहीं। जब इस बारे में मुझसे पूछा गया, तब मैंने कहा कि 'जन लोकपाल विधेयक' आदोलन में हमने भूमिका निभाई है। हमें समिति की संरचना के बारे में कुछ नहीं कहना है।

गौरतलब है कि रामदेव ने कहा था कि इस समिति में भाई भतीजावाद क्यों है? क्यों पिता और पुत्र दोनों को इस समिति में शामिल किया गया?

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन बेदी ने कहा है कि वह इस समिति में सदस्य नहीं बनना चाहती थी। किरन ने कहा कि यह एक 'ए प्लस' टीम है। इस समिति के सदस्य सिर्फ वही लोग हो सकते हैं जो सरकार के कामकाज को जानते हैं और वे एक ऐसे कानून को तैयार करने में मदद कर सकते हैं जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के सभी पहलुओं पर गौर करे।

इस बीच, हजारे ने कहा कि वह योग गुरू से बात करेंगे क्योंकि इस पड़ाव पर यह अहम है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में देश एकजुट रहे। उन्होंने कहा कि मैं रामदेव से अनुरोध करूंगा कि वह ऐसा नहीं सोचें। हम सभी को देश को आगे ले जाना है। उनके अंदर देश के प्रति प्रेम है। मैं उनसे कहूंगा कि वह सिर्फ देश को ध्यान में रखें।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

लाइफ ने टर्न लिया: राणा दगुबाटी

लाइफ ने टर्न लिया: राणा दगुबाटी



छह फुट तीन इंच लंबे राणा दगुबाटी आजकल बिपाशा बसु से प्रेम संबंध को लेकर चर्चा में हैं। वे दक्षिण भारत के एक बड़े फिल्म घराने से हैं। पिछले साल फरवरी में प्रदर्शित हुई अपनी पहली फिल्म लीडर से वे तेलुगू सिनेमा के स्टार बन गए। रोहन सिप्पी की दम मारो दम उनकी पहली हिंदी फिल्म है। पिछले दिनों राणा ने हम से बातचीत की। प्रस्तुत हैं अंश..

पहली फिल्म से आप दक्षिण भारत में स्टार बन गए। हिंदी फिल्म साइन करते वक्त किसी तरह का दबाव महसूस कर रहे थे?

दम मारो दम मैंने लीडर की रिलीज के पहले साइन की थी। दिसंबर 2009 में लीडर का पहला प्रोमो आया था। रोहन सिप्पी ने प्रोमो देखा और मुझे फोन किया। उन्होंने कहा कि मैंने एक स्क्रिप्ट लिखी है। आप सुनिए और अगर पसंद आती है, तो हम साथ काम करेंगे। उन्होंने दम मारो दम का फ‌र्स्ट ड्राफ्ट मेरे पास भेजा। मुझे स्क्रिप्ट पसंद आई। उसके बाद मेरी लाइफ ने खूबसूरत टर्न लिया।

आप फिल्म घराने में पैदा हुए, तो क्या बचपन से तय था कि ऐक्टर ही बनेंगे?

मैं विजुअल इफेक्ट सुपरवाइजर था। मैंने स्प्रिट मीडिया कंपनी शुरू की थी। बाद में कंपनी प्राइम फोकस में मर्ज हो गई। फिर मैंने दो तेलुगू फिल्में प्रोड्यूस कीं, जिनमें से एक फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला। उसके बाद मैं सुरेश प्रोडक्शन में लाइन प्रोड्यूसर था। बाद में मैंने खुद को डिस्कवर किया। यह मेरी तीसरी जॉब है।

ऐक्टर बनने के लिए कोई तैयारी भी की?

बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल में मैंने एक साल ट्रेनिंग ली। उसके बाद स्टंट सीखने के लिए अमेरिका गया। मेरी हिंदी अच्छी नहीं है। दम मारो दम की शूटिंग से पहले एक महीने हमने रोहन के साथ वर्कशॉप की। मैंने शूटिंग से डेढ़ महीने पहले फिल्म की स्क्रिप्ट मांग ली थी। मुझे हिंदी पर काम करना पड़ा।

हिंदी फिल्मों से आपका परिचय कब हुआ? क्या पहली फिल्म याद है?

बचपन से मैं हिंदी फिल्में देख रहा हूं। हैदराबाद में हिंदी फिल्में देखी जाती हैं। मैंने बच्चन साहब की फिल्में देखी हैं। तमिल और तेलुगू फिल्में मैंने हिंदी फिल्मों की तुलना में अधिक देखी हैं।

फिल्म फैमिली से होने का सबसे बड़ा लाभ क्या मिला?

मुझे लगा कि मैं बचपन से एक्टिंग स्कूल में पढ़ रहा हूं। फिल्मी फैमिली से हूं, तो इंडस्ट्री को करीब से देखा। मैंने फिल्म मेकिंग के टेक्निकल पहलू के बारे में कम उम्र में जान लिया था। मैं इसके अलावा और कुछ नहीं जानता।

दम मारो दम में आप डीजे जोकी का किरदार निभा रहे हैं। जोकी किस तरह का लड़का है?

वह बहुत शांत किस्म का है। वह चीजों को घटते हुए देखता है, लेकिन कुछ बोलता नहीं है। जिसके कारण उसे पसंद करने वाले लोग धीरे-धीरे उससे अलग हो जाते हैं। फिल्म में तीन कहानियां हैं। एक पुलिस अफसर, एक स्टूडेंट और एक आरजे जोकी की।

इसमें बिपाशा बसु आपके अपोजिट हैं। उनके साथ प्रेम संबंध की चर्चा क्या फिल्म के प्रचार का हिस्सा है?

बिपाशा स्वीट हैं। मैं न्यूकमर हूं। उन्होंने मुझे हमेशा सपोर्ट किया। मैं उनकी इज्जत करता हूं। उनके साथ लिंक अप की खबरें गलत हैं। हो सकता है कि हमारे लिंक अप की खबर प्रचार का हिस्सा हो, लेकिन मुझे नहीं लगता कि सिर्फ इसके कारण कोई फिल्म देखने आएगा।

भविष्य में हिंदी और तेलुगू फिल्मों में से आप किसे प्राथमिकता देंगे?

