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सोमवार, 20 जून 2011

लोकपाल विधेयक पर दो नए मतभेद उभरे

लोकपाल विधेयक पर दो नए मतभेद उभरे



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को लोकपाल के दायरे में लाने के विवादास्पद मुद्दे पर सरकार और समाज के सदस्यों के कड़े रूख के बीच लोकपाल विधेयक पर गठित संयुक्त मसौदा समिति की बैठक सोमवार समाप्त हो गई। हालांकि कल 4.30 में फिर से बैठक होगी।

लोकपाल बिल बनाने के लिए गठित ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सरकार और सिविल सोसाइटी के नुमाइंदों के बीच सोमवार को हुई बैठक नाकाम रही। इस बैठक के बाद भी जहां एक ओर कुछ मुद्दों पर पहले से ही मौजूद असहमति बरकरार है वहीं दो नए मुद्दों पर असहमति उभर कर सामने आई है।

इस बैठक के बाद आज दोनों पक्षों का रुख नरम रहा और वे एक-दूसरे पर हमलावर तेवरों के साथ मीडिया से नहीं मिले। टीम अन्ना की ओर से प्रशांत भूषण ने बताया कि बैठक का माहौल अच्छा था। कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन दो नए मामलों पर मतभेद भी उभर गए।

ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि प्रशांत भूषण ने कहा कि लोकपाल को गठित करने वाली चयन समिति में कौन लोग शामिल होंगे, इस पर असहमति उभरकर सामने आई है। भूषण ने कहा कि सरकारी प्रतिनिधि चयन समिति में सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल करना चाहते हैं। जबकि सिविल सोसाइटी के सदस्य स्वतंत्र लोगों को इस समिति में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा लोकपाल समिति को हटाने के लिए अपील के अधिकार को लेकर भी मतभेद सामने आया है। सरकारी प्रतिनिधि चाहते हैं कि लोकपाल समिति को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील का हक केंद्र सरकार के पास रहे। लेकिन सिविल सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि लोकपाल समिति को हटाने के लिए अपील का हक सबको होना चाहिए।

वहीं, ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसाइटी के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने लोकपाल बिल को लेकर सरकार को 40 बिंदू दिए थे। सरकार का कहना है कि इनमें से 11 पर सहमति बन गई है। लोकपाल को चुनने के लिए चयन समिति के गठन और उसे हटाने पर सरकार अपना नियंत्रण रखना चाहती है।'

वहीं, दूसरी ओर ड्राफ्टिंग समिति में शामिल सरकारी प्रतिनिधियों की तरफ से मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बातचीत को संतोषजनक बताया। कपिल सिब्बल ने बैठक के बाद कहा है कि कई मुद्दों पर समिति में शामिल सरकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी है, लेकिन कुछ मुद्दों पर अब भी असहमति बनी हुई है। उनका कहना है कि जिन मु्द्दों पर पहले से टकराव था, उन पर अब भी कोई सहमति नहीं बन पाई है। सिब्बल ने यह भी कहा कि मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक में सरकार के प्रतिनिधि और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि एक-दूसरे को अपना-अपना ड्राफ्ट सौंपेंगे।

सिब्बल ने यह जानकारी भी दी कि जुलाई में राजनीतिक दलों को लोकपाल बिल का ड्राफ्ट सौंपा जाएगा और उनकी प्रतिक्रिया ली जाएगी। जिसके बाद इसे कैबिनेट में ले जाया जाएगा और फिर संसद में इसे पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के कार्यालय में 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में समाज पक्ष की ओर से न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े को छोड़ कर दस सदस्यीय समिति के सभी सदस्य भाग ले लिए थे।

यह बैठक कुछ विवादित मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों में वादविवाद की पृष्ठभूमि में शुरू हुई और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के खिलाफ है।

इससे पहले, वरिष्ठ मंत्रियों ने सरकार की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए कल शाम विचारविमर्श किया था।

सरकार ने न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को भी लोकपाल के दायरे में लाए जाने का विरोध किया है जबकि अन्ना हजारे नीत समाज की राय है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति हेगड़े ने कहा कि जहां तक हो सके, हम मुद्दों के हल की कोशिश करेंगे। कुल छह मुद्दे हैं जिन पर हमारी राय अलग अलग है।

पिछली बैठक 15 जून को हुई थी जिसमें सरकार के प्रतिनिधियों ने समाज के सदस्यों से अपना प्रारूप पेश करने को कहा था। इन प्रतिनिधियों ने कहा था कि वह भी अपना प्रारूप पेश करेंगे। यह भी तय किया गया कि मसौदा विधेयक को उन बिंदुओं के साथ मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा जिन पर मतभेद हैं।

कांग्रेस द्वारा कड़ा रूख अपनाने का संकेत देते हुए पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने हजारे को एक पत्र भेज कर कहा कि उनके [हजारे] द्वारा उठाए गए मुद्दों पर वह [सोनिया] अपने विचार स्पष्ट कर चुकी हैं।

हजारे के अनशन पर हेगड़े की टिप्पणियों और दिल्ली में हुई बैठक में उनके भाग न लेने के कारण अटकलें लगाई जा रही थीं कि समाज पक्ष के प्रतिनिधियों में मतभेद हैं। इस बारे में हेगड़े ने कहा कि वह यह बताने के लिए 21 जून को होने वाली बैठक में भाग लेंगे कि समाज पक्ष में कोई मतभेद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व की प्रतिबद्धताओं के चलते वह आज की बैठक में भाग नहीं ले पा रहे हैं।

सरकार ने प्रधानमंत्री के पद को लोकपाल के दायरे में लाने से साफ इंकार किया है वहीं कांग्रेस के कोर समूह ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का पक्ष लिया है।

सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया है कि सर्वदलीय बैठक 30 जून के बाद बुलाई जा सकती है क्योंकि तब तक संयुक्त समिति का विधेयक तैयार करने का काम पूरा हो जाएगा।

वरिष्ठ मंत्री पी चिदंबरम और पार्टी के कुछ अन्य शीर्ष नेता कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री पद को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर मतभेद हैं।

खबरें हैं कि इस बारे में संप्रग के घकों में भी मतभेद हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस गठबंधन की अगुवाई कर रही है तो उसे सबको साथ लेकर चलना होगा। गौरतलब है कि सरकार ने इस मामले में राजनीतिक दलों से रायशुमारी के लिए अगले माह सर्वदलीय बैठक बुलाने का भी मन बना लिया है।

लोस अध्यक्ष मीरा कुमार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुला कर सरकार को लोकपाल पर विभिन्न दलों की राय जानने का मौका मुहैया करवाया दिया है। बदले राजनीतिक हालात में लोकपाल के अधिकार क्षेत्र को लेकर चुप्पी साधे बैठे विपक्ष के लिए जल्द ही अपना पक्ष साफ करना जरूरी होगा।

हालांकि, सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि सोमवार और जरूरत होने पर मंगलवार को बैठक कर समिति अपना काम पूरा कर लेगी। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली दावा कर चुके हैं कि समिति दो मसौदों की बजाय एक ही मसौदे में अलग-अलग राय समाहित कर कैबिनेट को सौंपेगी।

सूत्रों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक के लिए अगले माह के पहले हफ्ते की कोई तारीख तय की जाएगी। इस बैठक के जरिए लोकपाल से जुड़े मुद्दों पर सरकार विभिन्न दलों की राय लेना चाहती है। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ने भी बुधवार को सभी दलों के प्रमुख नेताओं को अपने घर पर बैठक के लिए बुलाया है।

 आम तौर पर लोकसभा अध्यक्ष सत्र शुरू होने के पहले ऐसी बैठक बुलाती हैं। मगर इस बार यह बैठक सत्र की तारीख तय होने से पहले ही बुलाई गई है। बैठक में लोकपाल समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। पिछले दिनों कांग्रेस कोर ग्रुप ने तय किया है कि इस मामले पर संसद में बिल लाने से पहले सरकार सभी दलों की राय लेगी। इससे पहले विभिन्न दलों की राय लेने की सरकार की कोशिश नाकाम हो चुकी है।

कनीमोरी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं

कनीमोरी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2जी स्पेक्ट्रम मामले में द्रमुक सांसद कनीमोरी और कलैंगनर टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति बी एस चौहान की विशेष पीठ ने दोनों आरोपियों से कहा कि वे विशेष सीबीआई अदालत में नियमित जमानत याचिका दाखिल करने से पहले उनके खिलाफ आरोप तय होने का इंतजार करें।

