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बुधवार, 30 मार्च 2011

हूं ऐसा ही: प्रतीक बब्बर

हूं ऐसा ही: प्रतीक बब्बर



फिल्म धोबी घाट में अभिनेता आमिर खान की मौजूदगी के बावजूद सबका ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल हुए प्रतीक बब्बर। फिल्म में उन्होंने साबित किया कि उनका लुक और पर्सनैल्टी भले ही हिंदी फिल्मों के अभिनेता जैसी नहीं है, लेकिन वे अपने अभिनय से सबका दिल जीतने का दम रखते हैं। शायद यही वजह है कि रोहन सिप्पी ने अपनी नई फिल्म दम मारो दम में अभिषेक बच्चन जैसे स्थापित अभिनेता के रहते हुए कहानी का केंद्र प्रतीक को बनाना उचित समझा। चौंकिए मत, दम मारो दम की कहानी के नायक हैं युवा प्रतीक। उम्मीद से ज्यादा रफ्तार से आगे बढ़ रहे प्रतीक अपनी इन उपलब्धियों से बहुत खुश हैं। बस उन्हें एक बात का दुख है। प्रतीक कहते हैं, काश! मेरी मम्मी जीवित होतीं। मेरी सफलता को देखकर वे बहुत खुश होतीं। मैं उन्हें बहुत मिस कर रहा हूं।

मां के प्यार पाने से वंचित रहे प्रतीक अपने अब तक के सफर में ज्यादातर अकेले रहे हैं। उनकी परवरिश नाना-नानी के घर हुई। पिता के प्यार के मामले में भी उनकी किस्मत दूसरे बेटों जैसी नहीं रही। उन्हें पिता राज बब्बर का अपेक्षित प्यार नहीं मिला। प्रतीक आज शबाना आजमी में अपनी मां को देखते हैं, तो आमिर खान में बड़ा भाई। स्नेहिल रिश्तों की छांव से वंचित रहे प्रतीक बिना किसी संकोच के कहते हैं, शबाना आंटी में मुझे मेरी मां नजर आती हैं। वे मुझे बेटे जैसा प्यार देती हैं। आमिर बड़े भाई की तरह मुझे गाइड करते हैं। डांटते हैं और प्यार भी करते हैं।

प्रतीक अंतर्मुखी हैं। वे अपने दिल की बात खुलकर किसी से नहीं कह पाते। वे चुप रहना पसंद करते हैं। सवालों का जवाब वे कम शब्दों में देते हैं और अपनी दुनिया में खोए से रहते हैं। मीडिया से उनके व्यक्तित्व का यह पहलू छुपा नहीं है। प्रतीक कहते हैं, मैं बचपन से ऐसा ही हूं। बहुत कम बोलता हूं। मुझे जानने वाले लोग इस बात से परिचित हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्रतीक की यही बात उनकी विशेषता बन गई है। हिंदी फिल्मकारों को उनके रूप में अपनी कहानी के रोचक किरदार को जीवंत करने वाला एक अनूठा कलाकार मिल गया है। जाने तू या जाने ना का अमित हो या धोबी घाट का मुन्ना, दोनों ही रोचक किरदार थे। गोवा की पृष्ठभूमि पर रची-बसी और मादक द्रव्यों के व्यापार पर आधारित रोहन सिप्पी की फिल्म दम मारो दम में भी प्रतीक ने एक अलग किस्म का किरदार निभाया है। इसमें उनके द्वारा अभिनीत लॉरी का किरदार है तो स्टूडेंट, लेकिन वह अब तक हिंदी फिल्मों में दिखे स्टूडेंट जैसा नहीं है। प्रतीक के अनुसार, फिल्म दम मारो दम में मेरा किरदार अलग किस्म का है। मुझे उम्मीद है, लोग मेरे किरदार को पसंद करेंगे। गौरतलब है कि इस फिल्म में प्रतीक ने अभिषेक बच्चन के अलावा बिपाशा बसु के साथ काम किया है। प्रतीक ने हाल में प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण की शूटिंग पूरी की है। उनके लिए खुशी की बात यह है कि इसमें उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला। अमिताभ बच्चन उनकी मम्मी स्मिता पाटिल के को-स्टार रह चुके हैं और जाने तू या जाने ना देखने के बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि प्रतीक ने उन्हें स्मिता की याद दिला दी। प्रतीक बिग बी के साथ काम करके बेहद खुश हैं। वे कहते हैं, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं गर्व महसूस कर रहा हूं। प्रतीक की गिनती आज हॉट युवा कलाकारों में हो रही है। दम मारो दम और आरक्षण के बाद उनकी अगली फिल्म संजय लीला भंसाली के होम प्रोडक्शन की माई फ्रेंड पिंटो होगी। वे कहते हैं, मैं धीरे-धीरे और सधे कदम बढ़ा रहा हूं।

हर कोई किशोर दा नही हो सकते: जसपिंदर नरूला

हर कोई किशोर दा नही हो सकते: जसपिंदर नरूला



प्यारी सी मुस्कान व आंखों में अनूठी चमक वाली डॉ. जसपिंदर नरूला ने न केवल बॉलीवुड में बल्कि पॉलीवुड की भी कई फिल्मों के गीतों को अपनी आवाज दी है। फिल्मी गीतों के अलावा सूफी कलाम पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। उन्हें संगीत विरासत में मिला है। उनके पिता और माता ने भी संगीत की दुनिया में नाम कमाया। भाई मिक्की नरूला भी संगीत से जुड़े हैं जसपिंदर को दिल्ली विश्वविद्यालय से 2008 में हिन्दुस्तानी शास्त्री संगीत में डॉक्टरेट की डिग्री मिला। प्यार तो होना ही था फिल्म के टाइटिल सॉन्ग से चर्चा में आने ओर इसी गीत के लिए फिल्मफेयर अवार्ड पाने वाली जसपिंदर इन दिनों मास्टर सलीम के साथ एक लोक गीतों वाला एलबम बना रही है। इसके अलावा जल्द ही उनका एक भक्ति एलबम आने वाला है। पॉलीवुड के लिए उन्होंने हाल ही में आई फिल्म एक नूर के अलावा जी आयां नू, यारां नाल बहारां, पिंड दी कुड़ी, मिनी पंजाब आदि फिल्मों में गीत गाए हैं। यही नही, उनके कई पंजाबी एलबम भी आए हैं। नछत्तर गिल के साथ उनका डुएट एलबम के अलावा ओ लाल मेरी पट रखियो, माहिया मैं लोंग गवा आई हां, मुंडा तू ए पंजाबी सोहणा, बिल्लो नी तेरे नखरे ने आदि इनके लोकप्रिय पंजाबी गीत है। हाल ही में जालंधर आई जसपिंदर नरूला से हुई बातचीत के प्रस्तुत है अंश..

पंजाबी फिल्मों के इस दौर में पंजाबी संगीत को आप कहां पाती हैं?

लोकगीतों से हट कर अब पंजाबी फिल्मी गीतों में भी कई मेलोडियस गीतों ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। इससे जाहिर है कि पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में संगीत के बदलाव की बयार बहने लगी है।

अब काफी पंजाबी फिल्में बन रही हैं, लेकिन ज्यादातर विदेशी दूल्हों या विदेश से वतन वापसी के विषय पर ही केंद्रित हैं?

जी हां, पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री तरक्की कर रही है, लेकिन अब भी बजट की कमी के कारण यहां की फिल्में बॉलीवुड का मुकाबला नहीं कर पा रहीं। इन फिल्मों में स्टोरी लाइन एक जैसी होना भी माइनस प्वॉइंट है। यहां के प्रोड्यूसर अभी रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं। साथ ही जनता में भी विदेश का इतना क्रेज है कि फिल्मों का टॉपिक विदेश पर केंद्रित होना जाहिर सी बात है। पंजाबी लोग भी एक्सपेरिमेंट कबूल नहीं करते। हालांकि पंजाबी थीम बॉलीवुड में खूब प्रचलित हो रहे हैं, लेकिन उन में भी पंजाबी परिवारों को वास्तविकता से दूर और ओवर ग्लैमराइज कर के दिखाया जाता है। वे पंजाबी सभ्यता के आइना नहीं हैं।

कई पंजाबी गायक ऐक्टर भी बन गए हैं। इस बारे में आपकी क्या राय है?

मेरा मानना है कि हर कोई किशोर दा (कुमार) नहीं हो सकता। गायक को अपनी गायकी पर ही ध्यान केंद्रित रखना चाहिए, ताकि वह उस काम के साथ न्याय कर सके।

पंजाबी म्यूजिक एलबमों में बढ़ रही अश्लीलता के बारे में क्या कहेंगी?

कई मामलों में पंजाबी संगीत सुनने की नहीं, देखने की चीज होकर रह गया है। इन दिनों कई पंजाबी वीडियो ऐसे आए हैं, जिन्हें परिवार के साथ नहीं देखे जा सकते। मुझे लगता है कि जिस गीत में दम नहीं होता, उसे लोग सुनें, ऐसी कोई बात नहीं होती, उसमें अश्लीलता परोसकर गीत व संगीत से दर्शकों का ध्यान खींचा जाता है।

म्यांमार में नए राष्ट्रपति थीन सीन ने ली शपथ

म्यांमार में नए राष्ट्रपति थीन सीन ने ली शपथ


यंगून। म्यांमार में करीब दो दशक बाद जुंटा सैन्य शासन का अंत हो गया और नए राष्ट्रपति के रूप में थीन सीन ने बुधवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली।

पिछले साल नवंबर में हुए चुनाव में थीन सीन की पार्टी यूनियन सॉलिडेटरी एंड डेवलपमेंट पार्टी की जीत हुई थी। सीन को राजधानी नेपैदा में आयोजित एक समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। उन्होंने जनरल थान श्वे का स्थान लिया, जो 1992 से म्यांमार में सैनिक शासन का नेतृत्व कर रहे थे।

उप राष्ट्रपति तिन आंग मीन्ट वू ने भी शपथ ली। इससे पहले श्वे ने सरकारी टेलीविजन पर अपनी पार्टी स्टेट पीस एंड डेवलपमेंट काउंसिल पार्टी के आधिकारिक रूप से भंग होने की घोषणा की थी।

नई सरकार की कैबिनेट के कई सदस्य पूर्व सैनिक हैं और उनमें से कई पूर्ववर्ती सैन्य सरकार में भी शामिल थे। स्वयं राष्ट्रपति थीन सीन सैनिक सरकार में प्रधानमंत्री थे।

मेजर जनरल हला मिन को नया रक्षा मंत्री बनाया गया है, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल गृह मंत्री बनाए गए हैं। वहीं मेजर जनरल थीन हटे को सीमा संबंधी मामलों का मंत्री बनाया गया है।

नई सरकार के विदेश मंत्री वुन्ना मौंग ल्विन हैं, जबकि सूचना मंत्री क्याव हसन और वित्त मंत्री तिन नैंग थीन हैं। ये सभी पूर्व में सैनिक रह चुके हैं। उल्लेखनीय है कि देश में 1988 से ही सैनिक शासन था। सेना ने तख्ता पलट करते हुए 3 हजार लोकतंत्र समर्थकों की हत्या कर दी थी।

बेहतर माहौल की आस में मोहाली पहुंचे गिलानी

बेहतर माहौल की आस में मोहाली पहुंचे गिलानी



चंडीगढ़। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले विश्व कप क्रिकेट का सेमीफाइनल देखने तथा अपने भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह के साथ बातचीत करने के लिए यहा पहुंचे।

गिलानी अपनी पत्नी फौजिया के साथ पाकिस्तानी वायु सेना के विमान से अपनी पहली भारत यात्रा पर आए हैं। केंद्रीय संचार राज्य मंत्री सचिन पायलट और भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक तथा अन्य ने यहा रक्षा हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की।

पाक प्रधानमंत्री ताज होटल जाएंगे जहा कुछ देर आराम के बाद वह अपनी पत्नी तथा मैच देखने आए अपने मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों के साथ मोहाली स्टेडियम रवाना होंगे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्टेडियम में लगभग एक बजकर 45 मिनट पर पाकिस्तानी नेता की अगवानी करेंगे। इसके बाद दोनों नेता मैच शुरू होने से पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों से रूबरू होंगे।

मैच देखने के दौरान बीच में दोनों नेता आपस में बातचीत करेंगे और इसके बाद शाम लगभग साढ़े सात बजे रात्रिभोज करेंगे।

पिछले हफ्ते यह स्पष्ट होने के बाद कि सेमीफाइनल में भारत-पाकिस्तान की टीमें भिड़ेंगी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क्रिकेट और कूटनीति को मिलाते हुए मैच देखने तथा बातचीत के दौर के लिए गिलानी को आमंत्रित किया था।

इससे पहले, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता की बहाली पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि वह और उनके समकक्ष मनमोहन सिंह क्षेत्र में शाति एवं समृद्धि के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं।

मोहाली रवाना होने से पहले गिलानी ने कहा कि जहा तक हमारे संबंधों की बात है तो दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल होने से मैं बहुत खुश हूं। दोनों के बीच गृह सचिव स्तर की बातचीत साकारात्मक माहौल में हुई। मैं इसकी सराहना करता हूं। गिलानी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट विश्व कप का सेमीफाइनल मुकाबला देखने के लिए सिंह के आमंत्रण पर मोहाली पहुंचे हैं। मार्च, 2008 में प्रधानमंत्री बनने के बाद गिलानी का यह पहला भारत दौरा है। उन्होंने कहा कि वह [सिंह] इस क्षेत्र में शाति और समृद्धि के लिए काम करना चाहते हैं। हम दोनों इसे लेकर प्रतिबद्ध हैं। हम माहौल में सुधार करना चाहते हैं ताकि अपने लोगों की सेवा कर सकें।

रावलपिंडी स्थित वायुसेना के ठिकाने से भारत रवाना होने से पहले गिलानी ने संवाददाताओं से कहा कि मैंने भारतीय प्रधानमंत्री को कभी भी नकारात्मक होते नहीं देखा। मैंने उन्हें हमेशा सकारात्मक पाया है।

गिलानी ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच रिश्तों में कुछ तरक्की और सुधार होगा। मेरे दौरे से पाकिस्तानी टीम का हौसला भी बढ़ेगा। यह पूछे जाने पर कि वह दोनों देशों के बीच क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने के बारे में प्रधानमंत्री सिंह से आग्रह करेंगे तो गिलानी ने कहा कि बेशक, जब हम भारत जा रहे हैं तो हम वहा मौके के मुताबिक बात करेंगे। एक पत्रकार ने गिलानी से पूछा कि वह सिंह को गुगली डालेंगे तो उन्होंने कहा, 'मैं क्रिकेट मैच देखने जा रहा हूं। अभी से कुछ उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।'

न्यौते के लिए प्रधानमंत्री सिंह का शुक्रिया करते हुए उन्होंने कहा कि वह भारत एवं पाकिस्तान की टीमों के साथ एकजुटता दिखाने और क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए मोहाली जा रहे हैं। सिंह की ओर से गिलानी के लिए रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया है। गिलानी ने कहा कि उन्होंने अपनी टीम के कप्तान शाहिद आफरीदी से फोन पर बात की और उन्हें देश की ओर से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, 'मैं दोनों देशों के लोगों से कहना चाहूंगा कि खेल का लुत्फ उठाएं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करें।'

यह पूछे जाने पर कि वह सिंह से भारतीय टीम को पाकिस्तान भेजने का आग्रह करेंगे तो उन्होंने कहा कि हम इन दिनों कठिन दौरे से गुजर रहे हैं और हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी लड़ रहे हैं। हम अच्छा माहौल तैयार कर लेंगे तो भारत से जरूर आग्रह करेंगे।

गिलानी एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी शुजात हुसैन, रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार, गृह मंत्री रहमान मलिक और सूचना मंत्री फिरदौस आशिक अवान भी भारत पहुंचे हैं।