मैं अलग-अलग भाषा की फिल्में करना चाहता हूं। मैं खुश हूं कि इतनी कम उम्र में मुझे अलग-अलग सिनेमा का हिस्सा बनने का मौका मिल रहा है। दम मारो दम की स्टोरी टेलिंग डिफरेंट है। हमारे यहां ऐसी फिल्में नहीं बनतीं और हिंदी में भी यह एक नया प्रयोग है।

हजारे की मागों पर सरकार ने अपनाया अड़ियल रुख

हजारे की मागों पर सरकार ने अपनाया अड़ियल रुख


नई दिल्ली। सरकार ने प्रभावी लोकपाल विधेयक के संबंध में अन्ना हजारे की मागों पर यह कहकर अड़ियल रुख अपना लिया है कि वह संयुक्त मसौदा समिति की अध्यक्षता किसी गैर सरकारी व्यक्ति को देने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की माग स्वीकार नहीं कर सकती।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की शुक्रवार की सुबह कार्यकर्ताओं स्वामी अग्निवेश और अरविन्द केजरीवाल के साथ बैठक निर्धारित थी, लेकिन यह नहीं हो पाई क्योंकि दोनों पक्षों ने कहा कि वे एक-दूसरे का इंतजार कर रहे हैं। बैठक अब शाम छह बजे होगी।

सिब्बल ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर संयुक्त मसौदा समिति में सिर्फ सरकारी अधिकारी शामिल होंगे और कोई भी मंत्री इसका हिस्सा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त समिति के गठन पर आधिकारिक अधिसूचना की कोई संभावना नहीं है, लेकिन हमने उन्हें बताया है कि हम कानून मंत्रालय और प्रेस नोट के जरिए एक आधिकारिक पत्र देना चाहते हैं।

आगे क्या होगा रामा रे..

आगे क्या होगा रामा रे..



पहली फिल्म से सफलता का स्वाद चखने वाले अभिनेता-अभिनेत्रियों के समक्ष दूसरी फिल्म साइन करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। वन फिल्म वंडर बनने का भय उन्हें लगा रहता है। पिछले साल की सनसनी रणवीर सिंह, सोनाक्षी सिन्हा, अली जफर, रजत बरमेचा की दूसरी फिल्म कौन सी होगी और उसमें वे किस अंदाज में होंगे? एक नजर..।

चकमा देंगे रणवीर : फिल्म बैंड बाजा बारात से रातोंरात स्टार बने रणवीर सिंह की दूसरी फिल्म होगी लेडीज वर्सेज रिकी बहल। इसमें वे कॉन आर्टिस्ट रिकी बहल का रोल कर रहे हैं। इसमें रणवीर और अनुष्का शर्मा की जोड़ी को यशराज बैनर दोबारा पेश कर रहा है। इसके निर्देशन बैंड बाजा बारात वाले मनीष शर्मा हैं। अपनी दूसरी फिल्म के बारे में रणवीर उत्साह से बताते हैं, रिकी बहल लड़कियों को चकमा देकर उनके पैसे लेकर भाग जाता है। मैं खुश हूं कि बैंड बाजा बारात की टीम इसमें भी है। गौरतलब है कि लेडीज वर्सेज रिकी बहल दिसंबर में रिलीज होगी। रणवीर को यकीन है कि इस फिल्म से वे बैंड बाजा बारात की सफलता दोहराएंगे।

अली की दुल्हन : पाकिस्तान के पॉप स्टार अली जफर की पहली फिल्म तेरे बिन लादेन की सफलता के तुरंत बाद यशराज बैनर ने उन्हें साइन कर लिया। उनकी दूसरी फिल्म मेरे ब्रदर की दुल्हन है। यह त्रिकोणीय प्रेम कहानी है। इस फिल्म में अली के साथ इमरान खान और कट्रीना कैफ हैं। अली इसमें इमरान के बड़े भाई की भूमिका में हैं। उनकी होने वाली पत्नी यानी कट्रीना से इमरान को प्यार हो जाता है। यशराज जैसे प्रतिष्ठित बैनर की दूसरी फिल्म पाकर अली को यकीन है कि उन्हें बॉक्स ऑफिस पर फिर सफलता मिलेगी। उनके अनुसार, फिल्म मेरे ब्रदर की दुल्हन रोमांटिक कॉमेडी है। मैं लकी हूं कि यशराज ने मुझे अपने प्रोडक्शन में मौका दिया। उम्मीद करता हूं कि लोगों को इसमें भी मेरा काम पसंद आएगा। गौरतलब है कि तेरे बिन लादेन फिल्म में लादेन की भूमिका निभाकर चर्चा में आए प्रद्युम्न सिंह ने भी दूसरी फिल्म साइन कर ली है। उनकी दूसरी फिल्म के सेरा सेरा के बैनर तले आ रही है जरा हटके जरा बचके।

सोनाक्षी को अक्षय का साथ : पिछले साल की नई अभिनेत्रियों में सोनाक्षी सिन्हा सबसे हॉट साबित हुई हैं। दबंग फिल्म में उनकी खूबसूरती और अभिनय की सबने तारीफ की। परिणाम यह हुआ कि उनके पास बड़े बैनर की फिल्मों के ऑफर की बाढ़ आ गई। सोनाक्षी ने जोकर, हाउसफुल 2, रेस 2, किक और कमल हासन के साथ एक फिल्म साइन की है। सोनाक्षी की मानें तो उनकी दूसरी फिल्म जोकर होगी। खास बात यह है कि जोकर थ्रीडी फिल्म है। शिरीष कुंदर निर्देशित इस फिल्म में सोनाक्षी अक्षय कुमार के साथ हैं। सोनाक्षी फिल्म के बारे में बताने से बचते हुए कहती हैं, यह न तो सर्कस के जोकर की कहानी है और न ही किसी सुपरमैन की। लोग सब्र करें। समय आने पर मैं फिल्म के बारे में भी बताऊंगी। गौरतलब है कि सोनाक्षी की तरह ही पिछले साल वीर फिल्म में सलमान खान के साथ जरीन खान ने डेब्यू किया था। जरीन दोबारा सलमान की नई फिल्म रेडी के एक आइटम सांग में नजर आएंगी।