न्यायालय ने कहा कि इसके बाद ही सीबीआई अदालत, उनकी पिछली जमानत याचिकाओं पर हुई सुनवाई से अप्रभावित रहते हुए, इस बारे में फैसला कर सकती है। न्यायालय की ओर से जमानत याचिका खारिज करने के फैसले का मतलब है कि आरोप तय होने तक कनीमोरी और कुमार को जेल में ही रहना होगा।

अदालत ने लगभग डेढ़ घंटे तक सीबीआई और आरोपियों के वकीलों की ओर से पेश दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।

सीबीआई ने यह कहते हुए जमानत याचिका का विरोध किया कि कलैंगनर टीवी के साथ हुए 200 करोड़ रुपये के अवैध आर्थिक लेन-देन से जुड़े मूल दस्तावेज बरामद होने अभी बाकी हैं और आरोपी जमानत मिलने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

गौरतलब है कि सिंघवी प्रारंभ से ही 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर नजर बनाए हुए हैं। वे करोड़ों रुपये के इस घोटाले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका के बारे में सरकार से कई बार सवाल कर चुके हैं।

द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि की बेटी कनीमोरी के लिए जमानत की यह आखिरी उम्मीद है। वह करीब एक महीने से दिल्ली की तिहाड़ जेल में हैं। इससे पहले सीबीआइ की विशेष अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट भी उनकी जमानत की अर्जी खारिज कर चुके हैं।

 कनीमोरी और शरद कुमार पर सीबीआइ ने कलैगनर टीवी में 200 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन करने का आरोप लगाया है। स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद बलवा की डीबी रियलिटी से यह रकम प्राप्त करने वाले कलैगनार टीवी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कनीमोरी और कुमार की 20-20 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों को गत 20 मई को गिरफ्तार किया गया था।

शनिवार, 11 जून 2011

अब पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी

अब पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी


कोलकाता [निर्भय देवयांश]। लंबे संघर्ष के बाद पश्चिम बंगाल में 'परिवर्तन' का परचम लहराने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब राज्य का नाम बदलकर बांग्ला या बंगदेश करना चाह रही हैं। उनका तर्क है, चूंकि देश में सिर्फ पश्चिम बंगाल है और पूर्व बंगाल का कोई अस्तित्व नहीं है। कभी इस नाम से अलग राज्य हुआ करता था, लेकिन पाकिस्तान से विभाजन के बाद पूर्व बंगाल बांग्लादेश बन गया। ऐसे में अब पश्चिम बंगाल का नाम बदल देना चाहिए। ममता को बांग्ला व बंगदेश दोनों नाम पसंद हैं, इसलिए आने वाले समय में किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है।

 दूसरी तरफ वामपंथी बुद्धिजीवी इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल नाम कोई खराब नहीं है। इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, इसलिए नाम बदलने की जरूरत नहीं है। बांग्ला साहित्य के वरिष्ठ लेखक सुनील गंगोपाध्याय कहते हैं कि आखिर इसकी क्या जरूरत है? हर राज्य की अपनी पहचान है और उसे आगे भी कायम रखने की जरूरत है। हालांकि, परिवर्तनवादी बुद्धिजीवी नाम परिवर्तन के पक्ष में हैं। जाने-माने पेंटर जोगेन चौधरी कहते हैं कि राज्य के नाम परिवर्तन में हर्ज नहीं है। नई सरकार सोच-समझकर यह कदम उठा रही होगी। जब देश में सिर्फ एक ही बंगाल है, तो पश्चिम शब्द हटाने से अच्छा ही होगा। पेंटर समीर आइच ने उदाहरण देते हुए कहा कि कि पहले भी कई शहरों के नाम बदले गए हैं। कई राज्यों की राजधानी के नाम भी बदले गए हैं। कलकत्ता से कोलकाता, बंबई से मुंबई, मद्रास की जगह चेन्नई..। राज्यों में उड़ीसा का नाम बदलकर ओड़िसा किया गया, फिर पश्चिम बंगाल का नाम में कोई हर्ज नहीं।

शुक्रवार, 20 मई 2011

ममता बनर्जी ने संभाली प. बंगाल की कमान

ममता बनर्जी ने संभाली प. बंगाल की कमान



कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वाम के 34 वर्ष के शासनकाल का अंत करने वाली ममता बनर्जी ने 38 सदस्यीय तृणमूल कांग्रेस-कांग्रेस सरकार की मुखिया के तौर पर शुक्रवार को शपथ लेकर एक नया इतिहास रच दिया क्योंकि वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गई है।

राज्यपाल एम के नारायणन ने 56 वर्षीय ममता को राज्य की 11वीं मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। उनके साथ तृणमूल के 35 और कांग्रेस के दो सदस्यों ने मंत्री पत्र की शपथ ली। तृणमूल कांग्रेस के चार विधायकों को राज्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई।

शपथ लेने के समय ममता साधारण सफेद साड़ी और तिरंगा उत्तरीय पहने हुए थीं। उन्होंने बांग्ला में ईश्वर के नाम पर शपथ ली। ममता के कैबिनेट में शामिल होने वालाें में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के उप नेता पार्थ चटर्जी, फिक्की के पूर्व सचिव एवं तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीते अमित मित्र, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मानस भुइयां, कांग्रेस विधायक दल के नेता अबु हिना शामिल हैं। संकेत हैं कि अमित मित्र को राज्य का वित्त मंत्री बनाया जा सकता है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने दोपहर एक बजकर एक मिनट पर शपथ ली। शपथ का यह समय ममता ने खुद तय किया था। शपथ ग्रहण समारोह में 3,000 से ज्यादा अतिथि मौजूद थे जिनमें पराजित मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और वाम मोर्चे के संयोजक विमान बोस शामिल थे।

डेढ़ घंटे से अधिक चले शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम, राज्य के पूर्व वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एच ए हलीम भी उपस्थित थे। पूर्व राज्यपाल वीरेन जे शाह ने भी समारोह में शिरकत की।

बुधवार, 18 मई 2011

भारद्वाज ने कहा, येद्दियुरप्पा के पास भारी बहुमत

भारद्वाज ने कहा, येद्दियुरप्पा के पास भारी बहुमत



बेंगलूर। कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री बी एस येद्दियुरप्पा के पास भारी बहुमत है और इस बारे में कोई संदेह नहीं है।

कर्नाटक में भाजपा सरकार के साथ एक तरह से चल रहे राजनीतिक युद्ध के बीच, यहां एक सरकारी समारोह में मुख्यमंत्री के साथ मौजूद भारद्वाज ने अपने और येद्दियुरप्पा के बीच मतभेदों से बचने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के करीब एक सप्ताह बाद पहली बार भारद्वाज और येद्दियुरप्पा एक मंच पर नजर आए।

बहरहाल, खुद को वापस बुलाए जाने की भाजपा की मांग पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यपाल के तौर पर उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति ने की थी तथा उनके [राष्ट्रपति के] अलावा और कोई उन्हें [भारद्वाज को] वापस नहीं बुला सकता।

कर्नाटक लोकसेवा आयोग के स्वर्ण जयंती समारोह में उन्होंने कहा, 'मैं यह तथ्य जानता हूं कि मुझे पूरी तरह संविधान के अनुरूप ही काम करना है।'

राज्यपाल ने कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की थी जिसके बाद भारद्वाज के खिलाफ भाजपा के उच्च्च स्तरीय अभियान में भाग ले कर आज सुबह नई दिल्ली से लौटे येद्दियुरप्पा तनावमुक्त नजर आए और मंच पर दोनों को कई बार बातचीत करते देखा गया। भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा 'यह समझना चाहिए कि मुख्यमंत्री राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। उनके पास भारी बहुमत है, इस बारे में कभी कोई विवाद नहीं रहा और हम मित्र हैं। यह राजनीतिक तनाव अप्रासंगिक है। हमें खुद को संविधान और कानून के प्रति समर्पित करना होगा।'

उन्होंने कहा कि जहां तक उनका सवाल है तो उनकी कुछ भी गलत करने की कोई योजना नहीं है लेकिन, 'मेरे हाथ संविधान से बंधे हुए हैं।'

भारद्वाज ने कहा कि वह चाहते हैं कि कर्नाटक में उनकी सरकार एक ख्यातिप्राप्त सरकार बने। उपनिषद को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि अतिथि भगवान की तरह होता है और राज्यपाल के तौर पर वह राज्य के अतिथि हैं।