इससे पहले, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि गिलानी और उनके भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह मोहाली में दोनों टीमों के बीच सेमीफाइनल मुकाबला देखने के अलावा परस्पर हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। विदेश विभाग की प्रवक्ता तहमीना जानुजा ने मंगलवार शाम कहा कि क्रिकेट मैच से अलग दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच परस्पर हितों से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

तहमीना ने कहा कि मोहाली में गिलानी की मौजूदगी क्रिकेट के प्रति पाकिस्तानी जनता के उत्साह को दर्शाती है। यह भारत और पाकिस्तान से बीच वार्ता की बहाली से भी जुड़ा है। दोनों प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण मैच को साथ बैठकर देखेंगे।

सोमवार, 28 मार्च 2011

भरोसा सलमान का

भरोसा सलमान का



जरीन खान को लोग नहीं भूले होंगे..। वही जरीन, जो सलमान खान के साथ फिल्म वीर में थीं और चर्चा हुई थी कि वे कट्रीना कैफ जैसी हैं। दरअसल, जरीन से जुड़ी नई खबर यह है वे जल्द ही सलमान खान के साथ एक और फिल्म में नजर आएंगी। रोचक बात यह है कि इस बार वे सलमान की हीरोइन बनकर नहीं, बल्कि उनके साथ एक आइटम डांस करेंगी। सलमान संग जरीन का आइटम डांस होगा जल्द रिलीज होने वाली फिल्म रेडी में।

आने वाली फिल्म रेडी में सलमान की नायिका हैं असिन। जरीन जानकारी देती हैं, कुछ दिनों पहले ही बैंकॉक से लौटी हूं। वहां के एक क्लब में तीन दिनों तक रेडी के आइटम डांस की शूटिंग की। मेरे साथ सलमान भी थे। बेहद मजा आया। अपने पहले आइटम डांस पर लोगों के रिएक्शन का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं। गौरतलब है कि रेडी में पहली बार दर्शक जरीन का ग्लैमरस लुक देखेंगे। वे कहती हैं, फिल्म वीर में मेरा लुक ट्रेडिशनल था। मैं सिर से पांव तक कपड़ों में ढंकी हुई थी। रेडी में मैं बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आऊंगी। रेडी में बेहद ग्लैमरस लुक है मेरा।

जरीन आगे बताती हैं कि रेडी में आइटम डांस के प्रस्ताव को स्वीकार करने की सबसे बड़ी वजह सलमान खान थे। वे कहती हैं, मैं सलमान को कभी मना नहीं कर सकती। जब उन्होंने मुझसे रेडी में एक आइटम डांस और मेहमान भूमिका करने की बात की, तो मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। सलमान खान से प्रभावित जरीन आगे कहती हैं, मुझे पता है कि सलमान हमेशा मुझे सही सलाह देंगे। जब भी मैं कंफ्यूज होती हूं या कोई निर्णय नहीं लेने की स्थिति में होती हूं, तो सलमान से ही बात करती हूं।

गौरतलब है कि धूम-धड़ाके के साथ जरीन का हिंदी फिल्मों में स्वागत हुआ था, लेकिन फिल्म वीर के असफल होने के साथ ही उनके सितारे गर्दिश में समा गए। हालांकि करियर के शुरुआती दौर में ही मिली असफलता से वे निराश नहीं हैं। धैर्य का दामन उन्होंने थाम रखा है। जरीन कहती हैं, मेरे पास फिल्मों के ऑफर तो बहुत से आए, पर जल्दबाजी में मैं कोई गलत निर्णय नहीं लेना चाहती थी। मैं कोई ऐसी फिल्म नहीं करना चाहती, जिसे करने का बाद अफसोस हो। पार्टनर 2 में अभिनय की खबरों पर अपनी सफाई देते हुए जरीन कहती हैं, सलमान खान ने मुझसे कहा था कि जब भी वे पार्टनर 2 बनाएंगे, मुझे उसमें जरूर कास्ट करेंगे, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं है, क्योंकि स्क्रिप्ट अभी रेडी नहीं है। जरीन यह बताना नहीं भूलतीं कि वे जल्द ही दो फिल्में साइन करने वाली हैं। वे अभी उन फिल्मों के नाम नहीं बताना चाहतीं।

मैच से पहले रिश्तों पर बात करेंगे मनमोहन-गिलानी!

मैच से पहले रिश्तों पर बात करेंगे मनमोहन-गिलानी!


नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। मोहाली के मैदान पर विश्वकप सेमीफाइनल में भारत और पाकिस्तान मुकाबले से पहले के दोनों देशों के प्रधानमंत्री 'अनौपचारिक मुलाकात' की मेज पर मिल सकते हैं। दोनों देशों के कूटनीतिक खेमों की कोशिशें जारी हैं कि मैच से पहले दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का दौर पूरा हो जाए।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक 30 मार्च को होने वाले दिन-रात्रि मुकाबले से पहले इस बात की प्रबल संभावना है कि दोपहर की दावत पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाक पीएम यूसुफ रजा गिलानी मिलें। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच होने वाली बातचीत के लिए यूं तो कोई एजेंडा तय नहीं है। लेकिन भारत-पाक संबंधों की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए जारी कोशिश में इस मुलाकात से उम्मीदें काफी हैं।

दोनों मुल्कों के बीच 26/11 के बाद से थमी बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की कड़ी में सोमवार को गृह सचिव स्तर की दो दिवसीय वार्ता शुरू हुई। पहले दिन की बातचीत के बाद दोनों खेमों ने बातचीत को सकारात्मक बताया। सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से बैठक में नकली नोट और नारकोटिक्स का मामला उठाया गया।

करीब एक साल बाद हो रही दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात का खाका तैयार करने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक का दौर जारी है। सूत्र बताते हैं कि दोनों नेताओं की भेंट चंडीगढ़ के राजभवन में भी संभव है। हालांकि अभी तक शिखर स्तर मुलाकात के लिए स्थान का चुनाव पूरा नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि 30 मार्च की सुबह भारत पहुंच रहे प्रधानमंत्री गिलानी के साथ पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री फिरदौस आशिक अवान, विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खान और विदेश सचिव सलमान बशीर भी पहुंचेंगे।

पाक मीडिया के मुताबिक भारत दौरे से पहले प्रधानमंत्री गिलानी ने सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर मोहाली यात्रा से पहले अपनी सरकार को भरोसे में लिया। इससे पहले गिलानी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ मुलाकात के बाद ही भारतीय प्रधानमंत्री के न्योते को स्वीकार किया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 25 मार्च को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को अपने साथ मोहाली में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वकप सेमी फाइनल मुकाबला देखने का आमंत्रण दिया था।

भारत-पाक गृह सचिव स्तरीय वार्ता शुरू

भारत-पाक गृह सचिव स्तरीय वार्ता शुरू



नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच गृह सचिव स्तरीय बैठक सोमवार को यहां शुरू हो गई। वार्ता में आतंकवाद से निपटने, मुंबई हमले के संदिग्धों पर मुकदमा चलाने, वीजा नियमों, मादक पदार्थो की तस्करी और जाली नोटों की समस्या जैसे पेचीदा मुद्दों की समीक्षा हो सकती है।

इस बैठक में भारतीय शिष्टमंडल की अगुवाई गृहसचिव जी के पिल्लै और पाकिस्तानी शिष्टमंडल की अगुवाई वहां के गृह सचिव चौधरी कमर जमां कर रहे है। भारतीय शिष्टमंडल में आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव यू के बंसल और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रमुख एस सी चीमा भी शामिल है। बातचीत एक होटल में हो रही है और इसके शाम पांच बजे तक चलने की संभावना है।

दो दिवसीय गृहसचिव स्तरीय वार्ता में भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक भी दिखाई दिए। 2008 के मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों में पहली बार गृह सचिव स्तरीय बातचीत हो रही है। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष मछुआरों का मसला भी उठा सकते है।

ज्ञात हो कि 2008 में 10 पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा मुंबई पर किए गए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ समग्र बातचीत स्थगित कर दी थी।

शनिवार, 26 मार्च 2011

मोनिका: मौजूं विषय पर ईमानदार कोशिश

मोनिका: मौजूं विषय पर ईमानदार कोशिश



ुख्य कलाकार : दिव्या दत्ता, आशुतोष राणा, रजित कपूर, यशपाल शर्मा आदि।

निर्देशक : सुषेन भटनागर

तकनीकी टीम : निर्माता- कुश भार्गव, लेखक- सुषेन भटनागर,

इस फिल्म की कथाभूमि लखनऊ है। मोनिका और चंद्रकांत पंडित हमें भोपाल, पटना, देहरादून और जयपुर में भी मिल सकते हैं। हर प्रदेश में मोनिका और चंद्रकांत पंडित की कहानियां हैं। किसी प्रदेश में मोनिका का नाम मनीष भी हो सकता है। तात्पर्य यह कि लेखक-निर्देशक सुषेन भटनागर ने एक मौजूं विषय पर फिल्म बनाई है। पत्रकार की महत्वाकांक्षा और राजनीतिज्ञों द्वारा उनके इस्तेमाल की कहानियों में अक्सर राजनीतिज्ञों का खलनायक की तरह चित्रित किया जाता है। मोनिका को ही गौर से देखें तो मोनिका की मनोग्रंथि और महत्वाकांक्षा ही उसे राजनीतिक शिकंजे में ले जाती है और इस्तेमाल होने के लिए तैयार करती है। हमें इस कड़वे सच केदूसरे पक्ष को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मध्यवर्गीय परिवार की मोनिका की महत्वाकांक्षाएं परिवार और लखनऊ जैसे शहर से बड़ी हो जाती हैं। उसकी इस कमजोरी को स्वार्थी राजनीतिज्ञ, संपादक और बिजनेस घराने के लोग ताड़ जाते हैं। वे उसकी मेधा का दुरूपयोग करते हैं। मोनिका एक-दो दफा अपनी सामान्य जिंदगी में लौटना भी चाहती है, लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी है कि उसका असहाय पति भी उसकी मदद नहीं कर पाता। सुषेन भटनागर ने सरल तरीके से राजनीति, मीडिया और इंडस्ट्री के काले व्यूह को उजागर करने की कोशिश की है। उनकी यह सरलता ही फिल्म को सामान्य बना देती है और एक मजबूत संभावना को कमजोर कर देती है। उन्होंने मोनिका के लिए जो नैरेटिव चुना है, वह इस कहानी का उलझाता है। कोर्ट रूम को मंच बना कर फ्लैश बैक में लाया गया वृतांत फिल्म की गति में स्पीड ब्रेकर का काम करता है।

सुषेन भटनागर की शिल्पगत कमियों के बावजूद कथ्य और अभिनय के लिहाज से यह फिल्म उल्लेखनीय है। मोनिका सीमित संसाधनों में उनकी एक ईमानदार कोशिश है। प्रोडक्शन की कमियों को सुषेन भटनागर ने आशुतोष राणा और दिव्या दत्ता के अभिनय से पूरा किया है। दोनों के दमदार अभिनय में नाटकीयता दिख सकती है,लेकिन यह भी एक शैली है। हिंदी के पारंपरिक सिनेमा में दर्शक ऐसे अभिनय के आदी रहे हैं। आशुतोष राणा ने चंद्रकांत पंडित के छद्म और छल को अच्छी तरह आत्मसात किया है। दिव्या दत्ता मोनिका के द्वंद्व और दुविधा को बढ़ी सीमा तक व्यक्त करती है। अपने एकाकी दृश्यों में वह अतिरिक्त मेहनत करती हैं, जो कई बार ज्यादा और अनुचित लगता है। सहयोगी कलाकारों में मोनिका के पति राज की भूमिका रजित कपूर नहीं जंचे हैं। शेष कलाकारों की संजीदगी फिल्म को मजबूत करती है। अंत में फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दृश्यों के प्रभाव को नहीं बढ़ा पाता। फिल्म का यह एक कमजोर पक्ष है।

मेरी मुट्ठी में क्या है

मेरी मुट्ठी में क्या है



अमृता राव को ब्वॉयफ्रेंड मिल गया.., अमृता जल्द ही शादी करेंगी। अमृता ने हॉलीवुड की फिल्म साइन की है..। पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में आई इन खबरों को अगर अमृता राव के प्रशंसक गंभीरता से ले रहे हैं, तो वे अपनी चहेती हीरोइन के इस संदेश पर गौर करें, अगर आपने मेरी शादी, मेरे अफेयर या हॉलीवुड फिल्में करने से जुड़ी कोई भी खबर पढ़ी या देखी है, तो उस पर भरोसा बिल्कुल न करें। आप मेरे बारे में काफी कुछ पढ़ते रहेंगे, पर जब तक मेरी अपनी बात साथ मेरा खुद का इंटरव्यू न पढ़ लें, तब तक इन बातों पर यकीन नहीं करें। अगर मैं किसी के साथ डेट करूंगी या शादी करने की योजना बनाऊंगी या फिर कोई हॉलीवुड की फिल्म साइन करूंगी, तो अपने फैंस को जरूर बताऊंगी..।

अमृता राव मानती हैं कि शादी करना जीवन का बड़ा निर्णय है, जो सोच-समझकर किया जाना चाहिए। वे कहती हैं, अगले पांच सालों में मेरे जीवन में क्या होगा, यह मुझे पता नहीं है। इतना पता है कि शादी अगले पांच सालों में मेरी लाइफ का बड़ा फैक्टर होगा। शादी के बाद लाइफ में बदलाव आते हैं। आपके रहने की जगह बदल जाती है, प्रोफेशन में भी बदलाव आता है। ..तो क्या शादी के बाद अमृता एक्टिंग करना छोड़ देंगी? वे जवाब देती हैं, अगर मेरा जीवनसाथी मुझे सपोर्ट करेगा, तो मैं शादी के बाद भी एक्टिंग करना चाहूंगी, लेकिन फिलहाल इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकती।

पिछले कुछ समय से अमृता के ठहरे हुए करियर को लेकर लोगों द्वारा लगातार चिंता व्यक्त की जाती रही है। जहां तक बात अमृता की है, तो वे खुद को करियर के इस खराब दौर का जिम्मेदार नहीं मानतीं। वे बताती हैं, मेरा कोई दोष नहीं है। सबको आर्थिक मंदी से नुकसान हुआ है। यह सिर्फ इंडस्ट्री के लोगों को पता है कि इन दिनों बेहद कम फिल्में बन रही हैं। कम फिल्में बनने का खामियाजा मुझे भी भुगतना पड़ा है। मेरी दो फिल्में जो सेट पर जाने वाली थीं, वे नहीं बन पाई, जिनमें एक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म द लेजेंड ऑफ कुणाल थी। एबी कॉर्प की इस फिल्म में मुझे अमिताभ बच्चन, तब्बू और अर्जुन रामपाल के साथ अभिनय करने का मौका मिल रहा था। दूसरी फिल्म केन घोष की थी। खैर, अब मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है। राजश्री फिल्म्स के पास दोबारा लौट कर ऐसा लग रहा है कि घर में वापस आ गई हूं। गौर करने वाली बात यह है कि राजश्री फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म लव यू मिस्टर कलाकार में अमृता केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं। जल्दी ही रिलीज होने वाली इस फिल्म में उनके नायक तुषार कपूर हैं।

अमृता का मानना है कि वक्त के साथ उनके व्यक्तित्व और काम करने के तरीके में बदलाव आया है। इस बदलाव को वे सकारात्मक मानती हैं। अमृता कहती हैं, पिछले सात सालों के करियर में मुझमें काफी बदलाव आया है। मेरी पर्सनैल्टी भी बदल गई है। मैं मैच्योर हो गई हूं। मेरा काम करने का तरीका भी बदल गया है। मानती हूं कि मेरा एक्सपीरिएंस ही मेरे लिए सबसे बड़ा प्लस प्वॉइंट है। मैंने बहुत कम उम्र में एक्टिंग की शुरुआत की थी, जिस कारण मुझे नए-नए अनुभव हासिल करने का अवसर मिला। अमृता को खुद पर और अपनी पहचान पर नाज है। वे पूरे यकीन के साथ कहती हैं, मेरा कोई गॉडफादर नहीं है। न ही इंडस्ट्री में कोई ऐसा है, जो मुझे सपोर्ट करे। मैं आज जहां हूं अपने दम पर हूं। मैं कभी किसी के पास काम मांगने नहीं गई। काम मेरे पास आया। ए-ग्रेड की फिल्मों के ऑफर मेरे दरवाजे तक आए। अच्छे निर्माता-निर्देशकों के साथ मैंने काम किया है। कोई समझौता नहीं किया। फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं होने के बाद भी जितना मैंने अचीव किया है, उससे खुश हूं।

अमृता तब दुखी हो जाती हैं, जब उनसे यह पूछा जाता है कि उन्होंने अपनी छवि बदलने की कोशिश क्यों की? वे कहती हैं, मुझे समझ में नहीं आता कि लोग ऐसा क्यों कहते हैं कि मैंने इमेज चेंज की कोशिश की थी। अरे जैसे कपड़े मैंने शार्टकट में पहने थे, वैसे कपड़े मैंने अपनी पहली फिल्म अब के बरस और दीवार में भी पहने हैं। मैंने कभी इमेज चेंज करने की कोई कोशिश नहीं की। मैं सेक्सी शुरू से हूं। मुझे दर्शकों का जितना प्यार मिला है, वह बहुत कम लोगों को नसीब होता है। मैं भला उसे क्यों गंवाना चाहूंगी?