उड़ान के रजत : रजत बरमेचा को पिछले साल की एक बड़ी खोज माना जा रहा है। उड़ान फिल्म में रोहन की भूमिका के लिए उनकी जमकर सराहना हुई। कान फिल्म समारोह में भी लोगों ने उनके काम की तारीफ की। रजत की दूसरी फिल्म का इंतजार दर्शकों को ही नहीं, बल्कि फिल्म बिरादरी के लोगों को भी उत्सुकता से है। वे कहते हैं, मुझे अभी तक कोई ऐसी स्क्रिप्ट नहीं मिली जिसके लिए मैं हां कहूं। उड़ान यदि आपकी पहली फिल्म हो, तो दूसरी फिल्म साइन करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। हां, मैंने शैतान फिल्म में एक मेहमान भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि बिजॉय नाम्बियार निर्देशित इस फिल्म में राजीव खंडेलवाल और कल्कि कोचलिन मुख्य भूमिका में हैं और यह मई में रिलीज होगी।

दक्षिण के कलाकार : तमिल फिल्मों के स्टार सूर्या ने रामगोपाल वर्मा की फिल्म रक्त चरित्र को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आने के लिए चुना, तो दक्षिण भारत की फिल्मों के सुपरस्टार विक्रम ने मणिरत्नम की फिल्म रावण को, लेकिन दोनों को हिंदी फिल्म के दर्शकों ने स्वीकार नहीं किया। रक्त चरित्र और रावण असफल हो गई। विद्या बालन की चचेरी बहन प्रियमणि रावण में छोटी भूमिका में तो रक्त चरित्र में लंबे किरदार में दिखीं। विवेक ओबराय ने उनकी तुलना स्मिता पाटिल तक से की। इसके बावजूद प्रियमणि को दक्षिण लौटना पड़ा। ऐसा ही हश्र रहा तृषा और पद्मप्रिया का। दक्षिण भारतीय फिल्मों की शीर्ष अभिनेत्री तृषा की खत्र मीठा और पद्मप्रिया की स्ट्राइकर फ्लॉप हो गई। हिंदी फिल्मों में करियर संवारने का उनका सपना चकनाचूर हो गया।

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

रतन टाटा ने माना, टेप में आवाज मेरी

रतन टाटा ने माना, टेप में आवाज मेरी




नई दिल्ली। रतन टाटा ने पीएसी में सोमवार को स्वीकार किया कि राडिया से बातचीत वाले टेप किए गए फोन में आवाज उन्हीं की है।

पीएसी ने नीरा राडिया से उन टेपों की सूची देने को कहा है जो सीबीआई ने उन्हें सुनाए थे। रतन टाटा ने स्वीकार किया कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था।

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

सादिक बाशा मौत मामले की जांच करेगी सीबीआई

सादिक बाशा मौत मामले की जांच करेगी सीबीआई




नई दिल्ली। जांच एजेंसी सीबीआई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह सादिक बाशा मौत मामले की जांच अपने हाथ लेने को तैयार है। गौरतलब है कि बाशा पूर्व केंद्रीय मंत्री और 2जी घोटाले के आरोपी ए राजा के करीबी थे। बाशा ने संदिग्ध परिस्थिति में आत्महत्या कर ली थी।

उधर, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की सुनवाई के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता यूयू ललित को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया है।

जाच एजेंसी की ओर से हाजिर वरिष्ठ अधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति जी. एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए. के. गागुली की पीठ को बताया कि सीबीआई ने बाशा की मौत के मामले में जाच का जिम्मा संभालने की इच्छा जाहिर की है।

इससे पहले, तमिलनाड़ु सरकार ने भी बाशा की मौत के मामले की सीबीआई से जाच कराने का पक्ष लिया था। पीठ ने अतिरिक्त सालिसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह से कहा कि वह केंद्र से निर्देश लें और सीबीआई को मामला सौंपने संबंधी अधिसूचना जारी करने के बारे में चार अप्रैल तक सूचित करें।

सीबीआई ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की सुनवाई के लिए खास तौर पर गठित विशेष अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता यू यू ललित विशेष लोक अभियोजक के रूप में पेश होंगे।

न्यायालय ने जाच एजेंसी के वकील से कहा कि वह विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना के बारे में निर्देश लें और मंगलवार तक इस बारे में सूचित करें। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने बाशा की मौत के मामले की जाच सीबीआई को सौंपने की माग करती गैर-सरकारी संगठन 'सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' की अर्जी पर जाच एजेंसी से जवाब दाखिल करने को कहा था। इसी संगठन की अर्जी पर न्यायालय ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले की सीबीआई जाच के आदेश दिए थे। बाशा से पिछले वर्ष दिसंबर में सीबीआई ने चार दफा पूछताछ की थी और उनके आधिकारिक तथा आवासीय परिसरों की तलाशी ली गई थी।

38 वर्षीय बाशा को दक्षिण चेन्नई स्थित उनके घर में 16 मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उनकी पत्नी ने दावा किया था कि बाशा ने आत्महत्या की क्योंकि वह जाच के दबाव का सामना नहीं कर पा रहे थे।

बाशा ग्रीनहाउस प्रमोटर्स के प्रबंध निदेशक थे। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को संदेह है कि इस कंपनी ने राजा की ओर से लेनदेन किया। विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति के बारे में सीबीआई ने मंगलवार को शीर्ष न्यायालय को बताया था कि उसे इस मामले में सक्षम वकील ढूंढने में दिक्कत आ रही है क्योंकि जिन उद्योगपतियों तथा उनके अधिकारियों के इस मामले में नामजद होने की संभावना है, वे पहले ही आला वकीलों से अपने बचाव के लिए जुड़ चुके हैं।

हालाकि, वेणुगोपाल ने आज पीठ को बताया कि पूर्व में विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्ति के प्रतिच्अनिच्छा जाहिर कर चुके वरिष्ठ अधिवक्ता ललित जनहित में यह जिम्मा संभालने को तैयार हो गए हैं।

फालतू: नाच-गाना और मैसेज

फालतू: नाच-गाना और मैसेज


मुख्य कलाकार : जैकी भगनानी, पूजा गुप्ता, रितेश देशमुख, अंगद बेदी, चंदन रॉय सान्याल, अरशद वारसी।