नई दिल्ली में पिछले दो दिन में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात कर, राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की भारद्वाज की सिफारिश को खारिज करने और उन्हें वापस बुलाने की मांग की।

मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिल कर, अपनी सरकार का बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा का सत्र शीघ्र बुलाने का अनुरोध करेंगे।

भारद्वाज ने येद्दियुरप्पा को राज्य के विकास के लिए कड़ी मेहनत करने वाला मुख्यमंत्री करार दिया। उन्होंने कहा 'अभी भी मुख्यमंत्री राज्य के विकास के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। मैं जानता हूं कि वह दिन में 18 से 20 घंटे तक काम करते हैं।'

राज्यपाल ने यह आरोप खारिज कर दिया कि वह पक्षपात करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी पक्षपात नहीं किया। उन्होंने कहा कि येद्दियुरप्पा के खिलाफ उनके मन में कुछ भी नहीं है।

उन्होंने कहा, 'मेरे चपरासी से लेकर सचिव तक, मैं सभी के साथ प्यार और अपनेपन से व्यवहार करता हूं और बदले में यही चाहता हूं।' मुख्य सचिव, सचिवों और राज्य के नौकरशाहों को अपने संबोधन में भारद्वाज ने कहा 'सिद्धांतों के आधार पर और एक दूसरे को सम्मान देते हुए काम करिए।'

 उन्होंने राज्य के नौकरशाहों की सराहना करते हुए कहा कि वह अन्य राज्यों में अपने समकक्षों की तुलना में बेहतर काम कर रहे हैं। गुजरे जमाने की याद करते हुए येद्दियुरप्पा ने कहा कि राजनीति में आने से पहले, कभी वह एक क्लर्क के तौर पर सरकारी नौकरी करते थे। उन्होंने कहा 'मुख्यमंत्री बनने के बाद, मैंने कई सबक सीखे। आने वाले दो वर्षों में मैं पारदर्शी प्रशासन पर पूरा ध्यान दूंगा। इसके लिए मैं सभी वरिष्ठों का सहयोग चाहता हूं।'

बुधवार, 11 मई 2011

प्रशासन बेखबर, राहुल पहुंचे भट्टा परसौला गांव

प्रशासन बेखबर, राहुल पहुंचे भट्टा परसौला गांव




ग्रेटर नोएडा। प्रशासन को बिना जानकारी दिए हुए काग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को भट्टा परसौल गाव के लोगों से मुलाकात की। यहा के लोगों की भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई थी। राहुल प्रशासन को सूचित किए बगैर गाव में सुबह के छह बजे पहुंचे और ग्रामीणों के घर गए। उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझने के लिए उनसे बात की।

गौरतलब है कि शनिवार को पुलिस और किसानों के बीच हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यह जगह पार्टियों के लिए राजनीतिक अखाड़ा बन गया। राजनीतिक दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति की तीखी आलोचना की है।

अमेठी से सासद राहुल ने बीते साल अलीगढ़ जिले के टप्पल गाव का दौरा किया था और 'यमुना एक्सप्रेस-वे परियोजना' के लिए मायावती सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि के लिए अधिक मुआवजे की माग की थी।

ग्रेटर नोएडा और इससे सटे इलाकों के किसान अपनी जमीन के लिए मायावती सरकार से अधिक मुआवजे की माग कर रहे हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल दिल्ली में राष्ट्रीय लोक दल के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि सरकार संसद के आगामी सत्र में भूमि अधिग्रहण अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करेगी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने गौतम बुद्ध नगर में किसानों पर पुलिस कार्रवाई की कल निंदा करते हुए माग की थी कि भूमि अधिग्रहण के चलते विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए एक नया कानून बनाया जाए।

जोशी ने कहा कि किसानों की जमीन सस्ती दर पर लेना और उद्योगपतियों को इसका दुरूपयोग करने की इजाजत देना गलत है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जारी आदोलन के मद्देनजर किसानों ने राज्य के गाजियाबाद जिले के महरौली गाव में कल जितेन्दर नागर के नेतृत्व में एक पंचायत की और अपनी जमीन छोड़ने से इंकार कर दिया।

 अपने आदोलन के लिए समर्थन जुटाने के लिए किसान घर-घर गए और ग्रामीणों से कहा कि वह उनकी जमीन वापस दिलाने के लिए सरकार पर दबाव डाले।

बुधवार, 4 मई 2011

खांडू के हेलीकॉप्टर का मलबा व शव मिला

खांडू के हेलीकॉप्टर का मलबा व शव मिला



ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू सहित लापता हुए हेलीकॉप्टर का मलबा और पांच क्षतविक्षत शव बुधवार सुबह राज्य के तवांग जिले के जंग झरना के करीब से बरामद किए गए।

उधर, केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि अरुणाचल के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू को लेकर लापता हुए हेलीकॉप्टर का मलबा मिल गया है और शव भी बरामद किए गए हैं, लेकिन शवों की अभी पहचान नहीं हो पाई है।

उन्होंने मीडिया से अपील की कि आधिकारिक पुष्टि होने तक वह किसी तरह का अनुमान न लगाए। चिदंबरम ने कहा कि दुर्घटनास्थल की पहचान कर ली गई है, कुछ शव देखे गए हैं। अधिक जानकारी का इंतजार करें।

कुल 96 घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद बुधवार सुबह करीब 10 बजे खोजी दल ने सुदूर लोबोतंग क्षेत्र में मलबा पाया। यह क्षेत्र समुद्र से 10 हजार फुट की ऊंचाई पर खड़ी पर्वत श्रृंखलाओं और घने जंगलों वाला है। शवों को वहां बाहर निकालने के बाद ईटानगर लाए जाने की सम्भावना है। अधिकारियों के मुताबिक पर्वत श्रृंखला से शवों को निकालने में बचाव दल को तीन से चार घंटे का समय लग सकता है। भारी बर्फबारी और बारिश के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि शनिवार को मुख्यमंत्री खांडू को तवांग से ईटानगर ले जा रहा पवन हंस कंपनी का हेलीकॉप्टर एएस 350 बी-3 सुबह 9.50 बजे लापता हो गया था। हेलीकॉप्टर के पायलट से आखिरी संपर्क उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद हुआ था इस समय हेलीकॉप्टर सेला दर्रे के करीब 13,700 फुट की ऊंचाई पर था।

 हेलीकॉप्टर की तलाश के लिए बुधवार को पांचवे दिन भारतीय वायु सेना के छह हेलीकॉप्टरों ने सेला दर्रे में तलाशी अभियान शुरू किया था। कांग्रेस विधायक सेवांग धोनदुप की छोटी बहन येशमी लामू भी हेलीकॉप्टर में सवार थीं। इसके अलावा इसमें मुख्यमंत्री के मुख्य सुरक्षा अधिकारी और दो पायलट मौजूद थे।

सोमवार, 2 मई 2011

अमेरिका के लिए दुश्मन नंबर एक था ओसामा

अमेरिका के लिए दुश्मन नंबर एक था ओसामा


नई दिल्ली। अमेरिका के लिए ओसामा बिन लादेन दुश्मन नंबर एक था। 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के बाद वह अमेरीकी ख़ुफि़या एजेंसी सीआईए के लिए सर्वाधिक वाछित व्यक्ति था।

आतंकी नेटवर्क अलकायदा की स्थापना करने वाला ओसामा बिन लादेन [54वर्ष] न्यूयार्क और वाशिगटन में 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों सहित कई आतंकी घटनाओं का मास्टरमाइंड था।

वह 1998 में अफ्रीका में अमेरिका के दो दूतावासों पर हुए बम हमलों और अक्तूबर 2000 में अदन के यमनी बंदरगाह पर यूएसएस कोल पर हुए हमले की घटनाओं में संदिग्ध था।

सऊदी अरब से निष्कािसत ओसामा बिन लादेन अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर अमेरिका नीत हमले के बाद से ही भागता फिर रहा था। तालिबान ने ही लादेन को अफगानिस्तान में पनाह दी थी। अमेरिका नीत हमले में तालिबान के शासन का खात्मा हो गया था।

वर्ष 1957 में जन्मा लादेन सऊदी अरब के सबसे धनी भवन निर्माता का बेटा था। कई अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घटनाओं के लिए अमेरिका को ओसामा और उसके साथियों की तलाश थी। दस साल से अमेरिका ओसामा को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर अरबों डॉलर खर्च कर चुका है।