अब अरुण जेटली भी आए विकिलीक्स की चपेट में

अब अरुण जेटली भी आए विकिलीक्स की चपेट में



नई दिल्ली। लगता है विकिलीक्स का भूत किसी को छोड़ने वाला नहीं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली भी अब इसकी चपेट में आ गए हैं। नए खुलासे के मुताबिक भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा है कि हिंदू राष्ट्रवाद उनकी पार्टी के लिए महज अवसरवादी मुद्दा है।

विकिलीक्स पर काग्रेस को घेरने वाली भाजपा अब खुद उसमें घिरती जा रही है। इसके नए खुलासे के अनुसार दिल्ली स्थित अमेरिकी राजनयिक ने अपने देश के विदेश विभाग को भेजे संदेश में कहा था कि भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा है कि हिंदू राष्ट्रवाद उनकी पार्टी के लिए महज अवसरवादी मुद्दा है।

राजनयिक के मुताबिक हिंदुत्व के सवाल पर बातचीत के दौरान जेटली ने तर्क दिया कि हिंदू राष्ट्रवाद भाजपा के लिए हमेशा महज़ चर्चा का बिंदू रहेगा। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के राजनयिक राबर्ट ब्लेक ने जेटली से मुलाकात के बाद अपनी सरकार को 6 मई 2005 को भेजे एक संदेश में यह बात कही थी।

उधर जेटली ने दावा किया है कि उन्होंने अवसरवादी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। विकिलीक्स के ताज़ा खुलासे पर काग्रेस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा है कि जो लोग शीशे के मकान में रहते हों उन्हें दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।

ब्लेक ने अपने संदेश में कहा था, मिसाल के तौर पर भारत के पूर्वोत्तर में हिंदुत्व का मुद्दा खूब चलता है, क्योंकि वहा बाग्लादेश से आकर बसने वालों मुसलमानों के लेकर स्थानीय आबादी में काफी चिंता है। उनके अनुसार भारत-पाक रिश्तों में हाल में आए सुधार के मद्देनजर जेटली कहा कि हिंदू राष्ट्रवाद अब कम असरदार हो गया है। लेकिन सीमा पार से एक और आतंकी हमला होने पर हालात फिर पलट सकते हैं।

जेटली ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने अवसरवादी शब्द का प्रयोग नहीं किया था, या शब्द राजनयिक ने अपनी तरफ से जोड़ा होगा।

भाजपा नेता ने कहा कि 2005 में उनकी उस राजनयिक से बातचीत हुई थी जिसमें उन्होंने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद, बाग्लादेश से अवैध घुसपैठ और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका द्वारा वीजा नहीं दिए जाने के मुद्दों पर अपने विचार रखे थे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद या हिंदू राष्ट्रवाद के संदर्भ में अवसरवाद शब्द का उल्लेख न तो मेरा विचार है और न ही मेरी भाषा। यह राजनयिक की ओर से खुद प्रयोग किया गया शब्द है।

विकिलीक्स खुलासे पर भाजपा द्वारा घेरी जा चुकी काग्रेस ने अब पलटवार की मुद्रा अपनाई है। उसके प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सारा भाडा फूट रहा है। खुद के तरकश से ही लहु लुहान हो रही है भाजपा। इसीलिए कहते हैं कि जो लोग शीशे के मकान में रहते हैं, उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।

खुलासे के अनुसार जेटली ने मोदी को अमेरिका द्वारा वीजा नहीं दिए जाने को अनुचित बताया और कहा कि उनकी पार्टी के लोग इसे अपने नेता पर व्यक्तिगत प्रहार के रूप में ले रहे हैं। जेटली हालाकि, ब्लेक की इस बात से सहमत हुए कि मोदी ध्रुवीकरण व्यक्तित्व वाले हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका को मोदी को अपने यहा आने देना चाहिए भले ही उसे लेकर कुछ प्रदर्शन क्यों न हों।

फर्जी उड़ान लाइसेंस घोटाले में चार और धरे गए

फर्जी उड़ान लाइसेंस घोटाले में चार और धरे गए



नई दिल्ली। फर्जी उड़ान लाइसेंस घोटाला मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसके तहत शनिवार को डीजीसीए के एक अधिकारी समेत चार लोग गिरफ्तार किया गया है।

इस गिरफ्तारी के साथ दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि उसने पायलटों को फर्जी मार्कशीट के आधार पर लाइसेंस प्राप्त करने के रैकेट की कमर तोड़ दी है।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में इन गिरफ्तारियों के साथ ही तीन पायलट समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

तीन पायलट और इस गिरोह से जुड़ा एक अन्य व्यक्ति अब भी फरार चल रहा है जबकि एक अन्य पायलट जाच में शामिल हो गया।

पुलिस उपायुक्त अपराध अशोक चंाद ने यहा संवाददाताओं से कहा कि हमने इस गिरोह की कमर तोड़ दी है। हम तीन पायलट और इस गिरोह से जुड़े एक अन्य व्यक्ति को ढूढ़ रहे हैं। यह व्यक्ति मुंबई में फ्लाइंग प्रशिक्षक है। ये सभी फरार हैं।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने डीजीसीए अधिकारी प्रदीप कुमार, पायलट प्रदीप त्यागी और दो दलालों को गिरफ्तार किया है। उनमें से एक की पहचान ललित के जैन के तौर पर की गई है।

इन चार लोगों की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फर्जी रिकार्ड और दस्तावेज जमाकर वाणिज्यिक लाइसेंस हासिल करने वाले पायलटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए डीजीसीए ने हाल में 14 पायलटों को उड़ान भरने से रोक दिया था।

एक व्यक्ति तभी वाणिज्यिक विमान को उड़ाने की योग्यता हासिल करता है जब वह वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस [सीपीएल] प्राप्त करता है। एक व्यक्ति जब प्रशिक्षण के दौरान 200 घटे की उड़ान पूरा करता है तभी उसे सीपीएल दिया जाता है।

14 पायलट जिनका लाइसेंस वापस लिया गया है उन्होंने कथित तौर पर अनिवार्य घटे तक उड़ान भरने की शर्त को पूरा नहीं किया था और राजस्थान के एक उड़ान प्रशिक्षण संस्थान से कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र हासिल किया था।

डीजीसीए प्रमुख ई के भारत भूषण ने हाल में कहा था कि करीब 10 हजार पायलटों का सीपीएल जाच के घेरे में है। इसके अलावा करीब 4000 एयरलाइंस पायलट ट्रेनिंग लाइसेंस [एटीपीएल] रखने वाले लोग भी जाच के दायरे में हैं।

भूषण ने यह भी कहा था कि डीजीसीए लाइसेंस हासिल करने में जालसाजी के मामलों को देखते हुए देश के सभी 40 उड़ान स्कूलों की तीसरे पक्ष से ऑडिट कराएगा। उड़ान प्रशिक्षण स्कूलों की मदद से कुछ पायलटों के फर्जी अंकपत्र या अवैध साधनों के जरिए लाइसेंस हासिल करने को गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार ने इसके प्रति कोई नरमी नहीं दिखाने का संकल्प जताया है।

गुरुवार, 24 मार्च 2011

आइटम के दम पर

आइटम के दम पर




यह सच है कि मुन्नी और शीला के क्रेज ने फिल्मों में आइटम गीतों की मांग बढ़ा दी है। निस्संदेह दबंग के हिट होने में मलाइका अरोड़ा और सलमान खान पर फिल्माए गीत मुन्नी बदनाम.. का बड़ा योगदान रहा। इस एक गीत की पॉपुलैरिटी ने दबंग के दर्शक तैयार किए। फराह खान की तीस मार खान ने रिलीज के पहले शीला की जवानी.. से ऐसा समां बांधा कि दर्शकों ने वीकएंड की एडवांस बुकिंग करवा ली। हालांकि तीस मार खान को दबंग जैसे दर्शक नहीं मिले, लेकिन जो भी दर्शक मिले, वे इसी गीत की वजह से मिले। फिल्म देखकर निकलते दर्शकों की जुबान पर एक ही बात थी कि फिल्म में शीला.. के अलावा कुछ था ही नहीं। दोनों फिल्मों की कामयाबी से हिंदी फिल्मों में आइटम गीतों की मांग सुनिश्चित हुई। यही वजह है कि दम मारो दम, रेडी और रा वन के आइटम गीतों की चर्चा की जा रही है। कहा जा रहा है कि अभी कुछ समय तक आइटम गीतों का जोर रहेगा।

हिंदी फिल्मों में आइटम गीतों का होना कोई नई बात नहीं है। पहले इन गीतों का फिल्म की कहानी से तालमेल बिठाया जाता था। राज कपूर और गुरुदत्त ने अपनी फिल्मों में ऐसे गीतों को फिल्म का हिस्सा बना कर पेश किया। फिर एक दौर ऐसा आया, जब हर फिल्म में हेलन एक फड़कता आइटम गीत पेश करती थीं। उनके साथ और बाद में ऐसी डांसरों को काफी काम मिला। मुमताज, जीनत अमान और परवीन बॉबी के दौर में हीरोइनें खुद ही आइटम गीत करने लगीं। उनकी प्रस्तुति बदली और हीरोइनों का अंदाज बदला। माधुरी दीक्षित ने तेजाब में एक दो तीन.. और बेटा में दिल धक धक करने लगा.. उसी परंपरा में गाया। थोड़ा पलटकर देखें, तो चाइना गेट के छम्मा छम्मा.. और दिल से के चल छैंयां-छैंयां.. गीत से आज के आइटम गीत की धमाकेदार शुरुआत होती है।

आइटम गीत वास्तव में एक ऐसा गीत है, जिसमें कोई अदाकारा भड़कीले या कम कपडे़े पहनकर मादक अंदाज में स्क्रीन पर आती है। उसके भाव और गीत का फिल्म से सीधा ताल्लुक नहीं होता। फिल्म की कहानी में किसी सपनीली परी जैसा उसका अवतरण होता है। अपने गीत के बाद वह फिर से गायब हो जाती है। ऐसे गीतों के बोलों में सेक्सुअल सबटेक्स्ट रहता है। निर्माता फिल्म के प्रचार में इसका जबरदस्त उपयोग करता है। कहा जाता है कि यौन दमित समाज में आइटम गीत कुंठित दर्शकों की यौन उत्कंठा बढ़ाते हैं और उन्हें सिनेमाघरों में खींच लाते हैं। मुझे याद है कि मेरे कस्बे में रिक्शे पर सिनेमा प्रचार करने वाला खुलेआम घोषणा करता था कि इस फिल्म में हेलन का डांस दो बार दिखाया जाएगा। यकीन करें, हेलन का डांस दो बार देखने के लालच में उस फिल्म के दर्शक बढ़ जाते थे। आज भी आइटम गीत दर्शक बढ़ाते हैं। कस्बों से लकर मेट्रो के सिनेमाघरों तक में इसका असर देखा जा सकता है।

दम मारो दम में दीपिका पादुकोण का अंदाज किसी मायने में आइटम गीत के डांसरों से कम नहीं है। सुना है कि मल्लिका सहरावत रेडी में आइटम गीत पेश करेंगी। चलो दिल्ली में याना गुप्ता फिर से जलवा बिखेरेंगी, तो भिंडी बाजार में कटरीना लोपेज तान के सीना हो जा कमीना.. गाती नजर आएंगी। मुन्नी और शीला के बाद आइटम गीतों का बहाव रुक ही नहीं रहा है। कॉमर्शियल फिल्मों के निर्देशकों को यह कामयाबी का आसान तरीका लग रहा है, जबकि सच्चाई के उदाहरण भी मुन्नी और शीला से लिए जा सकते हैं। अगर फिल्म की कहानी बेदम होगी, तो सिर्फ आइटम सांग के दम पर बड़ी कामयाबी नहीं हासिल की जा सकती।

हॉलीवुड की हसीन नायिका एलिजाबेथ का निधन

हॉलीवुड की हसीन नायिका एलिजाबेथ का निधन



लॉस एंजिलिस। अपनी मादक खूबसूरती, अत्याधुनिक रफ्तार भरी जीवन शैली और बिंदास बातों के लिए मशहूर हॉलीवुड के इतिहास की सबसे आकर्षक अभिनेत्री लिज टेलर का बुधवार को हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वह 79 वर्ष की थीं।

अस्वस्थ होने के कारण वह पिछले दो महीनों से लॉस एंजिलिस के सीडार्स-सिनाई अस्पताल में भर्ती थीं। जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तब उनके चारों बच्चे उनके पास थे। उनके दस नाती-पोते और चार पड़-नाती, पड़-पोते भी हैं।

उनकी प्रवक्ता सैली मॉरीसन के हवाले से सीएनएन ऑनलाइन ने कहा कि लिज गंभीर रूप से बीमार थीं, फिर भी उन्हें विश्वास था कि वह स्वस्थ हो कर घर लौट जाएंगी।

हॉलीवुड में उनकी शोहरत की मिसालें दी जाती है। माना जाता है कि नीली आंखों वाली लिज ने जितनी शोहरत अपने जीवन काल में पाई, वह किसी शख्स को आज तक हासिल नहीं हुई। उनकी खूबसूरती, उनका अभिनय और उनकी निजी जिंदगी हमेशा चर्चा का विषय रही। पूरी दुनिया में उन्हें चाहने वाले मौजूद हैं।

अपनी आठ शादियों के अतिरिक्त पॉप संगीत के दिवंगत बादशाह माइकल जैक्सन के साथ उनकी मित्रता ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। उनकी बिंदास जीवन शैली ने अगर असंख्य दिल जीते, तो जाने कितने दिल तोड़े भी। अभिनेता रिचर्ड बर्टन के साथ उनके प्रेम और विवाह ने खूब चर्चा पाई। बर्टन से लिज ने दो बार शादी की और दो बार तलाक लिया।

हॉलीवुड की फिल्म और टेबुलायड पत्रकारिता को ग्लैमरस बनाने में उनके जीवन से पांचवें और छठे दशक में जुड़े स्कैंडलों का का बड़ा योगदान रहा। एलिजाबेथ टेलर का निधन हॉलीवुड सिनेमा के एक युग का अंत है।