निर्देशक : रेमो डिसूजा

तकनीकी टीम : निर्माता- वासु भगनानी, संगीत- जिगर-सचिन

रेमो डिसूजा की फिल्म में नाच-गाना है। मस्ती है। दोस्ती है। संदेश है। देश की शिक्षा व्यवस्था पर किए गए सवाल हैं। पूरा माहौल है। फिल्म पूरी गति के साथ बांधे रखती हैं। बीच-बीच में हंसी भी आ जाती है। रेमो डिसूजा अपने कंफ्यूजन के साथ कभी कहानी तो कभी कभी नाच-गाने के बीच डोलते रहते हैं। फिल्म पूरी हो जाती है। मुद्दा समझ में नहीं आता तो किरदारों के जरिए छोटी-मोटी भाषणबाजी भी हो जाती है।

कोरियोग्राफी के कमाल और युवकों के धमाल के लिहाज से फिल्म रोचक है। रेमो ने कोरियोग्राफी में कल्पनाशीलता का परिचय दिया है। क्लाइमेक्स के पहले के डांस सिक्वेंस में उन्होंने कुछ नया किया है। विषय और मुद्दे की बात करें तो लेखक-निर्देशक तय नहीं कर पाए हैं कि वे पढ़ाई में रुचि-अरुचि या ग्रेडिंग सिस्टम पर फोकस करें। कुछ समय पहले आई 3 इडियट के बाद शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती फालतू का प्रयास बचकाना लगता है। यहां मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के विकल्प के रूप में एक कालेज की ही कल्पना की जाती है। लेखक-निर्देशक ठीक से जानते भी नहीं कि यूनिवर्सिटी का मतलब क्या होता है? बस बोर्ड चिपका दिया है। लेखक-निर्देशक की कोरी कल्पना पर ऐसे सवाल नहीं उठाए जा सकते।

रेमो डिसूजा और चंदन राय सान्याल इस फिल्म के दो मजबूत स्तंभ हैं। उनके नृत्य संयोजन और अभिनय के दम पर ही फिल्म टिकी रहती है। चंदन ने फालतू से किरदार को भी संजीदगी से निभाया है। सहयोगी कलाकारों से फिल्म को थोड़ा सहयोग मिला है। फिल्म के मुख्य कलाकार (हीरो-हीरोइन) निराश करते हैं। नाटकीय और संवादपूर्ण दृश्यों में उनकी कमजोरी साफ उभर आती है। अरशद वारसी और रितेश देशमुख सामान्य हैं।

फालतू की विशेषता म्यूजिक और डांस में है। संगीतकार जिगर-सचिन और निर्देशक-कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा का पूरा ध्यान उसी पर रहा है। फिल्म के संवाद लेखकों की सूची काफी लंबी है। फिल्म में उनके योगदान का सामूहिक प्रभाव कहीं नहीं दिखता।

बुधवार, 30 मार्च 2011

हूं ऐसा ही: प्रतीक बब्बर

हूं ऐसा ही: प्रतीक बब्बर



फिल्म धोबी घाट में अभिनेता आमिर खान की मौजूदगी के बावजूद सबका ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल हुए प्रतीक बब्बर। फिल्म में उन्होंने साबित किया कि उनका लुक और पर्सनैल्टी भले ही हिंदी फिल्मों के अभिनेता जैसी नहीं है, लेकिन वे अपने अभिनय से सबका दिल जीतने का दम रखते हैं। शायद यही वजह है कि रोहन सिप्पी ने अपनी नई फिल्म दम मारो दम में अभिषेक बच्चन जैसे स्थापित अभिनेता के रहते हुए कहानी का केंद्र प्रतीक को बनाना उचित समझा। चौंकिए मत, दम मारो दम की कहानी के नायक हैं युवा प्रतीक। उम्मीद से ज्यादा रफ्तार से आगे बढ़ रहे प्रतीक अपनी इन उपलब्धियों से बहुत खुश हैं। बस उन्हें एक बात का दुख है। प्रतीक कहते हैं, काश! मेरी मम्मी जीवित होतीं। मेरी सफलता को देखकर वे बहुत खुश होतीं। मैं उन्हें बहुत मिस कर रहा हूं।

मां के प्यार पाने से वंचित रहे प्रतीक अपने अब तक के सफर में ज्यादातर अकेले रहे हैं। उनकी परवरिश नाना-नानी के घर हुई। पिता के प्यार के मामले में भी उनकी किस्मत दूसरे बेटों जैसी नहीं रही। उन्हें पिता राज बब्बर का अपेक्षित प्यार नहीं मिला। प्रतीक आज शबाना आजमी में अपनी मां को देखते हैं, तो आमिर खान में बड़ा भाई। स्नेहिल रिश्तों की छांव से वंचित रहे प्रतीक बिना किसी संकोच के कहते हैं, शबाना आंटी में मुझे मेरी मां नजर आती हैं। वे मुझे बेटे जैसा प्यार देती हैं। आमिर बड़े भाई की तरह मुझे गाइड करते हैं। डांटते हैं और प्यार भी करते हैं।