ओसामा बिन लादेन के पास अथाह संपत्ति है। उसने अफगानिस्तान में तालेबानी अभियान को संरक्षण दे रखा था। उसने अमेरिका के खिलाफ पवित्र युद्ध और अमेरिकीयों और यहूदियों को मारने का आह्वान किया था।

इस्लामिक ट्रेनिंग सेंटरों की स्थापना में सहयोग देने का भी ओसामा पर शक है। इनकी मदद से चेचेन्या और पूर्व सोवियत संघ के कई हिस्सों में लड़ाई के लिए योद्धा तैयार किए जाते हैं। कहा जाता है कि ओसामा के आसपास कोई तीन हज़ार लड़ाकों की फ़ौज होती थी।

ओसामा की ताक़त की बुनियाद बनी उसके परिवार द्वारा सऊदी अरब में निर्माण कार्यो के धंधे से अर्जित की गई संपत्ति थी। सऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया।

कई जानकार मानते हैं कि ओसामा को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी।

अफ़ग़ानिस्तान में ओसामा ने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की, जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया।

धर्म का तिरस्कार करने वाली एक विचारधारा के खिलाफ लड़ाई में अफ़गानी मुस्लिम भाइयों का साथ देने के लिए मिस्त्र, लेबनान और तुर्की से हज़ारों लोग बिन लादेन के साथ आ गए।

ओसामा बिन लादेन के ग्रुप को अरब अफ़गान के नाम से जाना जाने लगा था।

सोवियत सेना के लौट जाने के बाद अरब अफ़गान अमेरिका और मध्य पूर्व में उसके सहयोगियों के खिलाफ जुट गए।

ओसामा बिन लादेन अपना पारिवारिक व्यवसाय संभालने के लिए सऊदी अरब लौट गया, पर 1991 में सरकार विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया गया।

इसके बाद पाच साल तक वह सूडान में रहा और जब अमरीका के दबाव में सूडानी सरकार ने भी उसे निकाल दिया तो वह अफ़ग़ानिस्तान लौट गया। अमेरिका का कहना है कि ओसामा तीन बड़े हमलों में शामिल था। एक 1993 में व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर में हुई बमबारी, दूसरा 1996 में सऊदी अरब में 19 अमरीकी सैनिकों की हत्या और तीसरा 1998 में कीनिया और तंज़ानिया में हुई बमबारी।

11 सितंबर, 2001 को व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले ने तो उसे अमेरिका के लिए अतिवाछित बना ही दिया था।

जानकार मानते हैं कि ओसामा का ग्रुप अपहरण और बमों से हमले करने वाले अन्य ग्रुपों से अलग है क्योंकि वह एक सुगठित ढाँचे वाला ग्रुप न होकर कई महाद्वीपों में काम कर रहे कई ग्रुपों का गठबंधन है। अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि ओसामा बिन लादेन के सहयोगी, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, मध्य पूर्व और एशिया के 40 से भी अधिक देशों में सक्त्रिय हैं।

ओसामा से मिलने वाले लोगों के मुताबिक वह बहुत कम बोलने वाला, शर्मीला किस्म का इंसान था। उसकी तीन पत्नियाँ हैं। 11 सितंबर 2001 के बाद से ही ये अटकलें लगाई जाती रही थी कि वह कहा है। पाकिस्तान को उसका संभावित ठिकाना बताया गया। कई बार यह दावा भी किया गया कि वह मारा जा चुका है। पर उसकी ओर से समय-समय पर अपने संदेश वाले टेप भिजवाकर इन दावों को झूठा साबित किया गया।

 अमेरिका अधिकारियों को हमेशा यही लगता रहा कि ओसामा अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कहीं छिपा है। हालाकि पाकिस्तान इसका खंडन करता रहा, लेकिन अब उसकी मौत पाकिस्तान में ही हुई है। ऐसे में पाकिस्तान की भी पोल खुल गई है। अमेरिका ने ओसामा के ठिकाने के बारे में जानकारी देने वाले को ढ़ाई करोड़ डॉलर का इनाम देने की घोषणा कर रखी थी।

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

डर व पक्षपात के बिना काम करे सीबीआई

डर व पक्षपात के बिना काम करे सीबीआई



नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो [सीबीआई] को बेकसूरों को निशाना नहीं बनाने की नसीहत देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि जांच एजेंसी को किसी डर और पक्षपात के बिना काम करना चाहिए। दोषियों के खिलाफ उनके पदों की परवाह किए बिना मामला दर्ज करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े लोगों से जुड़े मामलों की जांच में सीबीआई अधिकारियों को कड़ी कसौटी पर उतरना पड़ता है। एजेंसी के नए मुख्यालय का यहां उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सीबीआई की जांच बिना किसी वैरभाव, निर्दोषों को प्रताड़ित किए बिना और बेकसूरों को निशाना बनाए बिना होनी चाहिए।

मनमोहन ने कहा कि सीबीआई को बिना किसी भय और बिना किसी पक्षपात के काम करना चाहिए तथा पदों की परवाह किए बिना उन सबके खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए जो दोषी हैं। जो भी देश के कानून का उल्लंघन करे चाहे वह शक्तिशाली हो उसके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीबीआई ने अन्य जांच एजेंसियों के लिए अनुकरण का एक मानदंड स्थापित किया है लेकिन सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इस प्रमुख जांच एजेंसी के लिए जरूरी श्रमशक्ति, वित्तीय मदद और प्रौद्योगिकी मुहैया कराने के लिए कटिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सीबीआई के लिए 71 अतिरिक्त विशेष अदालतों के गठन का फैसला किया है जिनमें से 64 को मूंजरी मिल गई है लेकिन अभी केवल 16 काम कर रही हैं।

 मनमोहन ने कहा कि पिछले सालों में सीबीआई देश की प्रमुख जांच एजेंसी बनकर उभरी है और सीबीआई को जांच सौंपने के लिए काफी जोर रहता है। उन्होंने 186 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सीबीआई के मुख्यालय की शानदार नई इमारत का जिक्र आधुनिक कला और हरित इमारत के रूप में किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस नई इमारत में आप सब अनुकूल और सहज माहौल में काम कर सकेंगे।

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

पूछताछ के बाद कलमाड़ी गिरफ्तार

पूछताछ के बाद कलमाड़ी गिरफ्तार




नई दिल्ली। वर्ष 2009 में लंदन में हुई क्वीन्स बैटन रिले [क्यूबीआर] के आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई ने सोमवार को सुरेश कलमाड़ी से पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

सीबीआई ने राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष पद से हटाए गए कलमाड़ी से कुछ नए मुद्दों पर स्पष्टीकरण के लिए पेश होने को कहा था जो कि क्यूबीआर घोटाले के सिलसिले में एजेंसी के अधिकारियों की लंदन यात्रा के दौरान सामने आए।

कलमाड़ी ने इससे पहले अपनी विदेश यात्रा का हवाला देते हुए सीबीआई के समक्ष पेश होने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह 19 अप्रैल के बाद ही घर वापसी करेंगे। लेकिन विदेश यात्रा से लौटने के बाद भी वह सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए और उन्होंने कहा कि वह अब भी दिल्ली में नहीं हैं।

सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि वर्ष 2009 में क्यूबीआर के दौरान एएम फिल्म्स और एएम कार एंड वैन हायर लिमिटेड से सौदे में कथित अनियमितता से जुड़े मामले में दो सदस्यीय दल की लंदन यात्रा के दौरान कुछ नए तथ्य जुटाए गए थे। इस दल ने लंदन में रहने वाले दोनों कंपनियों के मालिक आशीष पटेल से बातचीत की, जिसने कथित सौदे के संबंध में जानकारी और दस्तावेज मुहैया कराए।

लंदन की एएम कार एंड वैन हायर कंपनी से 2009 में क्यूबीआर के दौरान अतिथियों व आयोजन समिति के सदस्यों के लिए टैक्सी जैसी सेवाएं ली गई थीं। एएम फिल्मस को आयोजन के दृश्य उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध किया गया।

सूत्रों ने कहा कि सीबीआई ने कथित तौर पर कलमाड़ी की मौन स्वीकृति पर दोनों कंपनियों को किए गए भुगतान की जाच के लिए अतिरिक्त निदेशक वी के गुप्ता व डीआईजी एस के पलसानिया को लंदन भेजा था।