एलिजाबेथ टेलर:-

[27 फरवरी 1931-23 मार्च, 2011]

पूरा नाम:-डेम एलिजाबेथ रोजमंड टेलर। वह लिज टेलर के नाम से लोकप्रिय हुई।

बाल कलाकार:-लिज की मां रंगमंच की अभिनेत्री थीं। लिज ने बाल कलाकार के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखा। मात्र नौ साल की उम्र में पहली फिल्म 'देयर इज वन बॉर्न एवरी मिनट' की। निर्माता कंपनी, यूनिवर्सल पिक्चर्स ने उनका आगे का अनुबंध रद कर दिया और कहा कि नन्हीं लिज को न नाच आता है, न गाना और न अभिनय।

पहली सफलता:-फिल्म नायिका के रूप में उन्हें पहली सफलता 'अ प्लेस इन द सन' [1951] में मिली। उस वक्त उनकी उम्र 21 वर्ष थी।

ऑस्कर:-लिज को तीन ऑस्कर अवार्ड मिले। बटरफील्ड 8 [1960] और हू इज अफ्रेड ऑफ वर्जीनिया वूल्फ [1966] फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए। उन्हें तीसरा ऑस्कर मानवता की सेवा के कार्यो के लिए 1993 में दिया गया।

प्रमुख फिल्में:-पांचवे दशक में वह हॉलीवुड की सबसे बड़ी शख्सीयत के रूप में उभरीं। उनकी प्रमुख फिल्में हैं-फादर ऑफ द ब्राइड, अ प्लेस इन द सन, बटरफील्ड 8, रेन ट्री कंट्री, हू इज अफ्रेड ऑफ वर्जीनिया वूल्फ, कैट ऑन द हॉट रूफ टिन, सडनली लास्ट समर, द अपार्टमेंट, क्लियोपेट्रा।

सबसे पहले 10 लाख:-एलिजाबेथ टेलर हॉलीवुड की पहली अभिनेत्री थीं, जिन्होंने फिल्म के लिए 10 लाख डॉलर की फीस प्राप्त की। 1960 में उन्होंने ट्वेंटिएथ सेंचुरी फॉक्स कंपनी से फिल्म क्लियोपेट्रा के लिए यह रकम ली। फिल्म तीन साल में बनकर पूरी हुई। करीब साढ़ चार करोड़ डॉलर में अपनी अपने समय की यह सबसे महंगी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही।

शादियां और संतानें:- एलिजाबेथ टेलर की ख्याति आठ शादियों के लिए भी है। उनके सात पति थे। अभिनेता रिचर्ड बर्टन से उन्होंने दो बार शादी की। उनके दो बेटे और दो बेटियां हुई।

मुअम्मर गद्दाफी ने दी फिर ललकार, हमले बरकरार

मुअम्मर गद्दाफी ने दी फिर ललकार, हमले बरकरार



त्रिपोली। हमला करने वाली पश्चिमी ताकतें इतिहास के गर्त में समा जाएंगी। यह ललकार कई दिनों बाद अपने समर्थकों से रूबरू हुए लीबियाई शासक मुअम्मर गद्दाफी की थी। पश्चिमी गठबंधन फौजों की पांच दिनों की बमबारी से बेखौफ नजर आ रहे गद्दाफी ने कहा-'जीत हमारी ही होगी।' इस बीच गठबंधन फौजों द्वारा हवाई हमले के कारण राजधानी त्रिपोली धमाकों से दहलता रहा।

सरकारी टीवी चैनल के मुताबिक 68 वर्षीय मुअम्मर गद्दाफी ने बुधवार को अपने आवासीय परिसर अल-अजीजिया की बॉलकनी से समर्थकों की भीड़ को संबोधित किया। अल-अजीजिया परिसर स्थित तीन मंजिली इमारत में गद्दाफी का कमान एवं नियंत्रण केंद्र भी है। यह इमारत रविवार की रात गठबंधन फौजों द्वारा क्रूज मिसाइल से किए हमले में ध्वस्त हो गई थी।

गठबंधन फौजों द्वारा शुरू हमले के बाद पहली बार जनता के सामने आए गद्दाफी ने कहा-'मैं हथियार नहीं डालने जा रहा। मैं तूफान से नहीं डरता और न ही उन विमानों से डरता हूं जो काली तबाही लाते हैं। मेरा घर यहा मेरे खेमे में है। मैं यहा हूं। मैं लीबिया में एक शहीद के रूप में मरने के लिए तैयार हूं। वक्त थोड़ा लगे या ज्यादा, हम पश्चिमी ताकतों को मात देकर रहेंगे।' अंतरराष्ट्रीय दबाव से बेअसर नजर आते गद्दाफी ने कहा-'हमला कतई नाजायज है। फासीवादी ताकतों की पागलपन का नतीजा है।' अपने पारंपरिक भूरे लबादे में लकदक गद्दाफी ने मारे गुस्से के जोरदार मुक्का मंच पर जड़ते हुए कहा-'मैं घुटने नहीं टेकने वाला।

ओबामा कहते रहें

गद्दाफी का यह आक्रामक रूख ऐसे वक्त पर सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि लीबिया के खिलाफ अभियान 'ऑडिसी डान' [प्रकाश लाने वाला] में कोई कमी नहीं आने वाली है। यह अभियान गद्दाफी के सत्ता से बेदखल होने तक जारी रहेगा। या फिर गद्दाफी अपना रवैया बदलें और लीबिया के लोगों को अपनी आजादी की अभिव्यक्ति का मौका प्रदान करें। अन्यथा उन्हें सत्ता से बाहर जाना ही होगा। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ऑपरेशन 'ओडिसी डॉन' से कुछ ही दिनों में मुख्य भूमिका से हट सकता है।

मिस्राता में 50 मारे गए

पांच दिनों से गठबंधन फौजों का निशाना बन रहे त्रिपोली में बुधवार को दो जोरदार धमाके सुने गए। मिस्राता से आ रही खबरों के मुताबिक गद्दाफी की सेना और विद्रोहियों के बीच जबरदस्त संघर्ष में 17 लोग मारे गए हैं। विद्रोहियों का आरोप है कि सरकारी फौजों की भारी गोलाबारी में बच्चों सहित 50 लोग मारे गए हैं। जिनतान से भी विद्रोही एक बार फिर खदेड़ दिए गए हैं।

खाना-पानी, दवा का संकट

अल जजीरा के मुताबिक गद्दाफी की फौजों ने करीब चार हफ्ते से मिस्राता को बंधक बना रखा है। नतीजतन खाना-पानी और दवाओं का अकाल पड़ गया है। अरब चैनल के मुताबिक यही स्थित अजदाबिया में भी है। यहां किसी भी पक्ष को कामयाबी मिलती नजर नहीं आ रही है। अजदाबिया में विद्रोहियों के बीच दो गुट उभर आए हैं। एक गुट त्रिपोली की ओर बढ़ने के लिए दबाव डाल रहा है तो दूसरा चाहता है कि अजदाबिया पर पूरी तरह कब्जा कायम हो जाए और पूरब में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखें।

नाटो तैयार

ब्रुसेल्स से मिली एक रिपोर्ट के अनुसार नाटो लीबिया में हथियार प्रतिबंध और उड़ान वर्जित क्षेत्र लागू करने के अभियान में भूमिका निभाने को तैयार हो गया है। लेकिन सदस्य देशों में इस बात को लेकर मतभेद हैं कि इस गठबंधन को कमान अपने हाथ में ले लेना चाहिए या नहीं।

भाग रहे गद्दाफी: हिलेरी

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की मानें तो उन्हें ऐसा लग रहा है कि गद्दाफी भागने की तैयारी में जुटे हैं। हिलेरी ने कहा-'मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि गद्दाफी लोगों को धोखे में रखने के लिए नाटक कर रहे हैं। असलियत यह है कि वह भागने की योजना में लगे हैं। ओबामा प्रशासन ऐसे कदम का स्वागत करेगा।'

पीएम को नैतिकता के कठघरे में लाने की कोशिश

पीएम को नैतिकता के कठघरे में लाने की कोशिश




नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। दोबारा मिले जनादेश का हवाला देकर विकिलीक्स रहस्योद्घाटन पर विपक्ष को चुप कराने वाले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को बुधवार को नैतिकता के कठघरे में घेरने की कोशिश हुई। मुख्य विपक्ष भाजपा के साथ जदयू और वामदलों ने भी कुछ अकाट्य तर्को के साथ उन्हें आगाह किया कि इतिहास से डरें। पैसे के बदले वोट का नजारा सबकी आंखों के सामने हुआ है। संसदीय समिति भी मान चुकी है कि इसकी पर्याप्त जांच होनी चाहिए। लिहाजा ऐसा काम न करें कि उनकी रहबरी पर ही सवाल खड़े हो जाएं। उन्होंने मांग की कि इसकी जांच सीबीआइ से हो और उसमें उन लोगों के भी नाम जोड़े जाएं जिनका विकिलीक्स में जिक्र है। बुधवार को भी राजग ने प्रधानमंत्री के जवाब से असंतोष जताते हुए वाकआउट किया।

पिछले सप्ताह संसद में विकिलीक्स पर हुए प्रधानमंत्री के बयान को विपक्ष ने कई सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। बुधवार को दोनों सदनों में चर्चा को दौरान विपक्ष की ओर से सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, गुरुदास दासगुप्ता, शरद यादव सरीखे नेताओं ने आगाह किया कि किसी की आड़ में छिपकर चेहरा बचाने की कोशिश न करें। सुषमा ने कहा कि विकिलीक्स ने विपक्ष के आरोपों को पुष्ट किया है कि सरकार बचाने के लिए खरीद फरोख्त की गई थी। विकिलीक्स ने घटना का जिक्र किया है और उसमें सच्चाई के अलावा कुछ नहीं हो सकता है। खासतौर पर तब जबकि संसद में इसकी तस्वीर पहले ही दिख चुकी है। प्रधानमंत्री के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की आदत है कि वह 2जी को राजा के माथे, राष्ट्रमंडल को कलमाड़ी के माथे मढ़कर अपना बचाव करते रहे हैं। सुषमा के साथ गुरुदास ने भी कहा कि जनादेश मिलने के साथ सारे अपराध खत्म नहीं हो जाते हैं। सरकार के घाव को कुरेदते हुए उन्होंने कहा कि 1984 के सिख दंगे के बाद कांग्रेस बहुत बड़े बहुमत से जीती थी, तो क्या सरकार उस दाग से बच सकती है।

राज्यसभा में जेटली ने भी कहा कि लेन देन के दस्तावेजी सबूत हैं। लेकिन सरकार गुनहगारों को सजा दिलाने की बजाय उन पर अंगुली उठा रही है जिन्होंने इसका पर्दाफाश किया। शरद यादव ने प्रधानमंत्री के इकबाल पर सवाल उठाया। प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीवीसी और 2जी के मामले में सरकार को कोर्ट के शरणागत होना पड़ा है। मुलायम सिंह पूरे मामले में बचाव पक्ष की भूमिका में रहे।

मनमोहन ने भी सीखी अदा..

नई दिल्ली [मुकेश केजरीवाल]। अगर लड़ाई तर्को और तथ्यों की बजाय जज्बात और अल्फाज की थी तो यकीनन जीत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हुई। बोझिल गंभीरता का पर्याय बन चुके डॉ. मनमोहन सिंह इस बार बिल्कुल नए अंदाज में थे। इन कुछ क्षणों में उन्होंने तकरीबन आठ दशकों में अपनी ही बनाई छवि को पूरी तरह चुनौती दे दी।

'माना कि तेरी दीद के काबिल नहीं हूं मैं..। तू मेरा शौक देख.. मेरा इंतजार देख।' शायराना अदा के साथ., जम कर रस लेते हुए., शब्दों के बीच पर्याप्त विराम दे., और सामने बैठी विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की आंखों में आंखें डाल.. जिस तरह प्रधानमंत्री ने इकबाल की इन पंक्तियों को पेश किया, ये लम्हे उनके पूरे सार्वजनिक जीवन के सबसे खास मौकों में जुड़ जाएंगे।

अपना भाषण तक देख कर पढ़ने वाले मनमोहन सिंह ने इन पंक्तियों के जरिए विपक्ष पर जोरदार वार कर दिया। कुछ देर पहले ही विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उन पर हमले के लिए इकबाल का सहारा ले कर कहा था- 'ना इधर, उधर की तू बात कर.. ये बता कि काफिला क्यों लुटा। हमें रहजनों से गिला नहीं.. तेरी रहबरी का सवाल है।' लेकिन मनमोहन सिंह की आश्चर्यजनक सहजता और आत्म विश्वास ने जैसे पूरी बाजी ही पलट दी।

ऐसा नहीं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहली बार शेर पढ़ा हो। कुर्सी संभालने के तुरंत बाद पाकिस्तान के तब के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को उन्होंने दोनों मुल्कों के रिश्तों के सिलसिले में यह शेर सुनाया था-'आ कि इन तरीकों से सुर्खियां पैदा करें..। इस जमीन की बस्तियों से आसमान पैदा करें।' एक शेर मनमोहन सिंह का खास पसंदीदा है- 'कुछ ऐसे भी मंजर हैं तारीख की नजरों में..। लम्हों ने खता की सदियों ने सजा पाई।' यह शेर उन्होंने पिछले सत्र में दूसरी बार सुनाया था।

मंगलवार, 22 मार्च 2011

रितिक से अभिनय के गुर सीखेंगे आमिर

रितिक से अभिनय के गुर सीखेंगे आमिर



मुंबई। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता आमिर खान के अभिनय का लोहा सभी मानते हैं, लेकिन अब वह अपनी अगली फिल्म धूम 3 के लिए रितिक रोशन से अभिनय के कुछ गुर सीखना चाहते हैं ताकि वह इस भूमिका के साथ पूरा न्याय कर सकें। फिल्म में आमिर एक खलनायक का किरदार निभाएंगे।

रितिक ने धूम 2 में खलनायक की भूमिका निभाकर खूब वाहवाही बटोरी थी। इसे देखते हुए आमिर अपने किरदार से जुड़े कुछ पहलुओं पर रितिक से चर्चा करना चाहते हैं।

एक सूत्र ने बताया, आमिर और रितिक के बीच रिश्ते पहले से अच्छे हैं, लेकिन ऐसी निकटता दोनों के बीच कभी नहीं थी। आमिर ने कभी रितिक के अभिनय के बारे में बात नहीं की थी। अब वह उनकी खूब तारीफ करते हैं। धूम 3 की शूटिंग आरंभ करने से पहले वह रितिक के साथ बैठकर कुछ बिंदुओं पर बातचीत करना चाहते हैं।

हाल ही में एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान 46 वर्षीय आमिर ने कहा था कि वह इस नए अभिनेता से अभिनय के गुर सीखने को लेकर उत्सुक हैं।

रितिक के बारे में आमिर ने कहा था, रितिक हमारे यहां के सबसे आकर्षक अभिनेताओं में से एक हैं। वह एक बेहतरीन कलाकार हैं। मैं उनसे अभिनय के कुछ गुर सीखना चाहता हूं।

मानवाधिकार पर भारत को शिक्षा न दे अमेरिका

मानवाधिकार पर भारत को शिक्षा न दे अमेरिका



गांधीनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से दो टूक कहा है कि वह मानवाधिकार के मुद्दे पर भारत को शिक्षा न दे। इस मामले में वह कितने पानी में है, हमें भी मालूम है। साथ ही केंद्र को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के मसले का निराकरण करना चाहिए।

मोदी ने यह बातें वर्ष-2006 में तत्कालीन अमेरिकी महावाणिज्य दूत से हुई अपनी बातचीत से संबंधित राजनयिक दस्तावेजों के लीक होने के बाद कही हैं। मोदी ने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों में उन्हें सच्चरित्र और गुजरात को प्रगतिशील राज्य बताया गया है। मोदी ने याद करते हुए कहा, कि माइकल ओवेन ने गुजरात के बारे में चर्चा की थी। मैंने उनकी आखों में देखा और कहा कि अमेरिका को मानवाधिकार के मामले में हमें सलाह नहीं देनी चाहिए।