प्रतीक अंतर्मुखी हैं। वे अपने दिल की बात खुलकर किसी से नहीं कह पाते। वे चुप रहना पसंद करते हैं। सवालों का जवाब वे कम शब्दों में देते हैं और अपनी दुनिया में खोए से रहते हैं। मीडिया से उनके व्यक्तित्व का यह पहलू छुपा नहीं है। प्रतीक कहते हैं, मैं बचपन से ऐसा ही हूं। बहुत कम बोलता हूं। मुझे जानने वाले लोग इस बात से परिचित हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्रतीक की यही बात उनकी विशेषता बन गई है। हिंदी फिल्मकारों को उनके रूप में अपनी कहानी के रोचक किरदार को जीवंत करने वाला एक अनूठा कलाकार मिल गया है। जाने तू या जाने ना का अमित हो या धोबी घाट का मुन्ना, दोनों ही रोचक किरदार थे। गोवा की पृष्ठभूमि पर रची-बसी और मादक द्रव्यों के व्यापार पर आधारित रोहन सिप्पी की फिल्म दम मारो दम में भी प्रतीक ने एक अलग किस्म का किरदार निभाया है। इसमें उनके द्वारा अभिनीत लॉरी का किरदार है तो स्टूडेंट, लेकिन वह अब तक हिंदी फिल्मों में दिखे स्टूडेंट जैसा नहीं है। प्रतीक के अनुसार, फिल्म दम मारो दम में मेरा किरदार अलग किस्म का है। मुझे उम्मीद है, लोग मेरे किरदार को पसंद करेंगे। गौरतलब है कि इस फिल्म में प्रतीक ने अभिषेक बच्चन के अलावा बिपाशा बसु के साथ काम किया है। प्रतीक ने हाल में प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण की शूटिंग पूरी की है। उनके लिए खुशी की बात यह है कि इसमें उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला। अमिताभ बच्चन उनकी मम्मी स्मिता पाटिल के को-स्टार रह चुके हैं और जाने तू या जाने ना देखने के बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि प्रतीक ने उन्हें स्मिता की याद दिला दी। प्रतीक बिग बी के साथ काम करके बेहद खुश हैं। वे कहते हैं, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं गर्व महसूस कर रहा हूं। प्रतीक की गिनती आज हॉट युवा कलाकारों में हो रही है। दम मारो दम और आरक्षण के बाद उनकी अगली फिल्म संजय लीला भंसाली के होम प्रोडक्शन की माई फ्रेंड पिंटो होगी। वे कहते हैं, मैं धीरे-धीरे और सधे कदम बढ़ा रहा हूं।

हर कोई किशोर दा नही हो सकते: जसपिंदर नरूला

हर कोई किशोर दा नही हो सकते: जसपिंदर नरूला



प्यारी सी मुस्कान व आंखों में अनूठी चमक वाली डॉ. जसपिंदर नरूला ने न केवल बॉलीवुड में बल्कि पॉलीवुड की भी कई फिल्मों के गीतों को अपनी आवाज दी है। फिल्मी गीतों के अलावा सूफी कलाम पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। उन्हें संगीत विरासत में मिला है। उनके पिता और माता ने भी संगीत की दुनिया में नाम कमाया। भाई मिक्की नरूला भी संगीत से जुड़े हैं जसपिंदर को दिल्ली विश्वविद्यालय से 2008 में हिन्दुस्तानी शास्त्री संगीत में डॉक्टरेट की डिग्री मिला। प्यार तो होना ही था फिल्म के टाइटिल सॉन्ग से चर्चा में आने ओर इसी गीत के लिए फिल्मफेयर अवार्ड पाने वाली जसपिंदर इन दिनों मास्टर सलीम के साथ एक लोक गीतों वाला एलबम बना रही है। इसके अलावा जल्द ही उनका एक भक्ति एलबम आने वाला है। पॉलीवुड के लिए उन्होंने हाल ही में आई फिल्म एक नूर के अलावा जी आयां नू, यारां नाल बहारां, पिंड दी कुड़ी, मिनी पंजाब आदि फिल्मों में गीत गाए हैं। यही नही, उनके कई पंजाबी एलबम भी आए हैं। नछत्तर गिल के साथ उनका डुएट एलबम के अलावा ओ लाल मेरी पट रखियो, माहिया मैं लोंग गवा आई हां, मुंडा तू ए पंजाबी सोहणा, बिल्लो नी तेरे नखरे ने आदि इनके लोकप्रिय पंजाबी गीत है। हाल ही में जालंधर आई जसपिंदर नरूला से हुई बातचीत के प्रस्तुत है अंश..

पंजाबी फिल्मों के इस दौर में पंजाबी संगीत को आप कहां पाती हैं?

लोकगीतों से हट कर अब पंजाबी फिल्मी गीतों में भी कई मेलोडियस गीतों ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। इससे जाहिर है कि पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में संगीत के बदलाव की बयार बहने लगी है।

अब काफी पंजाबी फिल्में बन रही हैं, लेकिन ज्यादातर विदेशी दूल्हों या विदेश से वतन वापसी के विषय पर ही केंद्रित हैं?

जी हां, पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री तरक्की कर रही है, लेकिन अब भी बजट की कमी के कारण यहां की फिल्में बॉलीवुड का मुकाबला नहीं कर पा रहीं। इन फिल्मों में स्टोरी लाइन एक जैसी होना भी माइनस प्वॉइंट है। यहां के प्रोड्यूसर अभी रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं। साथ ही जनता में भी विदेश का इतना क्रेज है कि फिल्मों का टॉपिक विदेश पर केंद्रित होना जाहिर सी बात है। पंजाबी लोग भी एक्सपेरिमेंट कबूल नहीं करते। हालांकि पंजाबी थीम बॉलीवुड में खूब प्रचलित हो रहे हैं, लेकिन उन में भी पंजाबी परिवारों को वास्तविकता से दूर और ओवर ग्लैमराइज कर के दिखाया जाता है। वे पंजाबी सभ्यता के आइना नहीं हैं।

कई पंजाबी गायक ऐक्टर भी बन गए हैं। इस बारे में आपकी क्या राय है?

मेरा मानना है कि हर कोई किशोर दा (कुमार) नहीं हो सकता। गायक को अपनी गायकी पर ही ध्यान केंद्रित रखना चाहिए, ताकि वह उस काम के साथ न्याय कर सके।

पंजाबी म्यूजिक एलबमों में बढ़ रही अश्लीलता के बारे में क्या कहेंगी?