सीबीआई अब कलमाड़ी से दोनों कंपनियों के साथ आर्थिक लेनदेन के बारे में ताजा जानकारी जुटानी चाहती है। राष्ट्रमंडल खेल आयोजन से जुड़े घोटालों में पूछताछ के लिए कलमाड़ी तीसरी बार सीबीआई के समक्ष पेश हुए।

 सीबीआई सूत्रों के अनुसार, कलमाड़ी के खिलाफ सीबीआई को कुछ पुख्ता सबूत मिले हैं। गिरफ्तारी की औपचारिक घोषणा शाम तक होगी। सीबीआई कल सुरेश कलमाड़ी को कोर्ट में पेश करेगी।

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

पीएसएलवी ने तीन उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया

पीएसएलवी ने तीन उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया



श्रीहरिकोटा [आध्र प्रदेश]। पिछले वर्ष दिसम्बर में जीएसएलवी की विफलता के बाद इसरो ने अपने पहले सफल मिशन के तहत भरोसेमंद पीएसएलवी रॉकेट के जरिए तीन उपग्रहों को बुधवार को कक्षा में स्थापित कर दिया।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान [पीएसएलवी] अपने 18वें मिशन पर यहा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10 बजकर 12 मिनट पर प्रक्षेपित हुआ।

जैसे-जैसे रॉकेट का हर एक चरण सफल होता गया, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने तालिया बजाकर जश्न मनाया। पीएसएलवी-सी16 ने अपने प्रक्षेपण के 18 मिनट बाद तीन उपग्रहों को 822 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में स्थापित कर दिया।

प्रक्षेपण के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र से बाहर आए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने मिशन की सफलता की घोषणा की और इसे 'मानक प्रक्रिया के तहत' हुआ प्रक्षेपण करार दिया। प्रक्षेपण के दौरान यह यान पूरे समय अपने पथ पर ही रहा।

पीएसएलसी-सी16 अपने साथ 1,206 किलोग्राम वजनी आधुनिक पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह रिसोर्ससैट-2, भारत और रूस द्वारा तारामंडलीय और पर्यावरणीय अध्ययन के लिए निर्मित 92 किलोग्राम वजनी यूथसैट और सिंगापुर स्थित नेनयाग टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी द्वारा मानचित्रीकरण उपयोग के लिए विकसित 106 किलोग्राम वजनी एक्स-सैट ले गया है।

मिशन सफल होने की इसरो प्रमुख की घोषणा के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र में मौजूद कई वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वैज्ञानिकों ने राहत की सास ली क्योंकि पिछले वर्ष जीएसएलवी मिशन लगातार दो बार विफल हो गया था।

करीब 1,200 किलोग्राम वजनी रिसोर्ससैट-2 पाच वर्ष अंतरिक्ष में रहेगा। वह वर्ष 2003 में प्रक्षेपित रिसोर्ससैट-1 का स्थान लेगा और प्राकृतिक संसाधनों के बारे में 'मल्टीस्पेक्टरल' और 'स्पाशियल कवरेज' मुहैया कराएगा। पिछले वर्ष दिसम्बर में जीएसएलवी मिशन तब विफल हो गया था जब संचार उपग्रह जीसैट-5पी को ले जा रहे स्वदेश निर्मित जीएसएलवी-एफ06 में प्रक्षेपण के एक मिनट के भीतर ही बीच हवा में धमाका हो गया और वह बंगाल की खाड़ी में जा गिरा। जीसैट-5पी में 24 सी-बैंड और 12 विस्तारित सी-बैंड ट्रासपोंडर्स थे। रॉकेट के प्रक्षेपण पथ से भटक जाने के बाद वह समुद्र में जा गिरा था। इससे पहले अप्रैल 2010 में भी जीसैट-4 को ले जा रहा जीएसएलवी-डी3 मिशन विफल हो गया था, जिससे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को गहरा झटका लगा था।

पीएसएलवी का आज हुआ कामयाब प्रक्षेपण इस मिशन का लगातार 17वा सफल मिशन है। पीएसएलवी मिशन सिर्फ एक बार विफल हुआ था, जब यान को सितंबर 1993 में पहली बार प्रक्षेपित किया जा रहा था।

राधाकृष्णन ने कहा कि दो विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण दर्शाता है कि पीएसएलवी की विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई है। मिशन निदेशक पी. कुन्हीकृष्णन ने कहा कि यह पूरे इसरो समुदाय के लिए खुशी का मौका है। इसरो ने अपने साहस को साबित किया और मिशन काफी अच्छी तरह से सफल हुआ। यह देश को दोबारा आश्वस्त कराने की तरह है कि इसरो में भरोसा जताना पूरी तरह जायज है। निदेशक की इस टिप्पणी ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को उत्साह से भर दिया, जिनका जीएसएलवी की दो लगातार विफलताओं के बाद मनोबल बढ़ाए जाने की जरूरत थी।

रॉकेट के प्रक्षेपण और उसके अंतरिक्ष में पहुंचने तक मिशन नियंत्रण केंद्र में मौजूद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में चिंता का भाव था। अंतरिक्ष यान से उपग्रहों के अलग होने के हर चरण के सफल होने पर वैज्ञानिकों ने तालिया बजाकर जश्न मनाया।

रिसोर्ससैट-2 में एक ही प्लेटफार्म पर तीन हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगे हैं। ए कैमरे ऐसी तस्वीरें लेंगे जो फसलों की स्थिति के आकलन में मददगार होंगे। ए कैमरे वन कटाई की स्थिति, झीलों और जलाशयों के जल स्तर तथा हिमालय में पिघलने वाली बर्फ पर नजर रखेंगे।

इसरो अधिकारियों ने कहा कि इससे संसाधनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देने के लिए जरूरी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय जानकारी एकत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, जैविक संसाधन और भौगोलिक संभावनाओं से जुड़े विशिष्ट क्षेत्रों में निगरानी भी हो सकेगी। इस उपग्रह से मिलने वाली जानकारी आपदा प्रबंधन तथा अन्य संबंधित गतिविधियों में मददगार साबित होगी।

च्च्च, मध्यम और तीक्ष्ण रिजॉल्यूशन वाले तीन कैमरे के साथ ही रिसोर्ससैट-2 में दो 'सॉलिट स्टेट रिकॉर्डर' हैं। ऐसे प्रत्एक रिकॉर्डर की तस्वीरें कैद करने की क्षमता 200 जीबी की है। इन तस्वीरों को पृथ्वी पर मौजूद केंद्र हासिल कर सकेंगे। इस उपग्रह में कनाडा के 'कॉमडेव' द्वारा निर्मित स्वचलित पहचान प्रणाली भी मौजूद है। यह वीएचएफ बैंड की जहाज निगरानी प्रणाली है ताकि पोतों के स्थान, गति तथा अन्य तरह की जानकारी हासिल की जा सके।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने इस सफल प्रक्षेपण को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि वैज्ञानिक इस तरह के अधिक प्रयास करें, इसके लिए प्रधानमंत्री तथा सरकार उनके साथ है।

पीएसएलवी की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत

-देश के धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान [पीएसएलवी] ने अपनी सफलता की कहानी दोहराई है, जिसके पीछे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत छिपी है। पीएसएलवी का यह लगातार 17वा सफल मिशन है जिसके तहत श्रीहरिकोटा से रिमोट सेंसिंग उपग्रह रिसोर्ससैट-2 को प्रक्षेपित किया गया है।

पीएसएलवी-सी16 के साथ दो नैनो उपग्रह भी प्रक्षेपित किए गए हैं। इस सफल प्रक्षेपण ने अंतरिक्ष क्षेत्र के अरबों डॉलर के वैश्विक बाजार में भारत की व्यावसायिक क्षमताओं को एक बार फिर साबित कर दिया है।

यह मिशन सिर्फ एक बार विफल हुआ था जब सबसे पहले पीएसएलवी-डी। को 20 सितंबर 1993 को प्रक्षेपित किया गया था। इसके बाद से यह मिशन हर बार सफल ही रहा है।