गौरतलब है कि 2006 में जब ओवेन की मोदी से मुलाकात हुई थी तो उस वक्त वह मुंबई में अमेरिकी महावाणिज्य दूत थे। मोदी ने विकिलीक्स द्वारा ओवेन के साथ दो नवंबर 2006 को हुई बातचीत के कथित दस्तावेजों को लीक किए जाने के मद्देनजर अपने रुख को दोहराया है। उसमें ओवेन ने कहा था कि मोदी से सीधी बातचीत से हम गुजरात में मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में अमेरिकी सरकार की चिंताओं के बारे में स्पष्ट संदेश दे सकेंगे।

अमेरिका ने वर्ष 2002 के गुजरात दंगे के मद्देनजर 2005 में भाजपा के इस कद्दावर नेता को वीजा देने से इंकार कर दिया था। मोदी ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका हमें मानवता की सलाह न दे। मैं भारत का बेटा हूं और मैं जानता हूं कि आपने मानवाधिकारों का किस तरह उल्लंघन किया है। अच्छी बात है कि बातचीत को सही तरीके से पेश किया गया है।

विकिलीक्स दस्तावेजों का हवाला देकर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राजनयिकों ने 2006 में मोदी के राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व हासिल करने की संभावना का सामना करने की स्थिति को देखा।

ओवेन ने अपने दस्तावेज में मोदी के साथ अमेरिका के संवाद शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। दस्तावेज में ओवेन ने कहा कि इस आधार पर मोदी से बातचीत का समर्थन किया कि कल अगर मोदी राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका हासिल करें और हम उनसे संवाद करने की कोशिश करें तो भाजपा हमें अवसरवादी नहीं कहे।

लीक हुए अमेरिकी राजनयिक दस्तावेज में प्रणब मुखर्जी की वित्त मंत्री के तौर पर नियुक्ति के संबंध में कही गई बातों के मद्देजर भारत के आतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के बारे में पूछे गए सवाल पर मोदी ने कहा कि भारत सरकार को भारत के आतरिक मामले में अमेरिका के हस्तक्षेप के मुद्दे का निराकरण करना चाहिए।

मोदी ने कहा कि अमेरिका ने मुझे सच्चरित्र बताया है। अनेक सच्चरित्र लोग हैं लेकिन उन्होंने मुझे सच्चरित्र बताया है। यह गुजरात के लोगों के लिए अच्छी बात है। विकिलीक्स ने दो चेहरे दिखाए हैं। एक भारत सरकार का और दूसरा प्रगतिशील गुजरात का।

अमेरिका के मुंबई वाणिज्य दूतावास के 2850 शब्दों के इस मूल्याकन को अमेरिकी विदेश मंत्रालय को भेजे जाने से पहले नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने हरी झडी दी थी। इसमें कहा गया है कि निकट भविष्य में भाजपा में अगर मोदी राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करते हैं तो अमेरिकी सरकार यह फैसला करने पर मजबूर होगी कि वह राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हस्ती के साथ कैसे निपटे, जिसका हमने बी। बटा बी 2 रद्द कर दिया था।

प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस



नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकार और विपक्ष के बीच बात थोड़ी संभलती नहीं है कि फिर से जंग छिड़ जाती है। तीन दिन के अवकाश के बाद मंगलवार को संसद में दोनों आमने-सामने हुए तो नाक की लड़ाई शुरू हो गई। पहले वित्त विधेयक या पहले भ्रष्टाचार और विकिलीक्स पर चर्चा को लेकर दोनों सदनों में बात इतनी बढ़ी कि कई बार कार्यवाही स्थगित हुई। अंतत: सरकार ने अपने कामकाज को ही महत्व दिया तो नाराज राजग ने वाकआउट कर अपना विरोध जताया। इससे पहले विकिलीक्स पर प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए दोनों सदनों में उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया जा चुका था जो लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के विचाराधीन है।

सरकार और विपक्ष के बीच एक दूसरे की मंशा पर आशंका गहरा गई है। विकिलीक्स के रहस्योद्घाटनों पर दो दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान से असंतुष्ट विपक्ष ने पहले ही पेशबंदी कर ली थी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। इसके अलावा चर्चा का भी नोटिस दिया गया था। सुषमा के समर्थकों में भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और जदयू अध्यक्ष शरद यादव थे। बाद में भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने भी इसका समर्थन किया। दरअसल वह जानते थे कि विशेषाधिकार हनन के नोटिस को विचाराधीन बताकर मुद्दा आगे के लिए टाल दिया जाएगा। ऐसे में चर्चा के नोटिस के जरिए प्रधानमंत्री को घेरने की कोशिश थी।

सुषमा और लालकृष्ण आडवाणी ने नेता सदन प्रणब मुखर्जी से टेलीफोन पर बातचीत कर चर्चा के लिए हामी भी भरवा ली थी। लेकिन सदन में बात 'पहले मैं तो पहले मैं' में अटक गई। अंतत: प्रणब ने साफ कर दिया कि वित्त विधेयक पारित होने के बाद ही चर्चा करवाई जा सकती है। आक्रामक सत्तापक्ष विपक्ष के नेताओं को बोलने देने के लिए ही तैयार नहीं था। ऐसे में दोनों सदनों में दो बार कार्यवाही स्थगित हुई।

सूत्र बताते हैं कि इस बीच सुषमा ने प्रणब से बात कर प्रस्ताव दिया कि लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा हो और उसी बीच राज्यसभा में प्रधानमंत्री के बयान पर चर्चा शुरू हो। लेकिन सरकार उसके लिए राजी नहीं थी। इस स्थिति में जब लोकसभा तीसरी बार बैठी और वित्त विधेयक पर चर्चा शुरू हुई तो सुषमा ने कहा कि विपक्ष भी वित्त विधेयक में हिस्सा लेना चाहता था, लेकिन सरकार के रुख से साफ हो गया कि वह किस तरह अपना कामकाज निपटाना चाहती है। लिहाजा वित्त विधेयक राजग की गैर मौजूदगी में ही पारित हुआ।

रविवार, 20 मार्च 2011

कुछ समय संग सनी के

कुछ समय संग सनी के



सनी देओल ने आठ मार्च को डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म मोहल्ला अस्सी की शूटिंग पूरी कर दी। यह उनकी अभी तक की सबसे कम समय में बनी फीचर फिल्म है। मोहल्ला अस्सी डॉ. काशीनाथ सिंह के उपन्यास पर आधारित है। एक बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने बताया था कि एक हवाई यात्रा में उषा गांगुली के नाटक काशीनामा का रिव्यू पढ़ने के बाद उनकी रुचि इस किताब में जगी। उसे पढ़ने के बाद उन्होंने पाया कि इस पर तो अच्छी फिल्म बन सकती है। चंद मुलाकातों में उन्होंने डॉ. काशीनाथ सिंह से अधिकार लिए और स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की। आरंभिक दौर में जिसने भी इस किताब पर फिल्म लिखने की बात सुनी, उसका एक ही सवाल था कि इस पर फिल्म कैसे बन सकती है? बहरहाल, फिल्म लिखी गई और उसके किरदारों के लिए ऐक्टर का चयन आरंभ हुआ।

फिल्म के प्रमुख किरदार धर्मनाथ पांडे हैं। यह फिल्म उनके अंतद्र्वद्व और उनके निर्णयों पर केंद्रित है। इस किरदार के लिए एनएसडी से निकले मशहूर और अनुभवी अभिनेताओं से बातें चलीं। अलग-अलग कारणों से उनमें से कोई भी फिल्म के लिए राजी नहीं हुआ। डॉ. द्विवेदी और सनी देओल पिछले कुछ सालों से साथ काम करने के लिए इच्छुक थे। दूसरे दबावों की वजह से इनका साथ नहीं हो पा रहा था। मोहल्ला अस्सी की स्क्रिप्ट सनी ने सुन रखी थी। वे इस फिल्म के लिए राजी हो गए। उन्होंने निर्देशक के आगे खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। विख्यात है कि सनी के अनेक नखरे होते हैं। उनके साथ फिल्म बना रहे निर्माता-निर्देशक की सांसें अटकी रहती हैं। वे अनिश्चित रहते हैं कि फिल्म समय से पूरी भी हो पाएगी कि नहीं। यह चिंता पहली बार फिल्म बना रहे विनय तिवारी की भी रही। किंतु फिल्म के प्रति सनी का समर्पण और सद्भाव देख कर सभी दंग थे।

सनी ने इस फिल्म के लिए अपनी इमेज को दरकिनार कर दिया। उन्होंने फिल्म की कहानी की जरूरत को समझते हुए नए गेटअप और लुक के लिए खुद को तैयार किया। वे इस फिल्म में धोती-कुर्ता पहनते हैं। कंधे पर गमछा, पांव में चप्पल और हाथ में पूजा की सामग्रियां लेकर चलने में उन्हें कोई कठिनाई नहीं हुई। ढाई किलो के मुक्के के लिए विख्यात सनी इस फिल्म में अस्सी घाट पर बैठ कर श्रद्धालुओं को संकल्प कराते नजर आएंगे। अपनी छवि के विपरीत भूमिका में वे शांत और स्निग्ध रूप में नजर आएंगे। धर्मनाथ पांडे जैसा चरित्र अभी तक बड़े पर्दे पर नहीं देखा गया है। यह शुद्ध बनारसी किरदार है, जिसे अस्सी घाट पर कभी भी देखा जा सकता है। धर्मनाथ पांडे के साथ कन्नी और तन्नी गुरु भी नजर आएंगे। अस्सी घाट पर स्थित पप्पू की दुकान पर बैठकें लगाते ये किरदार बनारस के बेलौस और बिंदास मिजाज को सामने लाते हैं। इसमें बदल रहे बनारस के शेड्स दिखेंगे।

फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार सनी से मिलना-जुलना हुआ। उन्हें लगता है कि उनके करियर में इस फिल्म का वही स्थान होगा, जो उनके पापा धर्मेन्द्र के करियर में सत्यकाम को हासिल है। यह फिल्म उनके एक्टिंग की क्षमताओं के नमूने के तौर पर पेश की जाएगी। पहली बार इस फिल्म में देखा गया कि वे अपनी पंक्तियों को लेकर परेशान नजर आए। उन्होंने कहा भी कि हम ऐक्टर थोड़ी लिबर्टी लेकर संवादों को अपनी सुविधा से बदल भी देते हैं, लेकिन इस फिल्म के संवादों के एक-एक शब्द को मैंने याद किया। उन संवादों में ही फिल्म का अभिप्रेत छिपा है। सनी ने इस फिल्म को निश्चित समय में खत्म करने के लिए हर तरह से सहयोग किया। उनके सहयोग से इसकी शूटिंग बनारस में पंद्रह मार्च को समाप्त हो गई।

मैं हूं ही ऐसी: विभा आनंद

मैं हूं ही ऐसी: विभा आनंद




धारावाहिक संस्कार लक्ष्मी जी टीवी पर आ रहा है। इसमें लक्ष्मी की मुख्य भूमिका निभा रही हैं विभा आनंद। वे पहले बालिका वधू में सगुना की भूमिका निभा चुकी हैं। धारावाहिक में लक्ष्मी के रोल के लिए उन्हें काफी तैयारी करनी पड़ी है। बता रही हैं खुद विभा।

काफी तैयारी की : किसी अभिनेत्री को अपने द्वारा निभाए जा रहे चरित्र के लिए तैयारी करनी ही पड़ती है। मैंने भी काफी तैयारी की, मानसिक रूप से भी और शारीरिक रूप से भी। संस्कार लक्ष्मी में भूमिका निभाने के लिए इसके निर्माता-लेखक राजू भाई ने विशेष कार्यशाला आयोजित की थी।

करना है बहुत कुछ : मैं देहरादून में पली-बढ़ी हूं। मेरी मानसिकता भी लक्ष्मी जैसे छोटे शहर में रहने वाले लोगों जैसी है, लेकिन जब शूटिंग शुरू हुई, तो मुझे लगा कि लक्ष्मी बनने के लिए मुझे अभी बहुत कुछ करना है। राजू भाई ने मुझ पर बहुत विश्वास किया है। मैं उनका विश्वास तोड़ना नहीं चाहती थी। मैं गुजराती संस्कृति को समझने के लिए गुजराती फिल्में और नाटक भी देखने लगी। राजू भाई ने मुझे गुजराती भाषा और लहजा सीखने में काफी मदद की।

कर रही हूं मेहनत : धारावाहिक में, मैं एक ऐसी लड़की बनी हूं, जो जिंदगी को मजे से जीती है। मासूम है और जहां भी जाती है, अपनी अलग पहचान बनाती है। मैं इसके लिए अपने साथी कलाकारों और दोस्तों की शुक्रगुजार हूं। मैं अपने कुछ गुजराती दोस्तों की मदद से गुजराती लोक गीत और डांडिया-गरबा सीख गई हूं। अब मैं जल्दी ही गुजराती भी बोलने लगूंगी। मैं खूब मेहनत कर रही हूं।

शिव या पार्वती : किसी भी अभिनेत्री को कैमरे के सामने शॉट देने के लिए तैयार होना एक चुनौती है। फिर किसी अभिनेत्री को पुरुष की वेशभूषा में कैमरे का सामना करना हो, तो चुनौती और बढ़ जाती है। मुझे इस सीरियल में जब अ‌र्द्धनारीश्वर का रूप धरना पड़ा, तो बड़ा अजीब लगा। अ‌र्द्धनारीश्वर एक जोड़े का शानदार प्रतिरूप है। मैं सीरियल में लक्ष्मी की भूमिका निभा रही हूं, जो भगवान शिव की भक्त है।

लोगों ने सराहा : मुझे भगवान शंकर के सामने तांडव नृत्य करते हुए गाना भी था। मैं तो भंगड़ा और फिल्मी गीतों पर नाचती थी, ऐसे में तांडव करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। इसके लिए मेकअप करना और वेशभूषा पहनना बड़ा अजीब लगता था। तांडव में मुझे शिव और शक्ति दोनों ही रूपों में नृत्य करना था। आधे चेहरे में शिव का क्रोध दिखाना था और आधे में पार्वती की पवित्र और शांत छवि। कैसे किया यह मैं ही जानती हूं, लेकिन मैंने किया।

नहीं बनाती योजना : मैं किसी काम को या जिंदगी को लेकर योजना नहीं बनाती। जब जो समय आता है, उसे मन से करने में जुट जाती हूं। आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा। मैं हूं ही ऐसी।

अब भाजपा भी आई विकिलीक्स की चपेट में

अब भाजपा भी आई विकिलीक्स की चपेट में



नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विकिलीक्स के रहस्योद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग कर रही भाजपा अब खुद इसकी चपेट में आ गई है। विकिलीक्स के जो नए केबल सामने आए हैं, उनके मुताबिक लालकृष्ण आडवाणी और शेषाद्रिचारी सरीखे भाजपा नेताओं ने अमेरिका को आश्वस्त किया था कि वे सिर्फ संप्रग से राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए ही अमेरिका की आलोचना करते हैं। इन नेताओं ने अमेरिका को यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार में आने पर परमाणु करार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इस रहस्योद्घाटन के बाद भाजपा ने इस तरह के दावों से अपना पल्ला झाड़ लिया है। जबकि कांग्रेस ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।