कई मामलों में पंजाबी संगीत सुनने की नहीं, देखने की चीज होकर रह गया है। इन दिनों कई पंजाबी वीडियो ऐसे आए हैं, जिन्हें परिवार के साथ नहीं देखे जा सकते। मुझे लगता है कि जिस गीत में दम नहीं होता, उसे लोग सुनें, ऐसी कोई बात नहीं होती, उसमें अश्लीलता परोसकर गीत व संगीत से दर्शकों का ध्यान खींचा जाता है।

म्यांमार में नए राष्ट्रपति थीन सीन ने ली शपथ

म्यांमार में नए राष्ट्रपति थीन सीन ने ली शपथ


यंगून। म्यांमार में करीब दो दशक बाद जुंटा सैन्य शासन का अंत हो गया और नए राष्ट्रपति के रूप में थीन सीन ने बुधवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली।

पिछले साल नवंबर में हुए चुनाव में थीन सीन की पार्टी यूनियन सॉलिडेटरी एंड डेवलपमेंट पार्टी की जीत हुई थी। सीन को राजधानी नेपैदा में आयोजित एक समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। उन्होंने जनरल थान श्वे का स्थान लिया, जो 1992 से म्यांमार में सैनिक शासन का नेतृत्व कर रहे थे।

उप राष्ट्रपति तिन आंग मीन्ट वू ने भी शपथ ली। इससे पहले श्वे ने सरकारी टेलीविजन पर अपनी पार्टी स्टेट पीस एंड डेवलपमेंट काउंसिल पार्टी के आधिकारिक रूप से भंग होने की घोषणा की थी।

नई सरकार की कैबिनेट के कई सदस्य पूर्व सैनिक हैं और उनमें से कई पूर्ववर्ती सैन्य सरकार में भी शामिल थे। स्वयं राष्ट्रपति थीन सीन सैनिक सरकार में प्रधानमंत्री थे।

मेजर जनरल हला मिन को नया रक्षा मंत्री बनाया गया है, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल गृह मंत्री बनाए गए हैं। वहीं मेजर जनरल थीन हटे को सीमा संबंधी मामलों का मंत्री बनाया गया है।

नई सरकार के विदेश मंत्री वुन्ना मौंग ल्विन हैं, जबकि सूचना मंत्री क्याव हसन और वित्त मंत्री तिन नैंग थीन हैं। ये सभी पूर्व में सैनिक रह चुके हैं। उल्लेखनीय है कि देश में 1988 से ही सैनिक शासन था। सेना ने तख्ता पलट करते हुए 3 हजार लोकतंत्र समर्थकों की हत्या कर दी थी।

बेहतर माहौल की आस में मोहाली पहुंचे गिलानी

बेहतर माहौल की आस में मोहाली पहुंचे गिलानी



चंडीगढ़। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले विश्व कप क्रिकेट का सेमीफाइनल देखने तथा अपने भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह के साथ बातचीत करने के लिए यहा पहुंचे।

गिलानी अपनी पत्नी फौजिया के साथ पाकिस्तानी वायु सेना के विमान से अपनी पहली भारत यात्रा पर आए हैं। केंद्रीय संचार राज्य मंत्री सचिन पायलट और भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक तथा अन्य ने यहा रक्षा हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की।

पाक प्रधानमंत्री ताज होटल जाएंगे जहा कुछ देर आराम के बाद वह अपनी पत्नी तथा मैच देखने आए अपने मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों के साथ मोहाली स्टेडियम रवाना होंगे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्टेडियम में लगभग एक बजकर 45 मिनट पर पाकिस्तानी नेता की अगवानी करेंगे। इसके बाद दोनों नेता मैच शुरू होने से पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों से रूबरू होंगे।

मैच देखने के दौरान बीच में दोनों नेता आपस में बातचीत करेंगे और इसके बाद शाम लगभग साढ़े सात बजे रात्रिभोज करेंगे।

पिछले हफ्ते यह स्पष्ट होने के बाद कि सेमीफाइनल में भारत-पाकिस्तान की टीमें भिड़ेंगी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क्रिकेट और कूटनीति को मिलाते हुए मैच देखने तथा बातचीत के दौर के लिए गिलानी को आमंत्रित किया था।

इससे पहले, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की बहाली पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि वह और उनके समकक्ष मनमोहन सिंह क्षेत्र में शाति एवं समृद्धि के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं।

मोहाली रवाना होने से पहले गिलानी ने कहा कि जहा तक हमारे संबंधों की बात है तो दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल होने से मैं बहुत खुश हूं। दोनों के बीच गृह सचिव स्तर की बातचीत साकारात्मक माहौल में हुई। मैं इसकी सराहना करता हूं। गिलानी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट विश्व कप का सेमीफाइनल मुकाबला देखने के लिए सिंह के आमंत्रण पर मोहाली पहुंचे हैं। मार्च, 2008 में प्रधानमंत्री बनने के बाद गिलानी का यह पहला भारत दौरा है। उन्होंने कहा कि वह [सिंह] इस क्षेत्र में शाति और समृद्धि के लिए काम करना चाहते हैं। हम दोनों इसे लेकर प्रतिबद्ध हैं। हम माहौल में सुधार करना चाहते हैं ताकि अपने लोगों की सेवा कर सकें।

रावलपिंडी स्थित वायुसेना के ठिकाने से भारत रवाना होने से पहले गिलानी ने संवाददाताओं से कहा कि मैंने भारतीय प्रधानमंत्री को कभी भी नकारात्मक होते नहीं देखा। मैंने उन्हें हमेशा सकारात्मक पाया है।

गिलानी ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच रिश्तों में कुछ तरक्की और सुधार होगा। मेरे दौरे से पाकिस्तानी टीम का हौसला भी बढ़ेगा। यह पूछे जाने पर कि वह दोनों देशों के बीच क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने के बारे में प्रधानमंत्री सिंह से आग्रह करेंगे तो गिलानी ने कहा कि बेशक, जब हम भारत जा रहे हैं तो हम वहा मौके के मुताबिक बात करेंगे। एक पत्रकार ने गिलानी से पूछा कि वह सिंह को गुगली डालेंगे तो उन्होंने कहा, 'मैं क्रिकेट मैच देखने जा रहा हूं। अभी से कुछ उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।'

न्यौते के लिए प्रधानमंत्री सिंह का शुक्रिया करते हुए उन्होंने कहा कि वह भारत एवं पाकिस्तान की टीमों के साथ एकजुटता दिखाने और क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए मोहाली जा रहे हैं। सिंह की ओर से गिलानी के लिए रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया है। गिलानी ने कहा कि उन्होंने अपनी टीम के कप्तान शाहिद आफरीदी से फोन पर बात की और उन्हें देश की ओर से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, 'मैं दोनों देशों के लोगों से कहना चाहूंगा कि खेल का लुत्फ उठाएं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करें।'

यह पूछे जाने पर कि वह सिंह से भारतीय टीम को पाकिस्तान भेजने का आग्रह करेंगे तो उन्होंने कहा कि हम इन दिनों कठिन दौरे से गुजर रहे हैं और हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी लड़ रहे हैं। हम अच्छा माहौल तैयार कर लेंगे तो भारत से जरूर आग्रह करेंगे।