वर्ष 1994 से पीएसएलवी को इसरो का तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र विकसित कर रहा है। पीएसएलवी के जरिए 44 उपग्रह प्रक्षेपित हो चुके हैं, जिनमें से 25 विदेशी उपग्रह थे। पीएसएलवी ने जो अहम प्रक्षेपण किए हैं, उनमें भारत का चंद्र अभियान 'चंद्रयान-1' शामिल है जिसे अक्तूबर 2008 में भेजा गया था। इसके अलावा कार्टोसैट और रिसोर्ससैट-1 भी अहम प्रक्षेपणों में शामिल हैं।

मानक पीएसएलवी 44 मीटर लंबा होता है और इसका वजन 295 टन होता है। यह अपने साथ 1,600 किलोग्राम वजनी उपग्रह ले जा सकता है और उन्हें सौर समकालिक धु्रवीय कक्षा में 620 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर सकता है। पीएसएलवी भू-समकालिक स्थानातरण कक्षा में भी 1,050 किलोग्राम वजनी उपग्रह स्थापित कर सकता है।

इसरो ने कहा कि पीएसएलवी ऐसा परिवर्तनशील यान बन गया है जो धु्रवीय सौर समकालिक कक्षा, निम्न पृथ्वी कक्षा और समकालिक स्थानातरण कक्षा में कई उपग्रहों को स्थापित कर सकता है। इसमें चार चरण होते हैं और यह ठोस तथा तरल संचालन प्रणाली का बारी-बारी से इस्तेमाल करता है।

विविध प्रकृति की बनावट के साथ पीएसएलवी ने एक ही प्रक्षेपण में कई पेलोड और कई मिशन को साथ ले जाने की क्षमता साबित कर दी है।

पीएसएलवी मिशन से जुड़े घटनाक्रम इस प्रकार हैं -

अंतरिक्ष उपग्रह तिथि परिणाम

पीएसएलवी-डी1 आईआरएस-1ई

20 सितंबर 1993 विफल

पीएसएलवी-डी2 आईआरएस-पी2 1 5 अक्तूबर 1994 सफल

पीएसएलवी-डी3 आईआरएस-पी3 2 1 मार्च 1996 सफल

पीएसएलवी-सी1 आईआरएस-1डी 29 सितंबर 1997 सफल

पीएसएलवी-सी1 ओशियनसैट

और दो अन्य उपग्रह

26 मई 1999 सफल

पीएसएलवी-सी3 टीईएस

22 अक्तूबर 2001 सफल

पीएसएलवी-सी4 कल्पना-1 12 सितंबर 2002 सफल

पीएसएलवी-सी5 रिसोर्ससैट-1 17 अक्तूबर 2003 सफल

पीएसएलवी-सी6 कार्टोसैट-1 और हैमसैट पाच मई 2005 सफल

पीएसएलवी-सी7 कार्टोसैट-2

और तीन अन्य उपग्रह

10 जनवरी 2007 सफल

पीएसएलवी-सी8 एजाइल

23 अप्रैल 2007 सफल

पीएसएलवी-सी10 टीईसीएसएएआर 23 जनवरी 2008 सफल

पीएसएलवी-सी9 कार्टोसैट - 2ए

आईएमएस-1 और आठ नैनो उपग्रह

28 अप्रैल 2008 सफल

पीएसएलवी-सी11 चंद्रयान-1 22 अक्तूबर 2008 सफल

पीएसएलवी-सी12 आरआईसैट-2

और एएनयूसैट

20 अप्रैल 2009 सफल

पीएसएलवी-सी14 ओशियनसैट-2

और छह अन्य उपग्रह

23 सितंबर 2009 सफल

पीएसएलवी-सी15 कार्टोसैट-2बी

और चार अन्य उपग्रह

12 जुलाई 2010 सफल

पीएसएलवी-सी16 रिसोर्ससैट-2

और दो अन्य उपग्रह

 20 अप्रैल 2011 सफल

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

कांग्रेस संदेश ने किया शहीदों की जाति का उल्लेख

कांग्रेस संदेश ने किया शहीदों की जाति का उल्लेख



नई दिल्ली। आजादी की लड़ाई लड़ते हुए शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि आजाद भारत में किसी दिन उन्हें जाति के खांचे में फिट कर उनकी पहचान बताई जाएगी। लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन की झंडाबरदार रही कांग्रेस पार्टी ने ऐसा किया है। पार्टी के मुखपत्र 'कांग्रेस संदेश' के मार्च माह के अंक में इन शहीदों की जाति का उल्लेख करते हुए इनकी पहचान बताई गई है। भाजपा ने इसे शहीदों का अपमान बताते हुए कहा है कि कांग्रेस देश से माफी मांगे।

हालांकि कांग्रेस को इसमें कुछ भी अनुचित नहीं दिख रहा है। मुखपत्र के संपादक अनिल शास्त्री ने कहा, 'इसको तूल नहीं दिया जाना चाहिए। क्योंकि इनकी जाति का उल्लेख करना जीवन वृतांत का हिस्सा है।'

कांग्रेस संदेश के मार्च के अंक में शहीद भगत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वह जाट सिख परिवार में जन्मे थे। जबकि राजगुरु के बारे में मुखपत्र कहता है कि वह महाराष्ट्र के भारतीय क्रांतिकारी थे और देशस्थ ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते थे। राजगुरू का जन्म पुणे के निकट खेड़ नामक स्थान पर हुआ था।

शहीदों की जाति के उल्लेख के मुद्दे को भाजपा ने फौरन लपक लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह राष्ट्र के नायकों का अपमान है और ऐसा पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और उसकी सरकार ने राष्ट्र के महानायकों का अपमान किया हो। नकवी के मुताबिक, ''विभिन्न पुस्तकों के प्रकाशनों के जरिए कांग्रेस पहले भी कई बार ऐसा करती आई है। लेकिन अब वह सारी सीमाएं लांघ गई है। कांग्रेस पार्टी को इसके लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।''

विवाद गहराने पर कांग्रेस संदेश पत्रिका के संपादक अनिल शास्त्री ने कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। स्कूल और कालेज में जब हमें इतिहास पढ़ाया जाता है और जब महात्मा गांधी का उल्लेख होता है तो यह बताया जाता है कि वह गुजराती बनिया परिवार में जन्मे थे। भाजपा बिना बात का मुद्दा बना रही है।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

हजारे की मागों पर सरकार ने अपनाया अड़ियल रुख

हजारे की मागों पर सरकार ने अपनाया अड़ियल रुख


नई दिल्ली। सरकार ने प्रभावी लोकपाल विधेयक के संबंध में अन्ना हजारे की मागों पर यह कहकर अड़ियल रुख अपना लिया है कि वह संयुक्त मसौदा समिति की अध्यक्षता किसी गैर सरकारी व्यक्ति को देने और आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की माग स्वीकार नहीं कर सकती।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की शुक्रवार की सुबह कार्यकर्ताओं स्वामी अग्निवेश और अरविन्द केजरीवाल के साथ बैठक निर्धारित थी, लेकिन यह नहीं हो पाई क्योंकि दोनों पक्षों ने कहा कि वे एक-दूसरे का इंतजार कर रहे हैं। बैठक अब शाम छह बजे होगी।

सिब्बल ने कहा कि लोकपाल विधेयक पर संयुक्त मसौदा समिति में सिर्फ सरकारी अधिकारी शामिल होंगे और कोई भी मंत्री इसका हिस्सा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त समिति के गठन पर आधिकारिक अधिसूचना की कोई संभावना नहीं है, लेकिन हमने उन्हें बताया है कि हम कानून मंत्रालय और प्रेस नोट के जरिए एक आधिकारिक पत्र देना चाहते हैं।

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

रतन टाटा ने माना, टेप में आवाज मेरी

रतन टाटा ने माना, टेप में आवाज मेरी




नई दिल्ली। रतन टाटा ने पीएसी में सोमवार को स्वीकार किया कि राडिया से बातचीत वाले टेप किए गए फोन में आवाज उन्हीं की है।

पीएसी ने नीरा राडिया से उन टेपों की सूची देने को कहा है जो सीबीआई ने उन्हें सुनाए थे। रतन टाटा ने स्वीकार किया कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था।

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

सादिक बाशा मौत मामले की जांच करेगी सीबीआई

सादिक बाशा मौत मामले की जांच करेगी सीबीआई




नई दिल्ली। जांच एजेंसी सीबीआई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह सादिक बाशा मौत मामले की जांच अपने हाथ लेने को तैयार है। गौरतलब है कि बाशा पूर्व केंद्रीय मंत्री और 2जी घोटाले के आरोपी ए राजा के करीबी थे। बाशा ने संदिग्ध परिस्थिति में आत्महत्या कर ली थी।