शुक्रवार तक सरकार को कठघरे में खड़ा कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर इस्तीफे के लिए दबाव बढ़ा रही भाजपा को शनिवार को गहरा झटका लगा। अब उसे इस मामले में पहले खुद सफाई देनी पड़ रही है। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने इस तरह के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जावड़ेकर के अनुसार, सच्चाई तो यह है कि भाजपा के कड़े विरोध के कारण ही सरकार को असैन्य परमाणु दायित्व विधेयक में कोई एक-दो नही, बल्कि 16 संशोधन करने पड़े थे। हालांकि भाजपा अमेरिका के साथ सामरिक संबंधों की अहमियत समझती है।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने मौका पाते ही भाजपा पर पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि भाजपा विकिलीक्स के रहस्योदघाटन के आधार पर संसद की कार्यवाही में बाधा डालने और सरकार के विरोध के लिए जो मानक बना रही थी, अब उन्हें वह अपने ऊपर भी लागू करे। तिवारी के अनुसार, भाजपा ने विकिलीक्स को अपने राजनीतिक दर्शन की पवित्र किताब बना लिया है, जबकि कांग्रेस ने भाजपा को इस बारे में आगाह भी किया था।

विकिलीक्स के एक केबल में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और अमेरिकी दूतावास के अधिकारी पीटर बुर्लेग के बीच मई 2009 की मुलाकात का जिक्र है। जिसमें आडवाणी ने कहा था कि भाजपा किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को हल्के में नहीं लेती है। हालांकि आडवाणी ने जुलाई 2008 में यह भी कहा था कि इस समझौते ने देश की सामरिक स्वायत्तता को सीमित किया है और वह सत्ता में आई तो इसका दोबारा निरीक्षण करेगी। इस पर अमेरिकी अधिकारी ने लिखा था कि भाजपा इस समझौते की समीक्षा नहीं करेगी।

इसके अलावा जो और नई बातें उभर कर सामने आई हैं, उनमें भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य शेषाद्रिचारी ने अमेरिका के एक अधिकारी को कहा था कि विदेश नीति संबंधी प्रावधानों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है। वह भी खास तौर पर अमेरिका से जुड़े मामलों पर। शेषाद्रिचारी ने यह भी कहा कि हम लोग यह संप्रग पर राजनीतिक बढ़त पाने के लिए करते हैं। इसमें प्रकाश जावडेकर के हवाले से यह भी कहा गया कि वह तो यह चाहते हैं कि भारत-अमेरिका परमाणु करार के करीब आएं।

मंगलवार, 15 मार्च 2011

खतरे में जापान, दो और रिएक्टरों में विस्फोट

खतरे में जापान, दो और रिएक्टरों में विस्फोट



टोक्यो। भूकंप और सुनामी के खतरे से निकलने की कोशिश करता जापान परमाणु विकिरण की भीषण विभीषिका में फंसता नजर आ रहा है। भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए फुकुशिमा के देइची परमाणु संयंत्र के रिएक्टर नंबर दो और रिएक्टर नंबर चार में मंगलवार को विस्फोट हुए। इसके बाद यहां आग लग गई। अब संयंत्र के चारों रिएक्टरों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। इससे पहले रिएक्टर नंबर एक में शनिवार को और रिएक्टर नंबर तीन में सोमवार को विस्फोट हो चुके हैं। मंगलवार देर शाम आए 6.0 तीव्रता के भूकंप से राजधानी टोक्यो में एक बार फिर दहशत फैल गई। भूकंप के झटके से इमारतें हिल गई और लोगों में अफरातफरी मच गई।

विकिरण संकट पर मुख्य कैबिनेट सचिव यूकिओ एदानो ने मीडिया से कहा कि निश्चित रूप से ताजा विस्फोटों का लोगों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि संयंत्र 'गंभीर' हालत में पहुंच चुका है। इसके नष्ट होने पर बड़ी मात्रा में विकिरण का डर है।

प्रधानमंत्री नाओतो कान ने जापान टेलीविजन पर देशवासियों को संबोधित किया और चेतावनी दी कि 'आने वाले समय में विकिरण का खतरा अत्यधिक' है। उन्होंने परमाणु संयंत्र का काम देख रहे अधिकारियों के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए फटकार लगाई कि 'आखिरकार यह सब हो क्या रहा है?'

इस बीच फ्रांस दूतावास ने कुछ घंटों में निम्न स्तर के विकिरण के फुकुशिमा से 240 किलोमीटर दूर टोक्यो पहुंचने की घोषणा की। घोषणा में कहा गया कि 10 घंटे में विकिरण तत्वों से लैस हवाएं राजधानी टोक्यो पहुंच जाएंगी। इससे हड़कंप मच गया। कई लोगों ने शहर छोड़ दिया। लोगों ने खाने-पीने की चीजें और टॉर्च-बैटरी जैसे जरूरी सामानों की जोर-शोर से खरीदारी शुरू कर दी।

परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार रिएक्टर नंबर तीन के पास विकिरण का स्तर साल भर में होने वाले विकिरण से 400 गुना ज्यादा हो चुका है। क्योदो समाचार एजेंसी ने कहा कि टोक्यो से मात्र 10 किलोमीटर दूर चीबा प्रांत में विकिरण का स्तर सामान्य से 10 गुना ज्यादा पाया गया है। जबकि टोक्यो के ही नजदीक साइतामा में परमाणु विकिरण का स्तर 40 गुना ज्यादा पाया गया है।

क्योदो ने बताया कि संयंत्र का काम देखने वाली टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी [टेपको] ने भी मंगलवार के विस्फोटों के बाद स्थिति की गंभीरता को स्वीकारा है। उसने रिएक्टरों से 800 कर्मचारियों को बाहर चले जाने के आदेश दे दिया है। मात्र पचास विशेषज्ञों को रिएक्टरों की कूलिंग के काम में रखा गया है। कंपनी ने रिएक्टरों के नष्ट होने की आशंका से इंकार नहीं किया है क्योंकि ईधन छड़ें [फ्यूल रॉड्स] अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

दो दिन और..:-

विशेषज्ञों का कहना है कि चारों क्षतिग्रस्त रिएक्टर अगले दो दिन में 'अत्यधिक गंभीर' स्थिति में पहुंच जाएंगे। ऐसे में हवा का रुख बहुत कुछ तय करेगा। यदि हवाएं समुद्र की दिशा में बहीं, तो खतरा टलने की संभावना होगी। जबकि शहर की ओर हवाएं बहने पर जापान से दर्दनाक खबरें आ सकती हैं।

जापान के पड़ोसी भी खतरे में!

टोक्यो। जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में विस्फोटों से शुरू हुआ विकिरण रूस तक पहुंच गया है। रूस के तटीय शहर व्लाडीवोस्टक में विकिरण का स्तर बढ़ने की खबर आई है।

टाइम पत्रिका के अनुसार अब जापान के पड़ोसी देशों को भी विकिरण का खतरा महसूस हो रहा है। ताइवान, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, थाइलैंड, मलेशिया और हांगकांग में इसका असर फैलने की आशंका है। फुकुशिमा संयंत्र में विस्फोटों के बाद से इन एशियाई देशों में यहां से आयात होने वाले सामानों की गहन जांच की जा रही है। मंगलवार को फुकुशिमा की रिपोर्टिग कर हांगकांग लौटे पत्रकारों के स्वास्थ्य की गहन जांच की गई।

ताइवान की परमाणु ऊर्जा परिषद [एईसी] जापान में होने वाले रेडियोएक्टिव पदार्थो की सांद्रता की निगरानी कर रही है। एईसी के निदेशक चेन वाई पिन ने कहा कि फिलहाल देश में विकिरण का स्तर सामान्य है। हालांकि आसामान्य परिस्थितियों का पता लगने पर आपातकालीन उपाय किए जाएंगे। परिषद के उपनिदेशक ने स्थानीय लोगों को अनावश्यक रूप से आयोडीन की गोली खाने से मना किया है, इसके गैरजरूरी सेवन से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यही नहीं स्थानीय बाजारों में खाद्य पदार्थो की गहन जांच की जा रही है।

अन्य एशियाई देश भी जापान से आयात होने वाले खाद्यान्न की जांच कर रहे हैं। हांगकांग के खाद्य और सुरक्षा सचिव यार्क चाओ ने कहा कि दुग्ध से बने उत्पादों, फलों और सब्जियों की विशेष रूप से निगरानी की जा रही है। इनमें किसी प्रकार का दोष पाए जाने पर उन उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

मलेशिया जापान से हर साल 48,500 टन मछली, फल, सब्जियों और अनाज का आयात करता है। वहां भी कड़ी निगरानी की जा रही है। दक्षिण कोरिया में आगामी 30 अप्रैल तक हफ्ते में एक बार विकिरण की जांच की जाएगी। उसके बाद मई और जून में महीने में एक बार जांच करने का आदेश सरकार ने दिया है।

जर्मनी ने बंद किए सात परमाणु रिएक्टर

बर्लिन। जर्मनी ने मंगलवार को देश के सात सबसे पुराने परमाणु रिएक्टरों को बंद करने का आदेश दिया। जापान के परमाणु संयंत्रों में हुई दुर्घटनाओं के बाद सोमवार को जर्मनी ने अपने सभी 17 परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा करने की घोषणा की थी।

जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने पांच राज्यों के प्रमुखों से मुलाकात के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी। ये पुराने परमाणु रिएक्टर उन्हीं पांच राज्यों में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 से पहले चल रहे इन परमाणु संयंत्रों को मध्य जुलाई तक बंद रखा जाएगा। इनके अलावा वर्ष 1883 में शुरू हुए एक अन्य परमाणु संयंत्र भी अनिश्चित काल के लिए बंद रहेगा। कई दुर्घटनाओं के बाद इस संयंत्र को पावर ग्रिड से वापस ले लिया गया था। मार्केल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की सवचर््ेच्च प्राथमिकता को देखते हुए ही यह फैसला लिया गया है।

परमाणु विकिरण के स्वास्थ पर खतरे

नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। जापान में परमाणु विकिरण के खतरे ने लोगों को बुरी तरह डरा दिया है। इस विकिरण से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव होता है। करीब दो सौ जापानियों के विकिरण का शिकार होने की खबर आई है।

जानिए इस खतरे को:-

संक्रमण से मृत्यु तक:-

रेडियोएक्टिव पदार्थो से संक्रमित होने के शुरुआती संकेत ये हैं कि इसमें नाक बहती है, उल्टी-दस्त लग जाते हैं। व्यक्ति के शरीर में पानी कम हो जाता है। संक्रमण के कुछ ही मिनटों या घंटों में ऐसा होने लगता है। व्यक्ति इनसे तत्काल उबर भी सकता है और स्वस्थ दिखता है।

बाद के महीनों में ये संकेत उभरते रहते हैं और धीरे-धीरे व्यक्ति की भूख खत्म हो जाती है, वह थका रहने लगता है। आगे चल कर वह बुखार, जुकाम, उल्टी, डायरिया से ग्रस्त रहने लगता है। अंतत: स्वास्थ्य प्रतिरक्षा तंत्र नष्ट हो जाने से उसकी मृत्यु हो जाती है। विकिरण के प्रभाव से व्यक्ति की त्वचा खराब हो जाती है।

कैंसर का खतरा:-

अमेरिकन थायरॉयड एसोसिएशन के अनुसार, विकिरण का सबसे ज्यादा प्रभाव थायरॉयड ग्लैंड्स पर पड़ता है। ये रेडियोएक्टिव पदार्थो के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। अत: विकिरण से थायरॉयड कैंसर का खतरा पैदा हो जाच च्ैच् बच्चे और युवक इसके सबसे आसान शिकार होते हैं। 40 पार के लोगों में यह खतरा काम होता है।

दूध और दुग्ध पदार्थो से दूरी:-

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार 98 प्रतिशत मामलों में लोग अप्रत्यक्ष रूप से विकिरण का शिकार होते हैं यानी सांस लेने से संक्रमित होने का खतरा अत्यधिक नहीं होता। दूध और दुग्ध पदार्थो में विकिरण का असर सबसे ज्यादा होता है। फलों में भी होता है। दूध देने वाले जानवर जब विकिरण से संक्रमित घास या अन्य पदार्थ खाते हैं, तो उनका दूध संक्रमित हो जाता है। अत: विकरण का खतरा फैसले ही दूध और दुग्ध पदार्थो का सेवन बंद कर देना चाहिए।

आयोडीन की गोलियां:-

विकिरण के दौरान रेडियोएक्टिव आयोडीन हवा में फैल जाता है। पोटेशियम आयोडीन की गोलियां इसका मुकाबला करने के लिए दी जाती हैं। पोटेशियम आयोडीन थायरॉयड ग्लैंड्स को रेडियोएक्टिव आयोडीन को ग्रहण करने से रोकता है।




गुरुवार, 10 मार्च 2011

China Earthquake Administration sends experts to quake-hit SW province

China Earthquake Administration sends experts to quake-hit SW province

English.news.cn 2011-03-10 16:44:54



BEIJING, March 10 (Xinhua) -- China Earthquake Administration has sent experts to the quake-hit region in Yingjiang County in southwest China's Yunnan Province to offer expertise and direct relevant work, the administration said Thursday.

The administration said in a statement on its website that it initiated a grade III emergency response after the quake and dispatched a team of experts to the quake zone, headed by an official with the administration's emergency relief bureau.

The provincial earthquake bureau in Yunnan also sent two teams to the quake-hit region to collect information about the quake and conduct on-site monitoring, it said.

An earthquake measuring 5.8 on the Richter Scale jolted Yingjiang County at 12:58 a.m. Beijing Time Thursday, according to the China Earthquake Networks Center.

The epicenter, with a depth of 10 kilometers, was monitored at 24.7 degrees north latitude and 97.9 degrees east longitude, the center said.

The quake caused heavy damage in Yingjiang as the epicenter is only about three kilometers away from the county. Adjacent counties including Longchuan, Lianghe, and Tengchong also felt the tremblor, according to the administration.