गिलानी एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी शुजात हुसैन, रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार, गृह मंत्री रहमान मलिक और सूचना मंत्री फिरदौस आशिक अवान भी भारत पहुंचे हैं।

इससे पहले, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि गिलानी और उनके भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह मोहाली में दोनों टीमों के बीच सेमीफाइनल मुकाबला देखने के अलावा परस्पर हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। विदेश विभाग की प्रवक्ता तहमीना जानुजा ने मंगलवार शाम कहा कि क्रिकेट मैच से अलग दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच परस्पर हितों से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

तहमीना ने कहा कि मोहाली में गिलानी की मौजूदगी क्रिकेट के प्रति पाकिस्तानी जनता के उत्साह को दर्शाती है। यह भारत और पाकिस्तान से बीच वार्ता की बहाली से भी जुड़ा है। दोनों प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण मैच को साथ बैठकर देखेंगे।

सोमवार, 28 मार्च 2011

भरोसा सलमान का

भरोसा सलमान का



जरीन खान को लोग नहीं भूले होंगे..। वही जरीन, जो सलमान खान के साथ फिल्म वीर में थीं और चर्चा हुई थी कि वे कट्रीना कैफ जैसी हैं। दरअसल, जरीन से जुड़ी नई खबर यह है वे जल्द ही सलमान खान के साथ एक और फिल्म में नजर आएंगी। रोचक बात यह है कि इस बार वे सलमान की हीरोइन बनकर नहीं, बल्कि उनके साथ एक आइटम डांस करेंगी। सलमान संग जरीन का आइटम डांस होगा जल्द रिलीज होने वाली फिल्म रेडी में।

आने वाली फिल्म रेडी में सलमान की नायिका हैं असिन। जरीन जानकारी देती हैं, कुछ दिनों पहले ही बैंकॉक से लौटी हूं। वहां के एक क्लब में तीन दिनों तक रेडी के आइटम डांस की शूटिंग की। मेरे साथ सलमान भी थे। बेहद मजा आया। अपने पहले आइटम डांस पर लोगों के रिएक्शन का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं। गौरतलब है कि रेडी में पहली बार दर्शक जरीन का ग्लैमरस लुक देखेंगे। वे कहती हैं, फिल्म वीर में मेरा लुक ट्रेडिशनल था। मैं सिर से पांव तक कपड़ों में ढंकी हुई थी। रेडी में मैं बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आऊंगी। रेडी में बेहद ग्लैमरस लुक है मेरा।

जरीन आगे बताती हैं कि रेडी में आइटम डांस के प्रस्ताव को स्वीकार करने की सबसे बड़ी वजह सलमान खान थे। वे कहती हैं, मैं सलमान को कभी मना नहीं कर सकती। जब उन्होंने मुझसे रेडी में एक आइटम डांस और मेहमान भूमिका करने की बात की, तो मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। सलमान खान से प्रभावित जरीन आगे कहती हैं, मुझे पता है कि सलमान हमेशा मुझे सही सलाह देंगे। जब भी मैं कंफ्यूज होती हूं या कोई निर्णय नहीं लेने की स्थिति में होती हूं, तो सलमान से ही बात करती हूं।

गौरतलब है कि धूम-धड़ाके के साथ जरीन का हिंदी फिल्मों में स्वागत हुआ था, लेकिन फिल्म वीर के असफल होने के साथ ही उनके सितारे गर्दिश में समा गए। हालांकि करियर के शुरुआती दौर में ही मिली असफलता से वे निराश नहीं हैं। धैर्य का दामन उन्होंने थाम रखा है। जरीन कहती हैं, मेरे पास फिल्मों के ऑफर तो बहुत से आए, पर जल्दबाजी में मैं कोई गलत निर्णय नहीं लेना चाहती थी। मैं कोई ऐसी फिल्म नहीं करना चाहती, जिसे करने का बाद अफसोस हो। पार्टनर 2 में अभिनय की खबरों पर अपनी सफाई देते हुए जरीन कहती हैं, सलमान खान ने मुझसे कहा था कि जब भी वे पार्टनर 2 बनाएंगे, मुझे उसमें जरूर कास्ट करेंगे, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं है, क्योंकि स्क्रिप्ट अभी रेडी नहीं है। जरीन यह बताना नहीं भूलतीं कि वे जल्द ही दो फिल्में साइन करने वाली हैं। वे अभी उन फिल्मों के नाम नहीं बताना चाहतीं।

मैच से पहले रिश्तों पर बात करेंगे मनमोहन-गिलानी!

मैच से पहले रिश्तों पर बात करेंगे मनमोहन-गिलानी!


नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। मोहाली के मैदान पर विश्वकप सेमीफाइनल में भारत और पाकिस्तान मुकाबले से पहले के दोनों देशों के प्रधानमंत्री 'अनौपचारिक मुलाकात' की मेज पर मिल सकते हैं। दोनों देशों के कूटनीतिक खेमों की कोशिशें जारी हैं कि मैच से पहले दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का दौर पूरा हो जाए।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक 30 मार्च को होने वाले दिन-रात्रि मुकाबले से पहले इस बात की प्रबल संभावना है कि दोपहर की दावत पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाक पीएम यूसुफ रजा गिलानी मिलें। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच होने वाली बातचीत के लिए यूं तो कोई एजेंडा तय नहीं है। लेकिन भारत-पाक संबंधों की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए जारी कोशिश में इस मुलाकात से उम्मीदें काफी हैं।

दोनों मुल्कों के बीच 26/11 के बाद से थमी बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की कड़ी में सोमवार को गृह सचिव स्तर की दो दिवसीय वार्ता शुरू हुई। पहले दिन की बातचीत के बाद दोनों खेमों ने बातचीत को सकारात्मक बताया। सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से बैठक में नकली नोट और नारकोटिक्स का मामला उठाया गया।