उधर, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की सुनवाई के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता यूयू ललित को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया है।

जाच एजेंसी की ओर से हाजिर वरिष्ठ अधिवक्ता के. के. वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति जी. एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए. के. गागुली की पीठ को बताया कि सीबीआई ने बाशा की मौत के मामले में जाच का जिम्मा संभालने की इच्छा जाहिर की है।

इससे पहले, तमिलनाड़ु सरकार ने भी बाशा की मौत के मामले की सीबीआई से जाच कराने का पक्ष लिया था। पीठ ने अतिरिक्त सालिसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह से कहा कि वह केंद्र से निर्देश लें और सीबीआई को मामला सौंपने संबंधी अधिसूचना जारी करने के बारे में चार अप्रैल तक सूचित करें।

सीबीआई ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की सुनवाई के लिए खास तौर पर गठित विशेष अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता यू यू ललित विशेष लोक अभियोजक के रूप में पेश होंगे।

न्यायालय ने जाच एजेंसी के वकील से कहा कि वह विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना के बारे में निर्देश लें और मंगलवार तक इस बारे में सूचित करें। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने बाशा की मौत के मामले की जाच सीबीआई को सौंपने की माग करती गैर-सरकारी संगठन 'सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' की अर्जी पर जाच एजेंसी से जवाब दाखिल करने को कहा था। इसी संगठन की अर्जी पर न्यायालय ने 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले की सीबीआई जाच के आदेश दिए थे। बाशा से पिछले वर्ष दिसंबर में सीबीआई ने चार दफा पूछताछ की थी और उनके आधिकारिक तथा आवासीय परिसरों की तलाशी ली गई थी।

38 वर्षीय बाशा को दक्षिण चेन्नई स्थित उनके घर में 16 मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उनकी पत्नी ने दावा किया था कि बाशा ने आत्महत्या की क्योंकि वह जाच के दबाव का सामना नहीं कर पा रहे थे।

बाशा ग्रीनहाउस प्रमोटर्स के प्रबंध निदेशक थे। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को संदेह है कि इस कंपनी ने राजा की ओर से लेनदेन किया। विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति के बारे में सीबीआई ने मंगलवार को शीर्ष न्यायालय को बताया था कि उसे इस मामले में सक्षम वकील ढूंढने में दिक्कत आ रही है क्योंकि जिन उद्योगपतियों तथा उनके अधिकारियों के इस मामले में नामजद होने की संभावना है, वे पहले ही आला वकीलों से अपने बचाव के लिए जुड़ चुके हैं।

हालाकि, वेणुगोपाल ने आज पीठ को बताया कि पूर्व में विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्ति के प्रतिच्अनिच्छा जाहिर कर चुके वरिष्ठ अधिवक्ता ललित जनहित में यह जिम्मा संभालने को तैयार हो गए हैं।

सोमवार, 7 मार्च 2011

महिला सशक्तिकरण का यक्ष प्रश्न

महिला सशक्तिकरण का यक्ष प्रश्न





नई दिल्ली [डॉ. ऋतु सारस्वत]। भारत अपनी स्वतंत्रता के छह दशक बिता चुका है और इन वर्षो में भारत में बहुत कुछ बदला है। विश्व के सबसे मजबूत गणतंत्र में सभी को अपनी इच्छा से जीने, सोचने और अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता मिली है, जिसका हम उपभोग भी कर रहे हैं।

हालाकि एक वर्ग ऐसा भी है जो आज भी इस सुखानुभूति से वंचित है और वह हैं स्त्रिया। स्त्री और पुरुष के बीच भेद आज भी कायम है और यह तथ्य आकड़ों से उद्घाटित होता है जो विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर किए गए सर्वेक्षणों पर आधारित है।

एसोचैम की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय महिलाएं घर और दफ्तर दोनों ही जगह भेदभाव का शिकार हैं। काम के बढि़या अवसर तो दूर उन्हें पदोन्नति के समान अवसर तक नहीं मिलते, जिस कारण वह उच्च पदों पर नहीं पहुंच पाती हैं। महज 3.3 प्रतिशत महिलाएं ही शीर्ष पदों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाती हैं।

भारत में महिला आर्थिक गतिविधि दर केवल 42.5 प्रतिशत है, जबकि नार्वे में यह 60.3 प्रतिशत और चीन में 72.4 प्रतिशत है। यह आकड़े बाजार अर्थव्यवस्था से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के हैं। विश्व के कुल उत्पादन में लगभग 160 खरब डॉलर का योगदान अदृश्य सेवा का होता है, इसमें भारतीय महिलाओं का योगदान काफी बड़ा है। इसके बावजूद समाज के आर्थिक वर्गो की गणना करते हुए घरेलू महिलाओं के श्रम का उचित मूल्याकन नहीं हो पाता और उनकी तुलना नगण्य माने जाने वाले पेशों के तहत होती है।

देश के नीति-निर्धारकों की ओर से आर्थिक वर्गाीकरण करते हुए देश की आधी आबादी को इस दृष्टिकोण से देखा जाना न केवल उनके श्रम की गरिमा के प्रति घोर असंवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि यह भेदभाव और लैंगिक पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है।

विगत दो दशक में महिला सशक्तीकरण की अवधारणा ने जोर पकड़ा है। यह वह प्रक्रिया है जो महिलाओं को सत्ता की कार्यशैली समझने की न केवल समझ देता है अपितु सत्ता के स्त्रोतों पर नियंत्रण कर सकने की क्षमता भी प्रदान करता है। सामाजिक विकास अंतर्निहित रूप से राजनीतिक होता है, इसलिए यदि यह असमानतापूर्ण और गैर सहभागितापूर्ण हो तो इससे समाज का विकास प्रभावित होगा।

इंटर पार्लियामेंटरी यूनियन के अनुसार विभिन्न देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वहा की संसद में भारत की अपेक्षा बहुत अधिक है। यूं तो पंचायत और शहरी निकायों के माध्यम से विकास प्रक्रियाओं एवं निर्णयन की प्रक्त्रिया में सहभागिता बढ़ाने के लिए पचास प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है।

हालाकि अध्ययन बताते हैं कि सत्ता का उपभोग वास्तविक रूप में पदासीन महिलाओं की बजाय उनके परिवार के पुरुष सदस्य करते हैं। यदि कभी ऐसा नहीं होता तो उसके घातक परिणाम भी देखने में आए हैं। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक महिला सरपंच को पूर्व सरपंच तथा उसके साथियों ने बस स्टैंड पर नग्न करके मात्र इसलिए पीटा कि, क्योंकि कार्यभार संभालने के एवज में उसने पंचायत फंड से सात हजार रुपये नहीं दिए।

देश का संविधान, विभिन्न कानूनी प्रावधान और व्यक्तिगत तथा सामूहिक प्रयास स्त्री को उबारने में लगे हैं, लेकिन महिलाओं की परेशानिया कम नहीं हो रही हैं। देश में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहा महिलाएं स्वयं को सुरक्षित महसूस करती हों। बस, ट्रेन, ऑफिस, स्कूल-कॉलेज अथवा भीड़भाड़ वाले स्थानों से लेकर सुनसान रास्तों में फब्तिया कसने, घूरने, छेड़छाड़ आदि की घटनाएं आम हैं। सन 2009 में बलात्कार के 21 हजार मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 15 से 17 वर्ष वाली लड़कियों का प्रतिशत 12 फीसदी रहा तो उनसे छोटी लड़कियों की तादाद 29 प्रतिशत रही।

हाल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले वर्ष, हर तीन में से दो महिलाएं यौन हिंसा का शिकार हुई। आकड़े बताते हैं कि लड़किया और स्त्रिया बाहर की तरह अपने घरों में भी असुरक्षित हैं। पति और रिश्तेदारों द्वारा होने वाले अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। महिलाओं पर हो रही घरेलू हिंसा के आकड़े जितने लंबे-चौड़े हैं उतने ही डरावने भी।

उत्पीड़न, प्रताड़नाओं और अवहेलनाओं के कंटीले तारों से बींधता भारतीय स्त्री का जीवन इस धरा पर आने के लिए भी संघर्ष करता है। जन्म से पूर्व ही लिंग के प्रति भेदभाव आरंभ हो जाता है। भारत में बालिका भू्रणहत्या के संदर्भ में नोबेल पुरस्कार विजेता अम‌र्त्य सेन ने इस चिंता से सहमति जताई है कि इस कुप्रथा के चलते देश में ढाई करोड़ बच्चिया जन्म से पूर्व ही गुम हो गई।