बुधवार, 9 मार्च 2011

धोखाधड़ी के मामले में महिला पायलट गिरफ्तार

धोखाधड़ी के मामले में महिला पायलट गिरफ्तार




नई दिल्ली। विमान पायलट का लाइसेंस हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी अंक तालिका का इस्तेमाल करने के मामले में एक महिला पायलट को गिरफ्तार किया गया है, जो एक विमान को गलत तरह से उतारने के सिलसिले में पहले ही निलंबित है।

पुलिस ने बुधवार को बताया कि इंडिगो एयरलाइन की निलंबित पायलट परमिंदर कौर गुलाटी [38] को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की एक टीम ने नागर विमानन महानिदेशालय [डीजीसीए] की शिकायत पर चल रही जाच के बाद कल उसके कीर्ति नगर स्थित आवास से गिरफ्तार किया।

पुलिस उपायुक्त [अपराध] अशोक चंद ने कहा कि परमिंदर ने कथित रूप से एयरलाइन्स ट्रासपोर्ट पायलट लाइसेंस [एएलटीपी] पाने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए थे।

कम बजट की निजी विमान सेवा में कैप्टन के रूप में कार्यरत परमिंदर को 11 जनवरी को गोवा में इंडिगो के एक विमान को गलत तरह से उतारने के बाद ग्राउड सेवा में लगा दिया गया था।

चंद ने कहा, 'डीजीसीए के प्रशिक्षण और लाइसेंसिंग निदेशक डीसी शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गुलाटी ने फर्जी दस्तावेजों से लाइसेंस हासिल किया था।'

डीजीसीए की शुरूआती जाच में पता चला कि उसने एएलटीपी पाने के लिए जनवरी 2009 में हुई पायलट लाइसेंस परीक्षा की कथित तौर पर जाली अंकतालिका जमा की थी। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।

उन्होंने कहा, 'यह बात सामने आई कि गुलाटी ने एएलटीपी लाइसेंस पाने के लिए जनवरी 2009 में एयर नेविगेशन और रेडियो एड्स तथा उपकरण की परीक्षा के उत्तीर्ण होने के प्रमाण के तौर पर पायलट लाइसेंस परीक्षा की जाली अंकतालिका जमा की थी।'

दरअसल वह एयर नेविगेशन में अनुत्तीर्ण रही और दूसरे प्रश्नपत्र की परीक्षा में अनुपस्थित रही। उसने इस विषय के लिए अप्रैल 2009 तथा जुलाई 2009 के सत्र में फिर से परीक्षा दी लेकिन दोनों ही मौकों पर विफल रही।

छात्रा हत्या मामले में हत्यारे का स्केच जारी

छात्रा हत्या मामले में हत्यारे का स्केच जारी



नई दिल्ली [जासं]। दिल्ली में छात्रा राधिका तंवर की हत्या के मामले में पुलिस ने बुधवार को हत्यारे का स्केच जारी कर दिया। यह स्केच तीन चश्मदीदों की मदद से बनाया गया है। हालांकि पुलिस इस स्केच से संतुष्ट नहीं हैं। हत्या किसने और क्यों की, इसकी तस्वीर भी साफ नहीं हो पाई है। जांच के लिए पुलिस की 19 टीमें बनाई गई हैं। अभी तक पुलिस के पास कोई सटीक सुराग नहीं है, लेकिन पुलिस अधिकारी केस को दो दिनों के अंदर खोलने का दावा कर रहे हैं।

पुलिस उपायुक्त एचजीएस धालीवाल ने बुधवार को पब्लिक, परिजनों, रिश्तेदारों व दोस्तों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि कातिल को अच्छी तरह पता था कि कहां पर व किस समय गोली मारकर आसानी से भागा जा सकता है। घटनास्थल से कॉलेज की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। राधिका की तीन खास सहेलियां हैं, जो मंगलवार को कॉलेज नहीं गई थीं। इनसे भी पूछताछ की जा रही है।

ज्ञात हो नारायणा की रहने वाली राधिका तंवर [20] दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज में बीए प्रोग्रामिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। मंगलवार को पैदल कॉलेज जाते समय पीछे से आए अज्ञात व्यक्ति ने तमंचे से पीठ में गोली मारकर हत्या कर दी और भाग गया। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बुधवार को छात्रा के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें हत्यारे की तलाश का भरोसा दिया।

हसन अली मामले में ईडी को फटकार

हसन अली मामले में ईडी को फटकार




मुंबई [जासं]। चालीस हजार करोड़ रुपये की कर चोरी व हवाला कारोबार के आरोप में गिरफ्तार हसन अली के लिए 14 दिन की रिमांड मांग रहे प्रवर्तन निदेशालय [ईडी] को बुधवार को अदालत ने कड़ी फटकार लगाई।

अदालत ने कहा कि आप अब तक हसन अली के खिलाफ कोई कायदे का मुकदमा नहीं बना सके। मुंबई के प्रधान सत्र न्यायाधीश एम.एल. तहलियानी ने ईडी को पूरी तैयारी के साथ आने की हिदायत देते हुए अली को गुरुवार सुबह फिर अदालत में हाजिर करने के निर्देश दिए। जज तहलियानी ने ही विशेष सत्र अदालत में मुंबई आतंकी हमले से संबंधित मुकदमे की सुनवाई की थी और पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को मौत की सजा सुनाई थी।

ईडी ने घोड़ों के फार्म के मालिक हसन अली [53] को बीते सोमवार को उसके पुणे स्थित आवास से हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार कर लिया था। जज तहलियानी ने ईडी की ओर से पेश वकील नीति पुंडे को फटकार लगाते हुए कहा, 'आप कोई भी मामला बनाने में सक्षम नहीं हैं और चाहते हैं कि मैं आपको सुनूं। यदि आपको तैयारी करनी है तो आप समय ले सकते हैं।' ईडी ने अली को काले धन को वैध बनाने से संबंधित प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा-44 के तहत गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि स्विस बैंकों में अली के करीब 40 हजार करोड़ रुपये जमा हैं। उस पर अंतरराष्ट्रीय हथियार व्यवसायी अदनान खशोगी से संबंध रखने के भी आरोप हैं। पुंडे ने अदालत को बताया कि अली पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा। उससे और पूछताछ करने के लिए ईडी उसकी 14 दिन की रिमांड चाहता है। सरकारी वकील के अनुसार अली स्विस बैंकों में जमा अपने काले धन के बारे में जानकारी नहीं दे रहा जबकि उसके पास से मिले दस्तावेज स्विस बैंकों में उसके लेनदेन की पुष्टि करते हैं।

पोलो चूसता रहा हसन अली

महंगी विदेशी सिगरेटों के शौकीन हसन अली की रातें अब ईडी की हिरासत में बीत रही हैं। सोमवार देर रात गिरफ्तारी के बाद उसे आजाद मैदान पुलिस थाने की हवालात में रहना पड़ा था। मंगलवार रात उसे नरीमन प्वाइंट स्थित ईडी के दफ्तर में गुजारनी पड़ी।

सूत्रों के अनुसार निदेशालय के अधिकारी उससे देर रात तक पूछताछ करते रहे। इसके बाद उसे वहां पड़ी लकड़ी की बेंच पर नींद नहीं आई।

प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत में चल रहे पंखे की हवा से कहीं उसे झपकी न लग जाए, इस डर से वह बुधवार को अदालत में पिपरमेंट से बनी टॉफी 'पोलो' चूसता रहा। गिरफ्तारी के बाद से ही उसे सफेद पठानी सूट और पैरों में रंगीन चप्पल पहने देखा जा रहा है।

युवराज फिर बने भारत की जीत के नायक

युवराज फिर बने भारत की जीत के नायक

नई दिल्ली। युवराज सिंह [नाबाद 51रन, 43रन पर दो विकेट] के लगातार दूसरे मैच में हरफनमौला प्रदर्शन के दम पर शुरुआती झटकों से पार पाते हुए भारत ने विश्व कप के ग्रुप-बी मुकाबले में नीदरलैंड्सको 81गेंद शेष रहते पांच विकेट से हरा दिया है। मेजबान टीम ने अपना अजेय अभियान जारी रखते हुए टूर्नामेंट के नाक आउट दौर में प्रवेश कर लिया है।




फिरोज शाह कोटला मैदान में हुए मुकाबले में भारत को आयरलैंड के बाद एक बार फिर अनुभवहीननीदरलैंड्ससे जीत हासिल करने में काफी पसीना बहाना पड़ा। युवराज के अलावा वीरेंद्र सहवाग[39], गौतम गंभीर [28] और कप्तान धौनी[नाबाद 19]के बनाए उपयोगी रन की बदौलत भारत ने 36.3ओवर में पांच विकेट खोकर 191रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिए। इससे पूर्व डच बल्लेबाजों ने शुरू में सही खेल दिखाया लेकिन बाद में पूरी टीम 50ओवर नहीं खेल सकी। नीदरलैंड्सके सात विकेट 127रन गिर चुके थे लेकिन कप्तान पीटर बेरोन[38 रन, 36गेंद] ने तीन चौका व दो छक्का जड़कर टीम का स्कोर सम्मानजनक स्तर तक पहुंचाया। हालांकि डचटीम 46.4ओवर में 189रन बनाकर आउट हो गई। भारत की तरफ से जहीर खान [20/3] सबसे सफल गेंदबाज रहे। अब तक आलोचना के केंद्र रहे पीयूष चावला एक बार फिर टीम के सबसे खर्चीले गेंदबाज रहे। उन्होंने 10ओवर में 47रन देकर दो विकेट लिए। भारत की चार मैचों में यह तीसरी जीत है जबकि इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला टाई रहा था। नीदरलैंड्सअपने सभी मुकाबले हार गया है।

भारत के सलामी बल्लेबाजों सहवाग[39] और तेंदुलकर ने टीम को आतिशी शुरुआत दी। दोनों ने तेजी से खेलते हुए 7.3ओवर में 69रन जोड़े। सहवागशुरू में थोड़े धीमे जरूर रहे लेकिन बाद में लय में आ गए और कुछ आक्रामक शाट लगाए। सीलारकी गेंद पर कैच आउट होने से पूर्व सहवागने 26गेंदों में पांच चौके व दो छक्के के साथ 39रन बनाए। इसके बाद तेंदुलकर भी सीलारकी गेंद पर सीमारेखा के पास क्रूगरके हाथों लपके गए। उन्होंने 22गेंदों में 27रन [छह चौका] बनाए। सहवागके बाद जल्दी मैच जीतने के चक्कर में ऊपर भेजे गए यूसुफ पठान [11] भी जल्दी चलते बने। हालांकि सीलारकी गेंद पर काट एंड बोल्ड होने से पूर्व पठान ने 10गेंदों में एक छक्का व एक चौका जड़ा। विकेटों के पतन का सिलसिला यहीं नहीं रुका और कई मौके पर टीम को संकट से बाहर निकालने वाले विराट कोहली [12] भी ज्यादा कुछ नहीं कर सके। पीटर बेरोनने कोहली को बोल्ड किया।

मेजबान टीम ने 14.3ओवर में 99रन पर ही चार बड़े विकेट गंवा दिए थे। लेकिन गंभीर ने पिछले मैच में जीत के नायक बने युवराज के साथ कुछ देर क्रीज पर बिताया और स्कोर 139रन तक ले गए। गंभीर ने इस बीच तीन चौके लगाकर दर्शकों का मनोरंजन भी किया। मुदस्सरबुखारी ने गंभीर को बेहतरीन इन स्विंगसे बोल्ड कर भारतीय टीम के खेमे में खामोशी पसार दी। हालांकि लक्ष्य से 46रन पीछे के कारण बल्लेबाजों ने धैर्य नहीं खोया और कोई विकेट गंवाए बगैर टीम को जीत के पार पहुंचा दिया। युवराज ने 73गेंदों में सात चौके लगाकर करियरका 47वांपचासा पूरा किया। वहीं धौनीने 40गेंदों में नाबाद 19रन बनाए।

इससे पहले नीदरलैंड्सने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। सलामी बल्लेबाजों ने बिना कोई खतरा उठाए हुए संभल कर खेलते हुए पारी को आगे बढ़ाया और शुरू में कोई झटका नहीं लगने दिया। भारतीय कप्तान धौनीने एक बार फिर स्पिन गेंदबाजों को जल्दी मोर्चे पर लगा दिया। लेकिन पठान, हरभजन और चावला ने डच टीम के रन रेट पर रोक लगाई पर विकेट नहीं पा सके। अब तक खराब प्रदर्शन के कारण आलोचना के केंद्र बने चावला ने टीम इंडिया को 16वेंओवर में एरिकसज्वारसिजंस्की[28] क्लीन बोल्ड कर पहली सफलता दिलाई। इसके बाद आयरलैंड के खिलाफ पिछले मैच में पांच विकेट झटकने वाले युवराज ने वेस्लेबारेसी[26 रन, 58गेंद] को एलबीडब्ल्यूकरके डच टीम को दूसरा झटका दिया। इस सफलता के साथ ही युवीने वनडेमें विकेटों का शतक लगाया।

युवराज यहीं नहीं थमे और उन्होंने रेयान डजटेच[11] को जहीर के हाथों कैच कराकर एक और झटका दिया। 99रन पर तीसरा विकेट गंवाने के बाद डच टीम मध्य क्रम बुरी तरह से लड़खड़ा गई और 108रन तक आते-आते तीन और विकेट गंवा दिया। विश्व कप में पहला मैच खेल रहे आशीष नेहराने 29रन बनाकर खेल रहे टाम कूपरको धौनीके हाथों कैच कराया। इसके अगले ही ओवर में जहीर ने बेसज्यूडिरेंट[0] को एलबीडब्ल्यूकरके आधी डच टीम को पवेलियन भेज दिया। हालांकि एलेक्सकेरवीजी[11] और कप्तान पीटर बोरेनकुछ देर तक क्रीज पर रहकर 19रनों की साझेदारी की। केरवीजीके रूप में चावला ने अपना दूसरा विकेट लिया।

अखिलेश यादव गिरफ्तार, कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज

अखिलेश यादव गिरफ्तार, कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज




लखनऊ। समाजवादी पार्टी [सपा] के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के पुत्र एवं सांसद अखिलेश यादव को पुलिस ने बुधवार सुबह अमौसी हवाईअड्डे पर गिरफ्तार कर लिया। अखिलेश सपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी है। साथ ही, प्रदेश की बसपा सरकार के खिलाफ लगातार तीसरे दिन विरोध प्रदर्शन जारी रखने वाले सपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लखनऊ सहित अन्य शहरों में लाठीचार्ज कर उन्हें हिरासत में लिया।

गिरफ्तारी के बाद संवाददाताओं से अखिलेश ने कहा कि मेरी गिरफ्तारी से यह साबित हो गया है कि मायावती सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है। यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों में भरोसा न करने वाली मायावती सरकार के इस दमनात्मक रवैए के खिलाफ हम हर लड़ाई लड़ेंगे चाहे राज्य सरकार हम पर कितने ही अत्याचार क्यों न कर ले।

लखनऊ के पुलिस उप महानिरीक्षक डीके ठाकुर ने कहा कि अखिलेश प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी बहुजन समाज पार्टी [बीएसपी] के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने जा रहे थे। प्रदर्शन में हिस्सा लेने से पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया।

सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने अखिलेश की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि हमारे नेता कोई कानून तोड़ने नहीं जा रहे थे, उनका पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करने का कार्यक्रम था। यहां कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज जाना था। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी नागरिक अधिकारों पर कुठाराघात है।

सपा ने मायावती सरकार के खिलाफ गत सात मार्च से तीन दिवसीय 'बसपा हटाओ, प्रदेश बचाओ' अभियान चला रखा है। प्रदेश के विभिन्न इलाकों में तीसरे दिन यानी बुधवार को भी सपाइयों का प्रदर्शन जारी रहा।

राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं ने राजधानी के हजरतगंज चौराहे पर उन्हें जुलूस निकालने से रोके जाने पर सड़क जाम कर पुलिस से झड़प की। पुलिस ने सपा कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए उन पर जमकर लाठियां भांजी। पुलिस का दावा है कि लाठीचार्ज में किसी को गंभीर चोटें नही आई वहीं सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि लखनऊ के अलावा इटावा और कन्नौज में भी पुलिस ने सपा कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर पुलिस सपा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार कर उनकी आवाज को दबाने का काम कर रही है। लेकिन सपा कार्यकर्ता पुलिस के इसके आगे भयभीत होने वाले नही हैं।

सपा ने मायावती सरकार के खिलाफ गत सात मार्च से तीन दिवसीय बसपा हटाओ, प्रदेश बचाओ अभियान चला रखा है। बुधवार को प्रदर्शन का आखिरी दिन है। प्रदेश के विभिन्न इलाकों में सपाइयों का प्रदर्शन जारी है।

ये फासले- भावनात्मक द्वंद का प्रभावहीन चित्रण

ये फासले- भावनात्मक द्वंद का प्रभावहीन चित्रण



मुख्य कलाकार : अनुपम खेर, पवन मल्होत्रा,रुशद राणा, किरण कुमार, सुधा चंद्रन, सीमा बिस्वास, राजेन्द्र गुप्ता, सत्यजीत शर्मा

निर्देशक : योगेश मित्तल

तकनीकी टीम : निर्माता- ओमप्रकाश मित्तल, संगीत- दीपक पंडित

पिता के आचार-विचार और व्यवहार के प्रति एक युवा बेटी का संदेहास्पद होना और अपनी मां का हत्यारा मानकर अजीज पिता को स्वयं कानूनन मौत के द्वार पहुंचा देना रोचक विषय है, लेकिन नए निर्देशक योगेश मित्तल इस विषय को पर्दे पर रोचक तरीके से पेश करने में सफल नहीं हुए हैं। पिता-पुत्री की भावनात्मक द्वंद से भरपूर इस कहानी में निर्देशक को अपने अनुभवी और प्रतिभाशाली सह-लेखकों अतुल तिवारी और मनुऋषि का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है।