करीब एक साल बाद हो रही दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का खाका तैयार करने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक का दौर जारी है। सूत्र बताते हैं कि दोनों नेताओं की भेंट चंडीगढ़ के राजभवन में भी संभव है। हालांकि अभी तक शिखर स्तर मुलाकात के लिए स्थान का चुनाव पूरा नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि 30 मार्च की सुबह भारत पहुंच रहे प्रधानमंत्री गिलानी के साथ पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री फिरदौस आशिक अवान, विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खान और विदेश सचिव सलमान बशीर भी पहुंचेंगे।

पाक मीडिया के मुताबिक भारत दौरे से पहले प्रधानमंत्री गिलानी ने सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर मोहाली यात्रा से पहले अपनी सरकार को भरोसे में लिया। इससे पहले गिलानी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ मुलाकात के बाद ही भारतीय प्रधानमंत्री के न्योते को स्वीकार किया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 25 मार्च को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को अपने साथ मोहाली में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वकप सेमी फाइनल मुकाबला देखने का आमंत्रण दिया था।

भारत-पाक गृह सचिव स्तरीय वार्ता शुरू

भारत-पाक गृह सचिव स्तरीय वार्ता शुरू



नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच गृह सचिव स्तरीय बैठक सोमवार को यहां शुरू हो गई। वार्ता में आतंकवाद से निपटने, मुंबई हमले के संदिग्धों पर मुकदमा चलाने, वीजा नियमों, मादक पदार्थो की तस्करी और जाली नोटों की समस्या जैसे पेचीदा मुद्दों की समीक्षा हो सकती है।

इस बैठक में भारतीय शिष्टमंडल की अगुवाई गृहसचिव जी के पिल्लै और पाकिस्तानी शिष्टमंडल की अगुवाई वहां के गृह सचिव चौधरी कमर जमां कर रहे है। भारतीय शिष्टमंडल में आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव यू के बंसल और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रमुख एस सी चीमा भी शामिल है। बातचीत एक होटल में हो रही है और इसके शाम पांच बजे तक चलने की संभावना है।

दो दिवसीय गृहसचिव स्तरीय वार्ता में भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक भी दिखाई दिए। 2008 के मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों में पहली बार गृह सचिव स्तरीय बातचीत हो रही है। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष मछुआरों का मसला भी उठा सकते है।

ज्ञात हो कि 2008 में 10 पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा मुंबई पर किए गए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ समग्र बातचीत स्थगित कर दी थी।

शनिवार, 26 मार्च 2011

मोनिका: मौजूं विषय पर ईमानदार कोशिश

मोनिका: मौजूं विषय पर ईमानदार कोशिश



ुख्य कलाकार : दिव्या दत्ता, आशुतोष राणा, रजित कपूर, यशपाल शर्मा आदि।

निर्देशक : सुषेन भटनागर

तकनीकी टीम : निर्माता- कुश भार्गव, लेखक- सुषेन भटनागर,

इस फिल्म की कथाभूमि लखनऊ है। मोनिका और चंद्रकांत पंडित हमें भोपाल, पटना, देहरादून और जयपुर में भी मिल सकते हैं। हर प्रदेश में मोनिका और चंद्रकांत पंडित की कहानियां हैं। किसी प्रदेश में मोनिका का नाम मनीष भी हो सकता है। तात्पर्य यह कि लेखक-निर्देशक सुषेन भटनागर ने एक मौजूं विषय पर फिल्म बनाई है। पत्रकार की महत्वाकांक्षा और राजनीतिज्ञों द्वारा उनके इस्तेमाल की कहानियों में अक्सर राजनीतिज्ञों का खलनायक की तरह चित्रित किया जाता है। मोनिका को ही गौर से देखें तो मोनिका की मनोग्रंथि और महत्वाकांक्षा ही उसे राजनीतिक शिकंजे में ले जाती है और इस्तेमाल होने के लिए तैयार करती है। हमें इस कड़वे सच केदूसरे पक्ष को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मध्यवर्गीय परिवार की मोनिका की महत्वाकांक्षाएं परिवार और लखनऊ जैसे शहर से बड़ी हो जाती हैं। उसकी इस कमजोरी को स्वार्थी राजनीतिज्ञ, संपादक और बिजनेस घराने के लोग ताड़ जाते हैं। वे उसकी मेधा का दुरूपयोग करते हैं। मोनिका एक-दो दफा अपनी सामान्य जिंदगी में लौटना भी चाहती है, लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी है कि उसका असहाय पति भी उसकी मदद नहीं कर पाता। सुषेन भटनागर ने सरल तरीके से राजनीति, मीडिया और इंडस्ट्री के काले व्यूह को उजागर करने की कोशिश की है। उनकी यह सरलता ही फिल्म को सामान्य बना देती है और एक मजबूत संभावना को कमजोर कर देती है। उन्होंने मोनिका के लिए जो नैरेटिव चुना है, वह इस कहानी का उलझाता है। कोर्ट रूम को मंच बना कर फ्लैश बैक में लाया गया वृतांत फिल्म की गति में स्पीड ब्रेकर का काम करता है।

सुषेन भटनागर की शिल्पगत कमियों के बावजूद कथ्य और अभिनय के लिहाज से यह फिल्म उल्लेखनीय है। मोनिका सीमित संसाधनों में उनकी एक ईमानदार कोशिश है। प्रोडक्शन की कमियों को सुषेन भटनागर ने आशुतोष राणा और दिव्या दत्ता के अभिनय से पूरा किया है। दोनों के दमदार अभिनय में नाटकीयता दिख सकती है,लेकिन यह भी एक शैली है। हिंदी के पारंपरिक सिनेमा में दर्शक ऐसे अभिनय के आदी रहे हैं। आशुतोष राणा ने चंद्रकांत पंडित के छद्म और छल को अच्छी तरह आत्मसात किया है। दिव्या दत्ता मोनिका के द्वंद्व और दुविधा को बढ़ी सीमा तक व्यक्त करती है। अपने एकाकी दृश्यों में वह अतिरिक्त मेहनत करती हैं, जो कई बार ज्यादा और अनुचित लगता है। सहयोगी कलाकारों में मोनिका के पति राज की भूमिका रजित कपूर नहीं जंचे हैं। शेष कलाकारों की संजीदगी फिल्म को मजबूत करती है। अंत में फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दृश्यों के प्रभाव को नहीं बढ़ा पाता। फिल्म का यह एक कमजोर पक्ष है।