यही नहीं, डब्ल्यूईएफ ने बच्चियों के स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा के आकड़ों के हिसाब से भी पुरुष-महिला समानता की सूची में इन्हें निचले पायदान पर पाया है। विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य और जीवित रहने जैसे मसलों में पुरुष और महिलाओं के बीच लगातार अंतर बना हुआ है।

भारत में महिला संवेदी सूचकाक लगभग 0.5 है जो कि स्पष्ट करता है कि महिलाएं मानव विकास की उपलब्धियों से दोहरे तौर पर वंचित हैं। विकसित देशों में प्रति लाख प्रसव पर 16-17 की मातृत्व मृत्युदर की तुलना में भारत में 540 की मातृत्व मृत्युदर, स्वास्थ्य रक्षा और पोषक आहार सुविधाओं में ढाचागात कमियों की ओर इशारा करती है।

जीवन के मूलभूत अधिकारों से वंचित देश की महिलाएं अनवरत रूप से असमानताओं के दंश झेल रही है। भारतीय महिलाओं में साक्षरता की कमी है सामंती समाज येन-केन प्रकारेण महिलाओं के अधिकारों का हनन परंपराओं के नाम पर करता है। यह विश्व के सबसे बड़े लोकतात्रिक देश को ऐसे कटघरे में ला खड़ा करता है जहा उसके पास मानवता के हनन को रोकने का कोई उत्तर नहीं है। जब स्त्रिया आगे बढ़ती हैं तो परिवार आगे बढ़ता है, गाव आगे बढ़ता है और राष्ट्र अग्रसर होता है। पर क्या हम वाकई इस तथ्य को आत्मसात कर पाए हैं या फिर स्त्री सशक्तीकरण की नियति महिला दिवस पर चर्चाओं और नारेबाजी तक सीमित हो गई है।

वैलेंटाइन डे बन रहा है महिला दिवस

शबाना आजमी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आस-पास अखबार, मैगजीन और होर्डिग्स पर तमाम विज्ञापन देखकर मुझे चिंता होती है कि महिला दिवस वैलेंटाइन डे का रूप अख्तियार करता जा रहा है, जिसका इस्तेमाल लोग अपना उत्पाद बेचने के लिए कर रहे हैं।

व्यक्तिगत तौर पर मैं किसी भी दिन एक फूल से लेकर डायमंड तक को प्राथमिकता दूंगी। एक स्नेहपूर्ण स्पर्श, चंद खुशनुमा पल और एक प्रशसापत्र भी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है। यह दिन औरतों द्वारा समाज में समान भागीदारी प्राप्त करने का एक प्रतीक है।

मेरे हिसाब से महिला दिवस मनाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन मुद्दों की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करता है जिन्हें हम अमूमन नजरअंदाज कर देते हैं। तमाम तरक्की और उपलब्धियों के बावजूद अभी कई क्षेत्र हैं जहा महिलाओं को आगे बढ़ना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में महिलाओं को समान मौके नहीं मिले हैं। पश्चिमी देशों में भी सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर बहुत कम महिलाएं हैं। खेल के नियम को भी बदलना होगा ताकि महिलाएं निर्णय प्रक्त्रिया में खुद हिस्सा ले सकें। निर्णय स्वीकार करने की मजबूरी खत्म होनी चाहिए। राष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर, सत्ताधारी पार्टी की प्रमुख व विपक्ष की नेता महिलाएं हैं, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या भी एक सच है।

गरीब ग्रामीण महिलाओं पर किसी का ध्यान नहीं है। हम उन महिलाओं को सलाम करते हैं जिन्होंने पुरुष प्रधान समाज में महिला को ऊपर उठाने के लिए संघर्ष किया। यह आत्म अवलोकन का अवसर भी है। मेरी पहली पहचान है कि मैं महिला हूं और मैं महिला दिवस अपनी महिला बहनों के लिए मनाती हूं। मैं एक ऐसी दुनिया की कल्पना करती हूं जहा स्त्री को अधिकार दिए जाएंगे ताकि वह पुरुषों के साथ आगे बढ़ सकें, न कि वह जिंदगाी भर दुर्बल बनी रहें और शक्तिशाली लोग उस पर राज करें।

रविवार, 6 मार्च 2011

निरूपमा मौत मामला: पिता, भाई व प्रेमी पर वारंट

निरूपमा मौत मामला: पिता, भाई व प्रेमी पर वारंट



कोडरमा। पत्रकार निरूपमा पाठक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मामले में कोडरमा की एक स्थानीय अदालत ने आज निरूपमा के पिता, भाई और प्रेमी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एन के अग्रवाल ने यह वारंट तब जारी किया है जब चार दिन पहले पुलिस ने अदालत के समक्ष कहा था कि यह आत्महत्या का मामला है और इसके लिए पीड़िता के पिता, भाई और प्रेमी ने उसे उकसाया था।

एक मार्च को अदालत के सामने सौंपी गई अपनी जाच रिपोर्ट में पुलिस ने निरूपमा के पिता धमेंद्र पाठक, मा सुधा पाठक, भाई समरेंद्र और प्रेमी प्रियभाशु रंजन के खिलाफ धारा 306 [आत्महत्या के लिए उकसाने] के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने की माग की थी।

गौरतलब है कि निरूपमा की मा सुधा पाठक को हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल जमानत पर हैं। प्रियभाशु रंजन ने निरूपमा के परिवार वालों को उसकी हत्या का दोषी ठहराया था।

शनिवार, 5 मार्च 2011

भ्रष्टाचार मिटाने को बने नया कानून: मीरा

भ्रष्टाचार मिटाने को बने नया कानून: मीरा




हरिद्वार [जागरण संवाददाता]। देश से भ्रष्टाचार के सफाए के लिए नए कानून बनाने होंगे। लोकसभा अध्यक्ष डॉ. मीरा कुमार ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। वह गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने आई थीं।

लोकसभा अध्यक्ष ने देश की लचर कानून व्यवस्था को भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण बताया। कहा कि देश से भ्रष्टाचार मिटाना है तो नए कानून बनाए होंगे। वर्तमान कानून भ्रष्टाचार रोकने के लिए नाकाफी हैं। डॉ. कुमार ने संसद में लगातार हंगामे की स्थिति के बारे में कहा कि जिन मुद्दों पर सांसद हंगामा करते हैं, उन पर खुली बहस होनी चाहिए। इससे हंगामे से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिला बिल राज्यसभा से पारित हो चुका है और अब लोकसभा से इसे पास होना है। इसमें सभी दलों का सहयोग बेहद जरूरी है। तभी महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का सपना साकार हो सकेगा।

इससे पहले मीरा कुमार ने गुरुकुल कांगड़ी विवि के 111वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान कीं। समारोह में 1100 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गई। मीरा कुमार को विवि के सर्वोच्च सम्मान विद्या मार्तड की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. योगानंद शास्त्री थे।

इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोमवार को

इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोमवार को



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट मुंबई की नर्स अरुणा रामचंद्र शानबाग की इच्छामृत्यु अपील पर सोमवार [सात मार्च] को अपना फैसला सुनाएगा।

अरुणा यौन उत्पीड़न का शिकार होने के बाद पिछले 37 वर्षों से अस्पताल में निष्क्रिय जीवन व्यतीत कर रही है। न्यायमूर्ति मार्कडेंय काटजू और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने गत दो मार्च को अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती, वरिष्ठ अधिवक्ता टी आर अंधियारुजिना, याचिकाकर्ता के वकील शेखर नाफाड़े और किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल के वरिष्ठ अधिवक्ता पल्लफ सिसोदिया की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अरुणा के लिएच्इच्छामृत्यु के लिए याचिका लेखिका पिंकी विरानी ने दायर की है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि अरुणा पिछले 37 वर्षों से निष्क्रिय हालत में है तथा इस दुख से निकलने का एकमात्र रास्ताच्इच्छामृत्यु है।

उल्लेखनीय है कि करुणा किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत थी। 27 नवंबर, 1973 को अस्पताल के सफाई कर्मचारी ने उस पर हमला किया और उसके गले में कुत्ते की चेन से झटके से खींचा और उसके बाद उसका यौन उत्पीड़न किया।