विदेश से लंबे समय बाद पढ़ाई पूरी करके लौटी अरूणिमा अपने पिता देविंदर देवीलाल दुआ के साथ रहना चाहती है, लेकिन पिता उसे खुद से दूर रखना चाहते हैं। अरू अपने पिता को अच्छा इंसान मानती है। उनकी इज्जत करती है, लेकिन अचानक एक दिन जब वह उनका उग्र रूप देखती है तो हैरान हो जाती है। अपनी स्वर्गवासी मां के बारे में पापा द्वारा उसे बताई गई बातें झूठ निकलती हैं तो वह उन पर शक करने के लिए मजबूर हो जाती है। खोज करने पर अरू को पता चलता है कि पापा ने उसकी मां की हत्या की थी। वह पापा के खिलाफ केस दायर करती है और कानूनन उन्हें मौत की सजा मिलती है। अरू को अभी तक यकीन नहीं होता कि मां की हत्या पापा ने की है। अरू का ब्वॉयफ्रेंड मनु असली हत्यारे को ढूंढ़ने में कामयाब होता है।

योगेश मित्तल न तो देवीलाल दुआ और अरूणिमा के बीच के भावनात्मक दृश्यों और न ही कोर्ट के दृश्यों को संभाल पाए हैं। यकीन नहीं होता कि अतुल तिवारी और मनुऋषि जैसे लेखकों ने पटकथा और संवाद लिखे हैं। मध्यांतर के बाद फिल्म इतनी नीरस हो गई है कि अनुपम खेर, पवन मलहोत्रा और नई अभिनेत्री टीना देसाई का सधा अभिनय भी नहीं बांध पाता। गीत फिल्म में अनावश्यक लगते हैं।

कट्रीना और ऐश्वर्या में हीरोइन बनने की जंग

कट्रीना और ऐश्वर्या में हीरोइन बनने की जंग



मुंबई। सलमान की पूर्व गर्लफ्रेंड ऐश्वर्या राय और वर्तमान सखी कट्रीना कैफ में हीरोइन बनने की होड़ लगी है। दरअसल ये दोनों ही निर्देशक मधुर भंडारकर की अगली फिल्म हीरोइन में हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो का किरदार निभाना चाहती हैं।

खबर है कि मधुर ऐश्वर्या के पक्ष में हैं। मगर निर्माता को इस किरदार के लिए कट्रीना ज्यादा पसंद हैं। दोनों अभिनेत्रियां किसी भी तरह यह फिल्म हासिल करना चाहती हैं। वैसे इस फिल्म को लेकर करीना कपूर के नाम की भी चर्चा थी, लेकिन उन्होंने फिल्म के किरदार और उनकी असल जिंदगी में समानता को लेकर ना कर दी थी। अब देखना यह है कि ऐश और कैट में से बाजी किसके हाथ लगती है?

द्रमुक-कांग्रेस में सहमति, कांग्रेस के हिस्से 63 सीटें

द्रमुक-कांग्रेस में सहमति, कांग्रेस के हिस्से 63 सीटें





नई दिल्ली/चेन्नई। द्रमुक और काग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर चेन्नई में औपचारिक समझौते पर दस्तखत किए। द्रमुक ने काग्रेस को 63 सीटें दीं।

काग्रेस नेता तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने डीएमके के केंद्रीय मंत्रियों एमके अझागिरी और दयानिधि मारन के साथ दोनों दलों में समझौते की घोषणा की। आजाद तमिलनाडु के प्रभारी भी हैं। उन्होंने कहा, डीएमके और काग्रेस नेताओं ने तय किया है कि काग्रेस 63 सीटों पर चुनाव ल़डेगी। हम साथ लडे़ंगे और एक बार फिर राज्य में सरकार बनाने में सफल होंगे।

डीएमके काग्रेस को विधानसभा की 234 सीटों में से 63 सीटें देने के लिए तैयार हो गई है। मंगलवार को सीटों के बंटवारे पर सहमति की घोषणा से पहले काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी के आवास पर एक घटे तक बैठक चली। डीएमके और काग्रेस को फिर से एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अझागिरी ने आजाद की बातों की पुष्टि की। लेकिन इस बारे में उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी। चेन्नई में पार्टी के करीब 3000 कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री करूणानिधि ने कहा कि गठबंधन के व्यापक हितों को देखते हुए उनकी पार्टी ने बलिदान किया है और काग्रेस को अतिरिक्त सीटें देने के लिए तैयार हुई है। उन्होंने इसे खुशी का दिन बताया और भरोसा जताया कि जीत दर्ज करने के लिए गठबंधन के साथ नई ऊर्जा के साथ चुनाव ल़डेंगे।

करूणानिधि ने काग्रेस के लिए एक-एक सीट छो़डने के लिए अपनी दो प्रमुख सहयोगी पार्टियों पीएमके तथा इंडियन मुस्लिम लीग [आईयूएमएल] की प्रशसा की। उन्होंने काग्रेस और डीएमके के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश करने पर मीडिया के एक वर्ग की आलोचना भी की।

ज्ञात हो कि डीएमके ने पहले कहा था कि काग्रेस द्वारा 13 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए अपनी पसंद की 63 सीटों की माग करना जायज नहीं है। डीएमके ने शनिवार को केंद्र सरकार में शामिल अपने छह मंत्रियों को सोमवार रात तक इस्तीफा देने के लिए कहा था लेकिन काग्रेस द्वारा गतिरोध का हल निकालने के लिए और ज्यादा समय मागने पर मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया।

गतिरोध को समाप्त करने के लिए अझागिरी और मारन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और आजाद के साथ चर्चा करने के बाद सोमवार रात सोनिया गाधी से मिलने पहुंचे थे। डीएमके ने विधानसभा चुनावों के लिए छह पार्टियों से समझौता किया है। उसने विधानसभा की 234 सीटों में से 113 सीटें अपने सहयोगियों को दिया है। डीएमके ने काग्रेस को [63], केएमके को [7], वीसीके को [10], पीएमके को [30] और आईयूएमएल को [2] सीटें दी हैं।

सोमवार, 7 मार्च 2011

महिला सशक्तिकरण का यक्ष प्रश्न

महिला सशक्तिकरण का यक्ष प्रश्न





नई दिल्ली [डॉ. ऋतु सारस्वत]। भारत अपनी स्वतंत्रता के छह दशक बिता चुका है और इन वर्षो में भारत में बहुत कुछ बदला है। विश्व के सबसे मजबूत गणतंत्र में सभी को अपनी इच्छा से जीने, सोचने और अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता मिली है, जिसका हम उपभोग भी कर रहे हैं।

हालाकि एक वर्ग ऐसा भी है जो आज भी इस सुखानुभूति से वंचित है और वह हैं स्त्रिया। स्त्री और पुरुष के बीच भेद आज भी कायम है और यह तथ्य आकड़ों से उद्घाटित होता है जो विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर किए गए सर्वेक्षणों पर आधारित है।

एसोचैम की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय महिलाएं घर और दफ्तर दोनों ही जगह भेदभाव का शिकार हैं। काम के बढि़या अवसर तो दूर उन्हें पदोन्नति के समान अवसर तक नहीं मिलते, जिस कारण वह उच्च पदों पर नहीं पहुंच पाती हैं। महज 3.3 प्रतिशत महिलाएं ही शीर्ष पदों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाती हैं।

भारत में महिला आर्थिक गतिविधि दर केवल 42.5 प्रतिशत है, जबकि नार्वे में यह 60.3 प्रतिशत और चीन में 72.4 प्रतिशत है। यह आकड़े बाजार अर्थव्यवस्था से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के हैं। विश्व के कुल उत्पादन में लगभग 160 खरब डॉलर का योगदान अदृश्य सेवा का होता है, इसमें भारतीय महिलाओं का योगदान काफी बड़ा है। इसके बावजूद समाज के आर्थिक वर्गो की गणना करते हुए घरेलू महिलाओं के श्रम का उचित मूल्याकन नहीं हो पाता और उनकी तुलना नगण्य माने जाने वाले पेशों के तहत होती है।

देश के नीति-निर्धारकों की ओर से आर्थिक वर्गाीकरण करते हुए देश की आधी आबादी को इस दृष्टिकोण से देखा जाना न केवल उनके श्रम की गरिमा के प्रति घोर असंवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि यह भेदभाव और लैंगिक पूर्वाग्रह की पराकाष्ठा है।

विगत दो दशक में महिला सशक्तीकरण की अवधारणा ने जोर पकड़ा है। यह वह प्रक्रिया है जो महिलाओं को सत्ता की कार्यशैली समझने की न केवल समझ देता है अपितु सत्ता के स्त्रोतों पर नियंत्रण कर सकने की क्षमता भी प्रदान करता है। सामाजिक विकास अंतर्निहित रूप से राजनीतिक होता है, इसलिए यदि यह असमानतापूर्ण और गैर सहभागितापूर्ण हो तो इससे समाज का विकास प्रभावित होगा।

इंटर पार्लियामेंटरी यूनियन के अनुसार विभिन्न देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वहा की संसद में भारत की अपेक्षा बहुत अधिक है। यूं तो पंचायत और शहरी निकायों के माध्यम से विकास प्रक्रियाओं एवं निर्णयन की प्रक्त्रिया में सहभागिता बढ़ाने के लिए पचास प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है।

हालाकि अध्ययन बताते हैं कि सत्ता का उपभोग वास्तविक रूप में पदासीन महिलाओं की बजाय उनके परिवार के पुरुष सदस्य करते हैं। यदि कभी ऐसा नहीं होता तो उसके घातक परिणाम भी देखने में आए हैं। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक महिला सरपंच को पूर्व सरपंच तथा उसके साथियों ने बस स्टैंड पर नग्न करके मात्र इसलिए पीटा कि, क्योंकि कार्यभार संभालने के एवज में उसने पंचायत फंड से सात हजार रुपये नहीं दिए।

देश का संविधान, विभिन्न कानूनी प्रावधान और व्यक्तिगत तथा सामूहिक प्रयास स्त्री को उबारने में लगे हैं, लेकिन महिलाओं की परेशानिया कम नहीं हो रही हैं। देश में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहा महिलाएं स्वयं को सुरक्षित महसूस करती हों। बस, ट्रेन, ऑफिस, स्कूल-कॉलेज अथवा भीड़भाड़ वाले स्थानों से लेकर सुनसान रास्तों में फब्तिया कसने, घूरने, छेड़छाड़ आदि की घटनाएं आम हैं। सन 2009 में बलात्कार के 21 हजार मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 15 से 17 वर्ष वाली लड़कियों का प्रतिशत 12 फीसदी रहा तो उनसे छोटी लड़कियों की तादाद 29 प्रतिशत रही।

हाल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले वर्ष, हर तीन में से दो महिलाएं यौन हिंसा का शिकार हुई। आकड़े बताते हैं कि लड़किया और स्त्रिया बाहर की तरह अपने घरों में भी असुरक्षित हैं। पति और रिश्तेदारों द्वारा होने वाले अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। महिलाओं पर हो रही घरेलू हिंसा के आकड़े जितने लंबे-चौड़े हैं उतने ही डरावने भी।

उत्पीड़न, प्रताड़नाओं और अवहेलनाओं के कंटीले तारों से बींधता भारतीय स्त्री का जीवन इस धरा पर आने के लिए भी संघर्ष करता है। जन्म से पूर्व ही लिंग के प्रति भेदभाव आरंभ हो जाता है। भारत में बालिका भू्रणहत्या के संदर्भ में नोबेल पुरस्कार विजेता अम‌र्त्य सेन ने इस चिंता से सहमति जताई है कि इस कुप्रथा के चलते देश में ढाई करोड़ बच्चिया जन्म से पूर्व ही गुम हो गई।

यही नहीं, डब्ल्यूईएफ ने बच्चियों के स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा के आकड़ों के हिसाब से भी पुरुष-महिला समानता की सूची में इन्हें निचले पायदान पर पाया है। विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य और जीवित रहने जैसे मसलों में पुरुष और महिलाओं के बीच लगातार अंतर बना हुआ है।

भारत में महिला संवेदी सूचकाक लगभग 0.5 है जो कि स्पष्ट करता है कि महिलाएं मानव विकास की उपलब्धियों से दोहरे तौर पर वंचित हैं। विकसित देशों में प्रति लाख प्रसव पर 16-17 की मातृत्व मृत्युदर की तुलना में भारत में 540 की मातृत्व मृत्युदर, स्वास्थ्य रक्षा और पोषक आहार सुविधाओं में ढाचागात कमियों की ओर इशारा करती है।

जीवन के मूलभूत अधिकारों से वंचित देश की महिलाएं अनवरत रूप से असमानताओं के दंश झेल रही है। भारतीय महिलाओं में साक्षरता की कमी है सामंती समाज येन-केन प्रकारेण महिलाओं के अधिकारों का हनन परंपराओं के नाम पर करता है। यह विश्व के सबसे बड़े लोकतात्रिक देश को ऐसे कटघरे में ला खड़ा करता है जहा उसके पास मानवता के हनन को रोकने का कोई उत्तर नहीं है। जब स्त्रिया आगे बढ़ती हैं तो परिवार आगे बढ़ता है, गाव आगे बढ़ता है और राष्ट्र अग्रसर होता है। पर क्या हम वाकई इस तथ्य को आत्मसात कर पाए हैं या फिर स्त्री सशक्तीकरण की नियति महिला दिवस पर चर्चाओं और नारेबाजी तक सीमित हो गई है।

वैलेंटाइन डे बन रहा है महिला दिवस

शबाना आजमी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आस-पास अखबार, मैगजीन और होर्डिग्स पर तमाम विज्ञापन देखकर मुझे चिंता होती है कि महिला दिवस वैलेंटाइन डे का रूप अख्तियार करता जा रहा है, जिसका इस्तेमाल लोग अपना उत्पाद बेचने के लिए कर रहे हैं।

व्यक्तिगत तौर पर मैं किसी भी दिन एक फूल से लेकर डायमंड तक को प्राथमिकता दूंगी। एक स्नेहपूर्ण स्पर्श, चंद खुशनुमा पल और एक प्रशसापत्र भी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है। यह दिन औरतों द्वारा समाज में समान भागीदारी प्राप्त करने का एक प्रतीक है।

मेरे हिसाब से महिला दिवस मनाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन मुद्दों की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करता है जिन्हें हम अमूमन नजरअंदाज कर देते हैं। तमाम तरक्की और उपलब्धियों के बावजूद अभी कई क्षेत्र हैं जहा महिलाओं को आगे बढ़ना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में महिलाओं को समान मौके नहीं मिले हैं। पश्चिमी देशों में भी सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर बहुत कम महिलाएं हैं। खेल के नियम को भी बदलना होगा ताकि महिलाएं निर्णय प्रक्त्रिया में खुद हिस्सा ले सकें। निर्णय स्वीकार करने की मजबूरी खत्म होनी चाहिए। राष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर, सत्ताधारी पार्टी की प्रमुख व विपक्ष की नेता महिलाएं हैं, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या भी एक सच है।

गरीब ग्रामीण महिलाओं पर किसी का ध्यान नहीं है। हम उन महिलाओं को सलाम करते हैं जिन्होंने पुरुष प्रधान समाज में महिला को ऊपर उठाने के लिए संघर्ष किया। यह आत्म अवलोकन का अवसर भी है। मेरी पहली पहचान है कि मैं महिला हूं और मैं महिला दिवस अपनी महिला बहनों के लिए मनाती हूं। मैं एक ऐसी दुनिया की कल्पना करती हूं जहा स्त्री को अधिकार दिए जाएंगे ताकि वह पुरुषों के साथ आगे बढ़ सकें, न कि वह जिंदगाी भर दुर्बल बनी रहें और शक्तिशाली लोग उस पर राज करें।